By Malay Ojha | Published: 02 August 2026 at 10:04 PM
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में रविवार को एक शांति रैली के दौरान हुए जोरदार धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया। स्वात जिले के कबाल इलाके में पुलिस स्टेशन के पास हुए इस विस्फोट में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 लोग घायल बताए जा रहे हैं। धमाका उस समय हुआ, जब बड़ी संख्या में लोग इलाके में बढ़ती हिंसा और आतंकी घटनाओं के खिलाफ शांति की अपील करते हुए प्रदर्शन कर रहे थे। प्रारंभिक जानकारी में इसे संदिग्ध आत्मघाती हमला बताया जा रहा है, लेकिन इसकी आधिकारिक तौर पर अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
शांति की मांग के बीच अचानक हुआ धमाका
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शांति रैली का आयोजन स्थानीय कबायली परिषद से जुड़े ‘स्वात अमन जिरगा’ की ओर से किया गया था। रैली में शामिल लोग इलाके में शांति बहाल करने की मांग को लेकर नारे लगा रहे थे और हाथों में तख्तियां लेकर चल रहे थे। बताया जा रहा है कि जब कार्यक्रम अपने अंतिम दौर में था और एक वक्ता लोगों को संबोधित कर रहा था, तभी पुलिस स्टेशन के प्रवेश द्वार के पास तेज धमाका हो गया। अचानक हुए विस्फोट से वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थान की ओर भागने लगे।
तलाशी के दौरान संदिग्ध हमलावर ने खुद को उड़ाया?
प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने कबाल पुलिस स्टेशन के गेट के पास एक संदिग्ध व्यक्ति को रोककर उसकी तलाशी लेने की कोशिश की थी। इसी दौरान विस्फोट होने की बात सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में इसे आत्मघाती हमला बताया गया है, लेकिन पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से घटना की पूरी प्रकृति को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। जांच एजेंसियां मौके से सबूत जुटा रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हमलावर अकेला था या उसके पीछे कोई संगठन या नेटवर्क काम कर रहा था।
घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया
धमाके के तुरंत बाद पुलिस, बचाव दल और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में भेजे जाने की भी जानकारी सामने आई है। विस्फोट के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया और आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगाते हुए तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों को आशंका है कि हमले से जुड़े अन्य सुराग आसपास के इलाके में मिल सकते हैं, इसलिए जांच टीमों ने घटनास्थल को सुरक्षित कर दिया है।
बड़ी भीड़ जुटी थी, निशाने पर पुलिस स्टेशन के पास का इलाका
रिपोर्टों के मुताबिक, शांति प्रदर्शन में स्वात जिले के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। प्रदर्शनकारी हाल के महीनों में इलाके में बढ़ती हिंसा और सुरक्षा संबंधी घटनाओं को लेकर चिंता जता रहे थे। ऐसे समय में पुलिस स्टेशन के पास धमाका होने से सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों ने आसपास के इलाकों में चौकसी बढ़ा दी है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
किसी संगठन ने अभी नहीं ली हमले की जिम्मेदारी
घटना के बाद अब तक किसी भी आतंकी संगठन या समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि धमाका किस तरह किया गया और इसका वास्तविक निशाना कौन था। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या हमलावर का लक्ष्य पुलिसकर्मी थे या शांति रैली में शामिल भीड़। फिलहाल अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर भरोसा नहीं करने और जांच पूरी होने तक आधिकारिक जानकारी का इंतजार करने की अपील की है।
एक ही दिन में पुलिस को निशाना बनाने की दूसरी घटना
स्वात में हुए इस धमाके से पहले उसी दिन खैबर पख्तूनख्वा की राजधानी पेशावर में भी एक विस्फोट की खबर सामने आई थी। रिपोर्टों के अनुसार, पेशावर-इस्लामाबाद मोटरवे के टोल प्लाजा के पास हुए आईईडी विस्फोट में दो पुलिसकर्मी घायल हुए। इन घटनाओं ने प्रांत में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। पुलिस और सुरक्षा बलों ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है और संदिग्ध गतिविधियों की जांच की जा रही है।
कुछ दिन पहले हांगू में भी हुआ था हमला
खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा बलों पर हमलों का सिलसिला पहले भी सामने आता रहा है। 30 जुलाई को हांगू जिले में एक पुलिस चौकी पर हुए हमले में नौ पुलिसकर्मियों की मौत की खबर सामने आई थी। इसके बाद लगातार हो रही हिंसक घटनाओं ने प्रांत में सुरक्षा की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। स्वात में शांति रैली के दौरान हुआ ताजा धमाका ऐसे समय में हुआ है, जब स्थानीय लोग खुद हिंसा के खिलाफ सड़कों पर उतरकर शांति की मांग कर रहे थे।
जुलाई में हिंसा से जुड़ी मौतों में तेज बढ़ोतरी
खैबर पख्तूनख्वा में बीते कुछ समय से हिंसा और आतंकी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में हिंसा से जुड़ी 154 मौतें दर्ज की गईं, जबकि जून में यह संख्या 75 थी। यानी एक महीने के भीतर हिंसा से जुड़ी मौतों में करीब 105 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। ऐसे में स्वात में शांति रैली के दौरान हुआ हमला इस बात को लेकर चिंता बढ़ाता है कि हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने वाले आम लोग भी अब सुरक्षित नहीं हैं।
राज्य सरकार ने मांगी घटना की रिपोर्ट
धमाके के बाद खैबर पख्तूनख्वा के राज्यपाल फैसल करीम कुंदी ने घटना की निंदा करते हुए जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने भी हमले की कड़ी निंदा की और प्रांत के पुलिस महानिरीक्षक से घटना की रिपोर्ट मांगी। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की बात कही।
जांच के बाद साफ होगी धमाके की पूरी तस्वीर
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कबाल पुलिस स्टेशन के पास हुआ धमाका वास्तव में आत्मघाती हमला था या इसके पीछे किसी दूसरे तरीके का इस्तेमाल किया गया। घटनास्थल से जुटाए जा रहे सबूत जांच की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। पुलिस ने इलाके को घेरकर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस इलाके में लोग आतंक और हिंसा के खिलाफ शांति की आवाज बुलंद करने के लिए जुटे थे, वहां इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने वाला कौन था और उसका असली निशाना क्या था। जांच आगे बढ़ने के साथ ही इन सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।
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