By Malay Ojha | Published: 09 August 2026 at 04:14 PM
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई कभी भी शिक्षक का विकल्प नहीं बन सकती। इसका इस्तेमाल शिक्षकों की मदद करने, बच्चों की सीखने की जरूरतों को समझने और बेहतर फैसले लेने में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज एआई कुछ ही क्षणों में किसी सवाल का जवाब दे सकती है, लेकिन असली चुनौती यह है कि बच्चे केवल जवाब याद करने वाले न बनें, बल्कि सही सवाल पूछना भी सीखें।
राजधानी स्थित अधिवेशन भवन में रविवार से शुरू हुई राज्यस्तरीय कार्यशाला सह चिंतन शिविर के उद्घाटन समारोह में शिक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल बच्चों और शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने के लिए होना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि तकनीक शिक्षा व्यवस्था की मददगार हो सकती है, लेकिन शिक्षक की भूमिका को खत्म नहीं कर सकती।
जवाब से ज्यादा जरूरी है सवाल पूछना
शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चों को तकनीक का इस्तेमाल करना आना चाहिए, लेकिन उन्हें तकनीक का गुलाम नहीं बनना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य केवल किसी सवाल का उत्तर हासिल करना नहीं है। बच्चों में सोचने, समझने, सवाल करने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना भी उतना ही जरूरी है।
ज्ञान के साथ नैतिकता और मानवता भी जरूरी
मिथिलेश तिवारी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा राज्य सरकार का अंतिम लक्ष्य है। शिक्षा में ज्ञान के साथ तकनीक, तकनीक के साथ नैतिकता, बुद्धिमत्ता के साथ मानवता और उपलब्धि के साथ जिम्मेदारी का संतुलन होना जरूरी है। उनका कहना था कि आधुनिक तकनीक तभी वास्तव में उपयोगी साबित होगी, जब उसका इस्तेमाल बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए किया जाए।
अपनी भाषा में मिलेगी डिजिटल पढ़ाई
शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ई-विद्या के तहत पहली से बारहवीं कक्षा तक की पाठ्यपुस्तकों पर आधारित पढ़ाई की सामग्री और वीडियो तैयार किए गए हैं। स्थानीय भाषाओं में भी शैक्षणिक सामग्री तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि बच्चों को अपनी भाषा में पढ़ने और समझने का बेहतर अवसर मिल सके।
विद्यालयों में कार्यपुस्तिका और जांच पर जोर
उन्होंने विद्यालयों में कार्यपुस्तिका, इकाई परीक्षा और शिक्षक डायरी के प्रभावी इस्तेमाल को सुनिश्चित करने की जरूरत बताई। शिक्षा मंत्री के अनुसार इन व्यवस्थाओं के सही इस्तेमाल से बच्चों की पढ़ाई की स्थिति समझने में मदद मिलेगी और शिक्षक भी अपनी शिक्षण पद्धति में जरूरी बदलाव कर सकेंगे।
शिक्षकों के तबादले की नई व्यवस्था
शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर शिक्षा मंत्री ने कहा कि पारदर्शी और चरणबद्ध व्यवस्था लागू की गई है। इसका उद्देश्य केवल शिक्षकों को सुविधा देना नहीं, बल्कि विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यालय में शिक्षकों की कमी सीधे तौर पर बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित करती है, इसलिए इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
551 मॉडल स्कूल शुरू, 142 और मिलेंगे
मिथिलेश तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में 551 सरस्वती विद्या निकेतन के रूप में मॉडल स्कूलों की शुरुआत की गई है। आगे 142 और मॉडल स्कूल मिलने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों को लेकर लोगों की उम्मीदें काफी ज्यादा हैं। ऐसे में केवल भवन और सुविधाएं पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता और विद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान देना होगा।
दो दिन के मंथन से निकलेगा आगे का रास्ता
शिक्षा मंत्री ने कार्यशाला में मुख्यमंत्री के शामिल होने के लिए आभार जताया। उन्होंने अधिकारियों और अन्य प्रतिभागियों से कहा कि दो दिन के मंथन के बाद जो उपयोगी विचार सामने आएं, उन्हें केवल चर्चा तक सीमित न रखा जाए। उन्हें विद्यालयों तक पहुंचाकर विद्यार्थियों और शिक्षकों के हित में लागू किया जाए।
दो करोड़ बच्चों और छह लाख शिक्षकों की जिम्मेदारी
उन्होंने कहा कि राज्य के करीब दो करोड़ विद्यार्थियों को सही दिशा देना और छह लाख शिक्षकों की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संभालना शिक्षा विभाग से जुड़े सभी लोगों की बड़ी जिम्मेदारी है। चिंतन शिविर में निकले विचारों को जमीन पर उतारना ही इस आयोजन की वास्तविक सफलता होगी।
उपस्थिति पर अब तकनीक से नजर
विद्यालयों में शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति की निगरानी के लिए एकीकृत सॉफ्टवेयर और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को मजबूत किए जाने की जानकारी भी शिक्षा मंत्री ने दी। उन्होंने कहा कि इससे विद्यालयों की स्थिति पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी। शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की समस्याओं के समाधान के लिए शिकायत निवारण व्यवस्था को भी और प्रभावी बनाया जा रहा है।
शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार पर सख्त संदेश
मिथिलेश तिवारी ने अधिकारियों से भ्रष्टाचार से पूरी तरह दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग को केवल सरकारी योजनाओं को लागू करने वाला विभाग नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कार का केंद्र बनाना होगा। बिहार की नालंदा और विक्रमशिला जैसी गौरवशाली परंपराओं से प्रेरणा लेकर राज्य को फिर से देश-दुनिया में ज्ञान के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम करना होगा।
‘चिंतन से परिवर्तन’ का दिया मंत्र
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग को ‘चिंतन से परिवर्तन और संकल्प से सिद्धि’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नीतियां तभी सफल मानी जाएंगी, जब उनका असर विद्यालयों और बच्चों की पढ़ाई में दिखाई दे। कागज पर बनाई गई योजनाओं के बजाय उनका जमीन पर प्रभाव ही शिक्षा व्यवस्था की असली कसौटी है।
दीप प्रज्वलन से शुरू हुआ कार्यक्रम
कार्यशाला की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान की प्रस्तुति के साथ हुई। मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और अन्य पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस दौरान बिहार शिक्षा परियोजना की ओर से 50 विद्यालयों में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा स्थापित प्रयोगशालाओं का ऑनलाइन लोकार्पण भी किया गया।
शिक्षा मंत्री की किताब का भी विमोचन
उद्घाटन समारोह के दौरान दो पुस्तकों का विमोचन किया गया। इनमें ‘वन्दे मातरम् : स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा और भारत माता की अमर पुकार’ भी शामिल है। इस पुस्तक के लेखक शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी हैं और इसका प्रकाशन प्रभात प्रकाशन ने किया है। कार्यक्रम का समापन बिहार गीत की प्रस्तुति के साथ हुआ।
322 अधिकारी और प्रधानाचार्य हुए शामिल
राज्यस्तरीय कार्यशाला सह चिंतन शिविर में बिहार शिक्षा सेवा के प्रशासन उप संवर्ग और शोध एवं प्रशिक्षण उप संवर्ग के अधिकारियों के साथ जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्रधानाचार्य समेत कुल 322 प्रतिभागी शामिल हुए। दो दिन तक चलने वाली इस कार्यशाला का समापन सोमवार शाम होगा। माना जा रहा है कि शिविर में शिक्षा व्यवस्था, तकनीक के इस्तेमाल, शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने और विद्यार्थियों की पढ़ाई को बेहतर बनाने से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा के बाद आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
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