By Malay Ojha | Published: 24 July 2026 at 11:45 AM
सोनम वांगचुक ने 26 दिन तक चले अपने अनशन को खत्म कर दिया है, लेकिन परीक्षा में कथित गड़बड़ी और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर शुरू हुआ आंदोलन अभी थमता नहीं दिख रहा है। वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने साफ कर दिया है कि संगठन अपनी सबसे बड़ी मांग से पीछे हटने वाला नहीं है। उनकी मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी तय हो और उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।
सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के फैसले के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि छात्रों का यह आंदोलन आगे किस दिशा में जाएगा। सरकार की ओर से परीक्षा में कथित गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई, तेज सुनवाई और इस मुद्दे पर संसद में चर्चा का भरोसा दिए जाने के बाद वांगचुक ने अपना अनशन खत्म किया। हालांकि, सीजेपी का कहना है कि वांगचुक का अनशन खत्म होना आंदोलन के खत्म होने का संकेत नहीं है।
अभिजीत दीपके बोले- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा चाहिए
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने सोशल मीडिया संदेश में साफ शब्दों में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी मांगों में सबसे ऊपर है। उनका कहना है कि सरकार अगर परीक्षा व्यवस्था में सुधार और दोषियों पर कार्रवाई की बात कर रही है, तो फिर उस व्यवस्था की राजनीतिक जिम्मेदारी तय करने के सवाल से बचा क्यों जा रहा है। सीजेपी के मुताबिक, जब तक शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक छात्रों के आंदोलन का मूल सवाल बना रहेगा।
छात्रों की सबसे बड़ी मांग क्या है?
समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक बातचीत में सीजेपी के प्रवक्ता दीपक बालियान ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि आंदोलन कर रहे युवाओं की सबसे बड़ी और पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। उनके मुताबिक, छात्रों का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों और परीक्षा में सामने आई कथित गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय किए बिना इस पूरे मामले को खत्म नहीं किया जा सकता।
‘इस्तीफे के बाद ही तय होगी जिम्मेदारी’
दीपक बालियान का कहना है कि छात्रों की नजर में यह सिर्फ एक परीक्षा या एक कथित प्रश्नपत्र लीक का मामला नहीं है। यह उस पूरी व्यवस्था पर सवाल है, जिसमें देश के लाखों युवा अपने भविष्य के लिए वर्षों तक मेहनत करते हैं। उनका तर्क है कि अगर किसी बड़ी परीक्षा में गड़बड़ी होती है, तो उसका सीधा असर छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ता है। ऐसे में जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है और इसी वजह से वे शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
कर्ज लेकर पढ़ाई करने वाले छात्रों की मेहनत पर असर
बालियान ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र हैं, जिनके परिवार उनकी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए कर्ज तक लेते हैं। कई युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अपना कई साल लगा देते हैं। दिन-रात पढ़ाई करने के बाद जब परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं या प्रश्नपत्र लीक होने जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो इसका असर केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहता। छात्रों का समय, पैसा और मानसिक तनाव बढ़ता है।
‘सालों की मेहनत एक झटके में बर्बाद हो जाती है’
सीजेपी प्रवक्ता के मुताबिक, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए हर परीक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। एक परीक्षा रद्द होने या उसमें गड़बड़ी सामने आने का मतलब कई छात्रों के लिए अपने भविष्य की योजना को फिर से शुरू करना होता है। उन्होंने कहा कि कई परिवारों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं होती कि वे बार-बार परीक्षा की तैयारी का खर्च उठा सकें। यही वजह है कि छात्र इस पूरे मामले में जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
सरकार की सख्त कार्रवाई के भरोसे पर भी सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मामलों की जल्द सुनवाई की बात सामने आने के बाद सरकार की तरफ से यह संदेश देने की कोशिश हुई कि दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा। लेकिन आंदोलन कर रहे लोगों का सवाल है कि अगर दोषियों पर कार्रवाई की बात हो रही है, तो राजनीतिक जिम्मेदारी के सवाल पर चर्चा क्यों नहीं की जा रही। उनका कहना है कि कानून बनाना और दोषियों को सजा दिलाना अपनी जगह है, लेकिन प्रशासनिक और राजनीतिक जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई का भी उठा मुद्दा
दीपक बालियान ने 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ जिस तरह की कार्रवाई हुई, उस पर सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा। उनका कहना है कि आंदोलन कर रहे युवाओं के बीच इस कार्रवाई को लेकर नाराजगी है। सीजेपी की तरफ से यह भी कहा गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ दर्ज मामलों और कार्रवाई पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सोनम वांगचुक के साथ व्यवहार पर भी नाराजगी
सीजेपी के प्रवक्ता ने सोनम वांगचुक के साथ हुए व्यवहार पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि वांगचुक को जिस तरह से अस्पताल ले जाया गया और पूरे घटनाक्रम को जिस तरीके से संभाला गया, वह सम्मानजनक नहीं था। संगठन का कहना है कि एक सामाजिक कार्यकर्ता के साथ बातचीत और सम्मान के साथ बात होनी चाहिए थी। हालांकि, वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की संभावना को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
वांगचुक ने अनशन तोड़ा, लेकिन सीजेपी की लड़ाई जारी
सोनम वांगचुक के 26 दिन बाद अनशन खत्म करने के फैसले ने आंदोलन को एक नया मोड़ दिया है। एक तरफ सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित प्रश्नपत्र लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ सीजेपी ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। संगठन की ओर से कहा गया है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठाता रहेगा और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी रहेगी।
अब आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सोनम वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद छात्रों का आंदोलन किस दिशा में जाएगा। क्या सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर कोई ठोस कदम उठाएगी? क्या कथित प्रश्नपत्र लीक मामलों में तेजी से कार्रवाई होगी? और सबसे अहम, क्या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार कोई जवाब देगी? फिलहाल सीजेपी अपने रुख पर कायम है। यानी वांगचुक का अनशन भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन छात्रों के आंदोलन से जुड़े सवाल अभी खत्म नहीं हुए हैं।
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