By Malay Ojha | Published: 19 August 2026 at 04:25 PM
राष्ट्रीय जनता दल के राजभवन मार्च को लेकर जनता दल यूनाइटेड ने हमला बोला है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शंभूनाथ सिन्हा ने दावा किया कि लालू प्रसाद यादव की अपील के बावजूद छात्रों और युवाओं ने इस मार्च से दूरी बनाए रखी। उन्होंने कहा कि जिस कार्यक्रम को छात्र-युवा आंदोलन का रूप देने की कोशिश की गई, उसमें बड़ी संख्या में राजद के नेता और कार्यकर्ता ही नजर आए। जदयू प्रवक्ता ने इसे राजद की राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश बताया और कहा कि बिहार की जनता अब केवल नारों और नारों के साथ उठाए गए मुद्दों से प्रभावित नहीं होती।
शंभूनाथ सिन्हा ने कहा कि राजद नेतृत्व को उम्मीद थी कि तिरंगे के साथ मार्च निकालने से उसे व्यापक जनसमर्थन मिलता हुआ दिखाई देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनके मुताबिक, कार्यक्रम में युवाओं और छात्रों की वैसी भागीदारी नहीं दिखी, जैसी राजद की ओर से दावा किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग राजनीतिक दलों के नेताओं और उनके पुराने कामकाज को भी देखते हैं।
तेजस्वी पर साधा निशाना
जदयू प्रवक्ता ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि आज राजद युवाओं और छात्रों के हितों की बात कर रहा है, लेकिन उसे अपने परिवार के राजनीतिक इतिहास का भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के शासन के दौरान बिहार के युवाओं को कितनी सरकारी नौकरियां और रोजगार मिले थे।
1990 से 2005 के आंकड़ों का किया जिक्र
सिन्हा ने दावा किया कि वर्ष 1990 से 2005 के बीच बिहार लोक सेवा आयोग के जरिए अलग-अलग विभागों में 19 हजार 538 नियुक्तियां हुई थीं, जबकि 33 हजार 199 शिक्षकों का नियोजन किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय नौकरी देने की प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठते रहे और नियुक्तियों में पारदर्शिता नहीं थी। जदयू प्रवक्ता ने इसी मुद्दे को राजद की मौजूदा युवा राजनीति से जोड़ते हुए तेजस्वी यादव से जवाब मांगने की बात कही।
नीतीश सरकार के कामकाज से की तुलना
शंभूनाथ सिन्हा ने कहा कि नीतीश कुमार के शासनकाल में युवाओं को रोजगार देने पर जोर दिया गया। उन्होंने सात निश्चय-2 के तहत 12 लाख सरकारी नौकरियां और 38 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार दिए जाने का दावा किया। उनके मुताबिक, सरकार के इन आंकड़ों से यह पता चलता है कि युवाओं के रोजगार को लेकर सरकार ने किस तरह काम किया है।
तिरंगे को लेकर भी राजद पर हमला
जदयू प्रवक्ता ने राजद के मार्च में तिरंगे के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तिरंगा किसी राजनीतिक दल की छवि सुधारने का जरिया नहीं है। यह देश के सम्मान और पहचान का प्रतीक है। सिन्हा ने कहा कि किसी राजनीतिक कार्यक्रम में तिरंगे को आगे रखकर जनता का ध्यान दूसरे मुद्दों से हटाने की कोशिश ज्यादा समय तक नहीं चल सकती।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी घेरा
शंभूनाथ सिन्हा ने राजद के शीर्ष नेताओं पर भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं और राजनीतिक परिवारों पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं, उन्हें नैतिकता और पारदर्शिता की बात करने से पहले अपने राजनीतिक आचरण पर भी सवाल करना चाहिए। उन्होंने तेजस्वी यादव से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और ऐसे में राजद को दूसरों पर सवाल उठाने से पहले अपने ऊपर उठ रहे सवालों का जवाब देना चाहिए।
राजद के लिए बढ़ी राजनीतिक चुनौती?
जदयू के इस हमले को राजद के युवा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर उठाए जा रहे अभियान के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। राजद जहां युवाओं, छात्रों, रोजगार और सरकारी नौकरियों के मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन के नेता उसके पुराने शासनकाल के रिकॉर्ड को सामने रखकर पलटवार कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में रोजगार और युवाओं का मुद्दा बिहार की राजनीति में और ज्यादा गर्म होने की संभावना है।
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