By Malay Ojha | Published: 21 July 2026 at 04:56 PM
पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मॉनसून सत्र के दूसरे दिन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी समेत पार्टी के कई बड़े नेता संसद से प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करने के बाद धरने पर बैठ गए। कांग्रेस नेताओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया, जबकि पुलिस राहुल गांधी से भी धरना खत्म करने की अपील करती नजर आई।
कांग्रेस नेताओं का यह प्रदर्शन उस घटना के विरोध में किया गया, जिसमें पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का आरोप लगाया गया है। राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता पहले संसद परिसर से प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करने के लिए निकले। इसके बाद नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना शुरू कर दिया। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार छात्रों की समस्याओं और परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों पर संसद में चर्चा से बच रही है।
राहुल गांधी बोले- युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा
धरने पर बैठने से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वह युवा छात्रों के साथ हुई कथित बर्बरता को लेकर जवाब मांगने के लिए प्रधानमंत्री आवास तक मार्च कर रहे हैं। राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार इस पूरे मामले की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है और संसद में भी इस पर चर्चा नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य बर्बाद किया जा रहा है।
‘छात्र कह रहे हैं भविष्य नहीं, मंत्री कह रहे कुर्सी नहीं जाएगी’
इससे पहले मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश का छात्र आज यह सवाल कर रहा है कि उसका भविष्य क्या होगा, जबकि सरकार के मंत्री अपनी कुर्सी बचाने की चिंता में लगे हैं। राहुल ने कहा कि जिस देश में छात्रों को अपना भविष्य अंधकार में दिखाई दे और मंत्री अपनी कुर्सी को लेकर चिंतित रहें, वहां न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार इस पूरे मामले की जिम्मेदारी लेने से बच रही है। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दोनों सदनों में आकर इस मुद्दे पर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की परेशानी केवल परीक्षा या शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर उनके भविष्य से जुड़ा हुआ सवाल है।
जितेंद्र सिंह पहुंचे, राहुल गांधी से हुई बातचीत
कांग्रेस नेताओं के धरने के करीब एक घंटे बाद केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह प्रदर्शन कर रहे नेताओं से मिलने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेताओं से बातचीत की। धरना स्थल पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत का दौर चला। हालांकि, कांग्रेस नेता अपनी मांगों पर कायम रहे और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराते रहे।
राहुल गांधी ने इस दौरान कहा कि देश के युवाओं के सामने रोजगार और अवसरों की कमी एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं के लिए आगे बढ़ने के रास्ते लगातार बंद होते जा रहे हैं। राहुल के मुताबिक, एक समय प्रतियोगी परीक्षाएं युवाओं के लिए आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण जरिया थीं, लेकिन अब परीक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
‘युवाओं को लगता है शिक्षा व्यवस्था पर कब्जा हो गया’
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि शिक्षा व्यवस्था पर कुछ बड़े कारोबारियों और एक संस्था का प्रभाव बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं की चिंता को केवल शिक्षा के मुद्दे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह देश के भविष्य और युवाओं को मिलने वाले अवसरों से जुड़ा बड़ा सवाल है।
उन्होंने कहा कि देशभर में छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए। राहुल गांधी के मुताबिक, युवाओं की इन चिंताओं का जवाब सरकार को संसद में देना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने और छात्रों की शिकायतों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।
प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं ने लगाई सांकेतिक हथकड़ी
धरने के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी समेत कई कांग्रेस नेताओं ने सांकेतिक तौर पर हथकड़ी लगाकर विरोध जताया। कांग्रेस नेताओं ने इसके जरिए सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान मौके पर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई।
इसी बीच पुलिस अधिकारियों ने राहुल गांधी से भी बातचीत की और धरना समाप्त करने को कहा। पुलिस ने प्रदर्शन स्थल के पास दो बसें भी खड़ी कर दीं। इसके बाद वहां मौजूद कांग्रेस नेताओं और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस ने कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया।
रंधावा और चन्नी समेत कई नेता हिरासत में
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा और चरणजीत सिंह चन्नी समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस की कार्रवाई के बाद यह आशंका भी जताई जाने लगी कि धरने पर बैठे अन्य कांग्रेस नेताओं को भी हिरासत में लिया जा सकता है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान करे। वहीं, विपक्ष इस पूरे मामले को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य का मुद्दा अब संसद के भीतर के साथ-साथ सड़क पर भी राजनीतिक टकराव का कारण बन गया है।
संसद में भी उठ चुका है पेपर लीक का मुद्दा
पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा पहले भी संसद में विपक्ष की ओर से उठाया जाता रहा है। कांग्रेस का कहना है कि देश के लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार को इस मामले में जवाबदेही तय करनी चाहिए और परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। दूसरी ओर, केंद्र सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जाती रही है।
फिलहाल, मॉनसून सत्र के दौरान पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं के प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने, केंद्रीय मंत्री से बातचीत और उसके बाद कांग्रेस नेताओं की हिरासत ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है। अब देखना होगा कि विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच सरकार संसद में इस मुद्दे पर क्या जवाब देती है और कांग्रेस के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर आगे क्या रुख सामने आता है।
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