By Malay Ojha | Published: 22 July 2026 at 01:34 PM
लोकसभा में बुधवार को नीट पेपर लीक और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा गरमा गया। विपक्ष सरकार से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पूरे मामले पर सदन में चर्चा की मांग कर रहा था। इसी दौरान समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को बोलने का मौका नहीं मिलने पर वह नाराज हो गए। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों को बोलने का मौका दिया गया, तो समाजवादी पार्टी की बात क्यों नहीं सुनी गई।
अखिलेश यादव ने सदन में साफ कहा कि नीट पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा किसी एक दल से जुड़ा हुआ नहीं है। यह देश के लाखों छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि अगर छात्रों की आवाज सदन में नहीं सुनी जाएगी तो विपक्ष को मजबूर होकर सड़क पर उतरना पड़ेगा।
स्पीकर से अखिलेश की नाराजगी
अखिलेश यादव ने लोकसभा अध्यक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा कि आपने इनके और उनके बोलने का मौका दे दिया, लेकिन हमारा क्या? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पक्ष और विपक्ष के कुछ लोगों के बीच इस मुद्दे को लेकर कोई समझौता हो गया है। अखिलेश के इस बयान के बाद सदन में राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया।
‘छात्रों की बात नहीं सुनी तो सड़क पर उतरेंगे’
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि छात्रों के साथ हुए व्यवहार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर गंभीरता से बात होनी चाहिए। अगर सदन में छात्रों की आवाज को जगह नहीं मिलेगी तो आंदोलन को सड़क तक ले जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अखिलेश का हमला
अखिलेश यादव ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि मंत्री से इस्तीफा लेना कोई बड़ी बात नहीं है। अगर वह सदन के भीतर इस्तीफा नहीं देंगे तो सदन के बाहर इस्तीफा लिया जाएगा। हालांकि, उनके मुताबिक असली सवाल मंत्री के इस्तीफे से आगे बढ़कर छात्रों के साथ हुए व्यवहार का है।
पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने प्रदर्शनकारी छात्रों और नेताओं के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कई लोगों के हाथ तोड़े गए, सिर फोड़े गए और कपड़े तक फाड़े गए। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
‘अगर यहां बात सुनी जाती तो वहां जाने की जरूरत नहीं पड़ती’
अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह और राहुल गांधी मजबूरी में प्रधानमंत्री आवास तक गए थे। अगर सदन में उनकी बात सुन ली जाती और छात्रों से जुड़े सवालों पर चर्चा हो जाती तो उन्हें वहां जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
प्रधानमंत्री के सदन में बयान देने पर भी सवाल
सपा अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री के सदन में आकर बयान देने को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बाहर युवाओं और छात्रों के मुद्दे पर बोल सकते हैं, लेकिन फिर सदन में आकर इस विषय पर बयान क्यों नहीं देते? उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री देश के युवाओं के लिए सदन में अपनी बात नहीं रख सकते?
सरकार ने कहा- चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार
अखिलेश यादव से पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सदन में किसी भी मुद्दे पर चर्चा तय नियमों के तहत होती है और इसके लिए पहले व्यवस्था बनाना जरूरी है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से सभी दलों के सदन के नेताओं से बातचीत करके चर्चा का समय और अवधि तय करने का आग्रह किया।
रिजिजू बोले- युवाओं के भविष्य पर सार्थक चर्चा चाहते हैं
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार नीट और पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार चाहती है कि इस विषय पर सभी दल मिलकर सार्थक चर्चा करें। सरकार की ओर से चर्चा की तैयारी की बात सामने आने के बाद सदन में इस मुद्दे पर आगे की प्रक्रिया को लेकर रास्ता साफ होने की उम्मीद बनी।
स्पीकर ने सभी दलों से मांगी राय
इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सदन में मौजूद सदस्यों से पूछा कि क्या सभी की बात उन तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष भी चर्चा चाहता है और सरकार भी चर्चा के लिए तैयार है। इसके बाद उन्होंने विपक्ष से पूछा कि इस विषय पर चर्चा कब की जाए और कितनी देर तक चर्चा होनी चाहिए।
नीट विवाद पर संसद में बढ़ा दबाव
नीट पेपर लीक का मुद्दा लंबे समय से छात्रों और विपक्षी दलों के बीच बड़ा सवाल बना हुआ है। छात्रों के प्रदर्शन और उनके खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई ने इस विवाद को और ज्यादा गंभीर बना दिया है। विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है। वहीं सरकार चर्चा के लिए तैयार होने की बात कह रही है।
अखिलेश के तेवर से साफ हुआ विपक्ष का रुख
लोकसभा में बुधवार की कार्यवाही से यह साफ हो गया कि नीट पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा अब केवल एक दल तक सीमित नहीं रहने वाला है। अखिलेश यादव ने जिस तरह सदन में अपनी नाराजगी जाहिर की और छात्रों के मुद्दे पर सड़क पर उतरने की चेतावनी दी, उससे आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक टकराव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
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