By Malay Ojha | Published: 08 August 2026 at 06:10 PM
विकासशील इंसान पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश में निषाद आरक्षण के मुद्दे को लेकर भाजपा और योगी सरकार के खिलाफ अपना रुख और सख्त कर दिया है। लखीमपुर खीरी में आयोजित सामाजिक मिलन समारोह में सहनी ने गंगाजल हाथ में लेकर लोगों को संकल्प दिलाया कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले निषाद समाज को आरक्षण नहीं मिला तो भाजपा को वोट नहीं दिया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि अब निषाद समाज अपने अधिकारों के लिए किसी दूसरे नेता या दल के भरोसे नहीं बैठेगा।
सहनी ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से कहा कि निषाद समाज को अपने बच्चों के भविष्य का फैसला खुद करना होगा। उनके मुताबिक, जब तक समाज अपने अधिकारों के सवाल पर एकजुट नहीं होगा, तब तक राजनीतिक दलों पर दबाव बनाना मुश्किल रहेगा। उन्होंने कहा कि अब वोट किसी चेहरे, भावनाओं या चुनाव के समय मिलने वाले लाभ के आधार पर नहीं, बल्कि अधिकार और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को देखकर दिया जाना चाहिए।
आठ विधानसभा क्षेत्रों में बनेगी कमेटी
मुकेश सहनी ने लखीमपुर खीरी की आठ विधानसभा सीटों के लिए अलग-अलग कमेटियां बनाने का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सीट पर आठ लोगों की टीम तैयार की जाएगी। ये कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर निषाद समाज के लोगों से संपर्क करेंगे और उन्हें आरक्षण के सवाल पर जागरूक करेंगे। सहनी के मुताबिक, दीपावली तक यह अभियान लगातार चलाया जाएगा और पार्टी की ओर से कार्यकर्ताओं को जरूरी मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
बोले- अपनी लड़ाई खुद लड़ना सीखना होगा
सहनी ने निषाद समाज से राजनीतिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपनी वकालत किसी दूसरे के हाथ में सौंप देता है, उसका वकील कभी भी बिक सकता है। इसलिए समाज को अपनी आवाज खुद उठानी होगी। उनका कहना था कि निषाद समाज को यह तय करना होगा कि उसके बच्चों की शिक्षा, रोजगार और भविष्य के लिए कौन खड़ा है और कौन केवल चुनाव के समय उसके पास आता है।
संजय निषाद को भी दिया छह महीने का समय
मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि संजय निषाद कभी निषाद समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करते थे, लेकिन अब सत्ता के साथ समझौता कर चुके हैं। सहनी ने उन्हें छह महीने का समय देते हुए कहा कि इस दौरान यदि निषाद समाज को आरक्षण नहीं मिलता है तो उन्हें सरकार से अलग होकर समाज के अधिकारों की लड़ाई लड़नी चाहिए।
15 नवंबर तक फैसला नहीं तो राजनीतिक कदम
सहनी ने कहा कि 15 नवंबर तक यदि निषाद आरक्षण को लेकर कोई ठोस फैसला नहीं होता है तो उनकी पार्टी आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक फैसला ले सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में उनकी सक्रियता का मकसद केवल पार्टी का विस्तार करना नहीं है। उनका दावा है कि वे निषाद समाज को उसके अधिकारों के सवाल पर जागरूक करने के लिए उत्तर प्रदेश में काम कर रहे हैं।
वोट के बदले पैसा लें, लेकिन फैसला खुद करें
सहनी ने चुनावी राजनीति पर भी तीखा बयान दिया। उन्होंने लोगों से कहा कि चुनाव के समय यदि कोई पैसा देता है तो उसे लेने से कोई रोक नहीं सकता, लेकिन वोट अपने विवेक से दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि निषाद समाज का वोट किसी नेता के चेहरे या पैसे से तय नहीं होना चाहिए। आरक्षण और बच्चों के भविष्य के सवाल पर जो राजनीतिक दल समाज के साथ खड़ा होगा, उसी के बारे में फैसला किया जाना चाहिए।
भाजपा से समझौते की संभावना से किया इनकार
कार्यक्रम के बाद प्रेस वार्ता में मुकेश सहनी ने कहा कि भाजपा से उनका कोई समझौता नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई भाजपा की नीतियों से है। सहनी ने यह भी कहा कि जो लोग बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान को कमजोर करने की कोशिश करेंगे, वे उनके साथ कभी खड़े नहीं हो सकते। उनके इस बयान से साफ है कि निषाद आरक्षण के मुद्दे को वे आने वाले समय में भाजपा के खिलाफ बड़े राजनीतिक सवाल के तौर पर उठाने की तैयारी में हैं।
छात्र आंदोलन को बताया लोकतांत्रिक अधिकार
प्रेस वार्ता में सहनी ने देश में चल रहे छात्र आंदोलनों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार के खिलाफ आवाज उठाना जनता का अधिकार है। जब छात्रों, युवाओं, गरीबों और किसानों की समस्याओं पर सरकार का ध्यान नहीं जाता है तो लोगों का सड़कों पर उतरना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने कई मौकों पर अपनी ताकत का एहसास सरकारों को कराया है।
बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत पर बोले सहनी
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम पर भी मुकेश सहनी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रशांत किशोर को जीत की बधाई देते हुए कहा कि यह सीट लंबे समय से भाजपा की मजबूत सीट मानी जाती रही है। ऐसे में वहां मिली हार के कारणों पर भाजपा को गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिए। सहनी ने कहा कि प्रशांत किशोर की अपनी पहचान और राजनीतिक क्षमता है और जनता ने उन्हें मौका दिया है। हालिया चुनाव परिणामों में प्रशांत किशोर ने बांकीपुर सीट पर भाजपा उम्मीदवार को करीब 19 हजार मतों के अंतर से हराया है।
मुकेश सहनी ने अपने समर्थकों से कहा कि निषाद समाज को अब किसी भी नेता का आंख बंद करके साथ नहीं देना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर भविष्य में वे खुद भाजपा के पक्ष में वोट देने की अपील करें, तब भी समाज को केवल उनकी बात पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, जब तक निषाद समाज को आरक्षण नहीं मिलता, तब तक अधिकार की लड़ाई जारी रहनी चाहिए।
2027 के चुनाव से पहले आरक्षण बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी
मुकेश सहनी पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश में निषाद आरक्षण को लेकर लगातार अभियान चला रहे हैं। जून में उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आरक्षण नहीं मिलने पर राजनीतिक रास्ता अलग करने की चेतावनी दी थी। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा के जरिए समाज के लोगों को गंगाजल हाथ में लेकर संकल्प दिलाने की बात भी सामने आई थी।
भाजपा और निषाद पार्टी के सामने बढ़ सकती है चुनौती
सहनी की रणनीति का सबसे अहम हिस्सा यह है कि वह निषाद आरक्षण को केवल सामाजिक मांग नहीं, बल्कि चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव सामने है और ऐसे में निषाद समाज के बीच लगातार अभियान चलाकर वे भाजपा और निषाद पार्टी दोनों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि आरक्षण की मांग पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है और मुकेश सहनी के इस अभियान का जमीनी असर कितना दिखाई देता है।
सहनी ने साफ कर दिया अपना सियासी संदेश
लखीमपुर खीरी से मुकेश सहनी ने फिलहाल अपना राजनीतिक संदेश साफ कर दिया है— निषाद आरक्षण मिला तो समर्थन पर विचार, नहीं मिला तो वोट का फैसला अलग। गंगाजल के जरिए दिलाया गया संकल्प और गांव-गांव अभियान की घोषणा इस बात का संकेत है कि 2027 के चुनाव से पहले निषाद आरक्षण को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी है। अब यह लड़ाई केवल बयानबाजी तक रहती है या आने वाले महीनों में इसका असर चुनावी समीकरणों पर भी दिखाई देता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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