By aryavartalive | Published: 21 July 2026 at 03:29 PM
राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी सोनम रघुवंशी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान संकेत दिया कि वह सोनम की जमानत रद्द करने के मामले पर गंभीरता से विचार कर रहा है। अदालत ने उनके वकील से कहा कि सोनम अंतरिम अवधि में आत्मसमर्पण कर सकती हैं और निचली अदालत में अहम गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद उनकी जमानत पर दोबारा विचार किया जा सकता है। अदालत ने सोनम से गुरुवार तक अपना रुख बताने को कहा है।
न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ मेघालय सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सोनम के वकील के सामने दो विकल्प रखे। पहला विकल्प यह था कि अदालत मामले के गुण-दोष पर सुनवाई करके अपना आदेश पारित करे। दूसरा विकल्प यह था कि सोनम फिलहाल आत्मसमर्पण कर दें और निचली अदालत में अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद उनकी जमानत पर फिर से विचार किया जाए।
‘हम आपको चौंकाना नहीं चाहते’, अदालत की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह सोनम को चौंकाना नहीं चाहता और उनके लिए दूसरा विकल्प बेहतर हो सकता है। अदालत ने उनके वकील से इस बारे में निर्देश लेकर आने को कहा। पीठ ने यह भी साफ किया कि अगर सोनम की ओर से मामले में आगे बहस की जाती है तो अदालत उनकी बात सुनेगी। हालांकि, अदालत ने उम्मीद जताई कि सोनम इस मामले में सही रुख अपनाएंगी।
गवाहों के बयान तक सरेंडर करने का सुझाव
अदालत का सुझाव है कि अगर सोनम आत्मसमर्पण करती हैं तो निचली अदालत में अहम गवाहों के बयान दर्ज होने तक वह हिरासत में रह सकती हैं। इसके बाद उनकी जमानत पर नए सिरे से विचार किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि अगर यह रास्ता अपनाया जाता है तो निचली अदालत को अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही जल्द पूरी करने का निर्देश भी दिया जा सकता है।
सोनम के वकील ने जमानत की शर्तों का दिया हवाला
सोनम की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि निचली अदालत ने जमानत देते समय उनके ऊपर कड़ी शर्तें लगाई हैं। उन्हें शिलांग में रहने और रोजाना अदालती कार्यवाही में उपस्थित रहने के लिए कहा गया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखेगा। अदालत ने दोनों पक्षों के हितों के बीच संतुलन बनाने की बात भी कही।
गुरुवार तक सोनम को बताना होगा अपना फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी के वकील से कहा है कि वह गुरुवार तक यह स्पष्ट करें कि सोनम अंतरिम अवधि में आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हैं या नहीं। इसका मतलब यह है कि फिलहाल अदालत ने जमानत रद्द करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है, लेकिन सुनवाई के दौरान उसकी संभावना जरूर सामने रखी है। अब सबकी नजर सोनम के वकील की ओर से लिए जाने वाले रुख पर है।
मेघालय सरकार ने जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
दरअसल, सोनम रघुवंशी को निचली अदालत से जमानत मिलने के बाद मेघालय सरकार ने इसका विरोध किया था। मेघालय हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के जमानत आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सरकार का कहना है कि सोनम को जमानत देने का आधार गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी दिए जाने से जुड़ी प्रक्रिया में हुई कथित गलती थी।
गिरफ्तारी के दस्तावेज में गलत धारा लिखने का मामला
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज में गलत कानूनी धारा लिखे जाने के मुद्दे पर भी अपनी दलील रखी। उनका कहना था कि हत्या के मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 के बजाय धारा 403 का उल्लेख महज टाइपिंग की गलती थी। उनके मुताबिक, इस गलती को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी नहीं दिए जाने के बराबर नहीं माना जा सकता।
राज्य का दावा- सोनम को गिरफ्तारी की वजह पता थी
तुषार मेहता ने अदालत में तर्क दिया कि सोनम को यह पता था कि उन्हें किस मामले में गिरफ्तार किया गया है। उनका कहना था कि सोनम ने अपनी पिछली जमानत अर्जियों में भी गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी नहीं दिए जाने की शिकायत नहीं की थी। राज्य की दलील के मुताबिक, यह मुद्दा बाद में जमानत हासिल करने के आधार के रूप में उठाया गया।
अनुच्छेद 22 का भी दिया गया हवाला
सॉलिसिटर जनरल ने संविधान के अनुच्छेद 22(1) का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किए जाने के कारणों की जानकारी देना जरूरी है, ताकि मनमानी गिरफ्तारी पर रोक लग सके और आरोपी को अपने खिलाफ लगे आरोपों की जानकारी हो। उन्होंने इसी संदर्भ में मधु लिमये से जुड़े पुराने फैसले का भी उल्लेख किया। राज्य का कहना है कि सोनम के मामले में गिरफ्तारी के दस्तावेज में हुई गलती को इतना गंभीर नहीं माना जाना चाहिए कि उसके आधार पर जमानत को सही ठहराया जाए।
राजा की हत्या की साजिश का आरोप
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि सोनम ने अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश रची थी। जांच एजेंसी के अनुसार, राजा और सोनम मई 2025 में मेघालय में हनीमून के लिए गए थे। इसी दौरान राजा की हत्या कर दी गई और उनका शव एक गहरी खाई में मिला था। पुलिस ने इस मामले में सोनम और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अभी अदालत में मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद ही होगी।
प्रेमी और कथित भाड़े के हत्यारों से मिलीभगत का आरोप
राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि अभियोजन पक्ष के अनुसार सोनम ने कथित तौर पर अपने प्रेमी और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर राजा की हत्या की साजिश रची थी। आरोप है कि राजा को मेघालय की पहाड़ियों में एक सुनसान जगह ले जाया गया, जहां उनकी हत्या के बाद शव को खाई में फेंक दिया गया। ये सभी आरोप अभियोजन पक्ष के हैं और मामले की सुनवाई के दौरान इनके पक्ष और विपक्ष में साक्ष्य पेश किए जाने हैं।
सोनम के व्यवहार पर भी अदालत ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की परिस्थितियों और घटना के बाद सोनम के कथित आचरण को लेकर भी सवाल उठाए। अदालत ने यह जानना चाहा कि घटना के बाद सोनम ने क्या किया और क्या उन्होंने अपनी पिछली जमानत अर्जियों में गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया था। इससे साफ है कि अदालत मामले में केवल तकनीकी खामी ही नहीं, बल्कि जमानत से जुड़े व्यापक पहलुओं पर भी विचार कर रही है।
अब सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर टिकी नजर
राजा रघुवंशी हत्याकांड में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सोनम रघुवंशी सुप्रीम कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण का विकल्प स्वीकार करती हैं या मामले के गुण-दोष पर सुनवाई जारी रखने का फैसला लेती हैं। अगर वह सरेंडर करती हैं तो गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद उनकी जमानत पर फिर से विचार हो सकता है। वहीं, अगर वह इस विकल्प को स्वीकार नहीं करतीं तो सुप्रीम कोर्ट मामले की जमानत याचिका पर सीधे सुनवाई कर अपना आदेश दे सकता है। ऐसे में गुरुवार को होने वाली सुनवाई इस मामले की आगे की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।
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