By Malay Ojha | Published: 24 July 2026 at 10:30 PM
बिहार में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए राज्य के करीब 3.36 लाख वितरण ट्रांसफॉर्मरों का नियमित चेकअप अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत ट्रांसफॉर्मरों की तकनीकी जांच, परीक्षण और समय पर अनुरक्षण किया जाएगा, ताकि खराबी का पता पहले ही लगाया जा सके और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाओं को कम किया जा सके। ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने अधिकारियों को इस पूरी व्यवस्था की नियमित निगरानी और तय मानकों के मुताबिक काम कराने का निर्देश दिया है।
पटना स्थित विद्युत भवन में शुक्रवार को राज्य के सभी वितरण ट्रांसफॉर्मरों के परीक्षण और बिजली व्यवस्था की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक हुई। ऊर्जा मंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बिजली आपूर्ति को सुरक्षित, भरोसेमंद और उपभोक्ताओं की जरूरत के मुताबिक बेहतर बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में अधिकारियों को साफ निर्देश दिया गया कि ट्रांसफॉर्मरों और बिजली की दूसरी संरचनाओं के रखरखाव में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
खराबी का पहले पता लगाने पर जोर
ऊर्जा विभाग की नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह है कि ट्रांसफॉर्मर या बिजली की किसी दूसरी संरचना में खराबी आने के बाद मरम्मत करने के बजाय उसकी समस्या को पहले ही पहचान लिया जाए। इसके लिए नियमित तकनीकी जांच और निरीक्षण पर जोर दिया गया है। विभाग का मानना है कि समय पर चेकअप और अनुरक्षण से बिजली आपूर्ति में आने वाली रुकावटों को कम करने के साथ उपकरणों की कार्यक्षमता और उनकी उपयोग अवधि भी बढ़ाई जा सकती है।
उपभोक्ताओं की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश
ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने कहा कि राज्य के हर उपभोक्ता को सुरक्षित, निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि टोल फ्री नंबर 1912, सहयोग शिविर और ऑनलाइन माध्यम से मिलने वाली शिकायतों का नियमित विश्लेषण किया जाए। शिकायतों और उपभोक्ताओं से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि बिजली से जुड़ी समस्याओं का समाधान समय पर किया जा सके।
कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों पर भी विशेष नजर
बैठक में कृषि फीडरों, ग्रामीण इलाकों और औद्योगिक क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। इन क्षेत्रों में लगे ट्रांसफॉर्मरों, बिजली लाइनों और अन्य विद्युत संरचनाओं की नियमित जांच और अनुरक्षण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों को यह भी समझाया कि ट्रांसफॉर्मर बिजली व्यवस्था का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है और उसकी देखभाल को प्राथमिकता के साथ किया जाना चाहिए।
मोबाइल ऐप से होगी निरीक्षण की निगरानी
ऊर्जा सचिव और बिहार राज्य पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने कहा कि बिजली से जुड़ी संरचनाओं के निरीक्षण और अनुरक्षण की व्यवस्था को जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाया जा रहा है। इसके तहत निर्धारित निरीक्षण व्यवस्था का पालन सुनिश्चित किया जाएगा और मोबाइल ऐप के माध्यम से निरीक्षण तथा अनुरक्षण कार्यों की ऑनलाइन निगरानी की जाएगी। इससे यह पता लगाने में आसानी होगी कि किस क्षेत्र में कब और किस स्तर पर निरीक्षण हुआ है।
जेई और एई को नियमित क्षेत्र भ्रमण का निर्देश
बैठक में सभी कनीय और सहायक विद्युत अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्रों का नियमित दौरा करने का निर्देश दिया गया। उन्हें अपने अधीन आने वाली बिजली संरचनाओं की स्थिति की जांच कर उन्हें सुरक्षित और चालू हालत में बनाए रखने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं विद्युत कार्यपालक अभियंताओं को समय पर अनुरक्षण और जरूरी मरम्मत का काम पूरा कराने का दायित्व सौंपा गया है।
हर महीने 33 प्रतिशत उपकेंद्रों की जांच होगी
निरीक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। इसके तहत हर महीने संबंधित क्षेत्र के 33 प्रतिशत वितरण उपकेंद्रों का निरीक्षण कनीय विद्युत अभियंता करेंगे। इनमें से 10 प्रतिशत उपकेंद्रों की जांच सहायक विद्युत अभियंता और 5 प्रतिशत की जांच विद्युत कार्यपालक अभियंता करेंगे। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बिजली व्यवस्था की निगरानी केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि मौके पर जाकर भी उसकी स्थिति की जांच की जाए।
33/11 केवी उपकेंद्रों का भी होगा निरीक्षण
बैठक में 33/11 केवी विद्युत शक्ति उपकेंद्रों के निरीक्षण की भी जिम्मेदारी तय की गई। सभी ऐसे उपकेंद्रों का हर महीने सहायक विद्युत अभियंता द्वारा निरीक्षण किया जाएगा। इनमें से 20 प्रतिशत का निरीक्षण विद्युत कार्यपालक अभियंता और 5 प्रतिशत का निरीक्षण विद्युत अधीक्षण अभियंता करेंगे। इस तरह अलग-अलग स्तर के अधिकारी बिजली व्यवस्था की जमीनी स्थिति की जांच करेंगे।
बिजली लाइनों में खराबी पर जल्द बहाली के निर्देश
बैठक में अधिकारियों को बिजली लाइनों में खराबी या टूटने की स्थिति में तय प्रक्रिया के अनुसार जल्द से जल्द आपूर्ति बहाल करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा विद्युत शक्ति उपकेंद्रों, 33 केवी, 11 केवी और एलटी लाइनों के साथ वितरण ट्रांसफॉर्मरों का नियमित अनुरक्षण करने को कहा गया। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि जहां बिजली के तार ढीले हैं, उन्हें तुरंत ठीक कराया जाए। ढीले तारों के आपस में टकराने से शॉर्ट सर्किट और आग लगने जैसी घटनाओं का खतरा रहता है।
ट्रांसफॉर्मरों की नियमित जांच से घटेगा खराबी का खतरा
बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि बिजली के नेटवर्क में लगे ट्रांसफॉर्मरों और अन्य उपकरणों की नियमित जांच जरूरी है। समय-समय पर तकनीकी परीक्षण होने से संभावित खराबियों का पहले ही पता लगाया जा सकता है। इससे उपकरणों की कार्यक्षमता बनाए रखने के साथ उनकी उपयोग अवधि बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
निवारक अनुरक्षण पर दक्षिण बिहार में जोर
साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सौरव जोरवाल ने बताया कि दक्षिण बिहार में बिजली संरचनाओं के निवारक अनुरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। नियमित निरीक्षण, डिजिटल निगरानी और तय प्रक्रिया के अनुसार अनुरक्षण के जरिए बिजली आपूर्ति में अचानक आने वाली खराबियों को कम करने की कोशिश की जा रही है। इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों को निर्देश लागू कराने की जिम्मेदारी
बिहार स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विशाल राज ने बैठक में दिए गए निर्देशों को प्रभावी तरीके से लागू कराने का भरोसा दिया। कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। बैठक में बिहार राज्य पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड और बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के निदेशक परियोजना विजय कुमार तथा प्रशिक्षण समन्वयक-सह-सलाहकार अशोक कुमार समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
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