By Malay Ojha | Published: 21 August 2026 at 03:52 PM
बिहार में शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवालों को लेकर छात्र-युवा आंदोलन को तेज करने की तैयारी शुरू हो गई है। Gen Z Rising–बिहार चैप्टर के तहत शुक्रवार को पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने 6 सितंबर को एसके मेमोरियल हॉल में बड़े छात्र-युवा जुटान और छात्र-युवा संसद की घोषणा की। संगठन का कहना है कि इसमें शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा में गड़बड़ी, फीस बढ़ोतरी, बेरोजगारी और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता जैसे मुद्दों पर छात्र अपनी आवाज खुद उठाएंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में एआईएसए के अखिल भारतीय महासचिव प्रसेनजीत, इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा, एआईएसए बिहार के राज्य अध्यक्ष धनंजय, जेएनयू छात्रसंघ के संयुक्त सचिव दानिश और एआईएसए बिहार की उपाध्यक्ष सबा आफरीन ने संगठन की आगे की रणनीति रखी। नेताओं ने कहा कि अलग-अलग विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों से सामने आ रही समस्याओं को अब एक साझा मंच पर लाया जाएगा।
स्कूलों से विश्वविद्यालयों तक सवाल ही सवाल
एआईएसए बिहार के राज्य अध्यक्ष धनंजय ने कहा कि संगठन की टीम बिहार के अलग-अलग हिस्सों में जाकर छात्रों और युवाओं से सीधे बातचीत कर रही है। उनके मुताबिक इस दौरान सरकारी स्कूलों में कमरों की कमी, कंप्यूटर और प्रयोगशालाओं की अनुपलब्धता, शिक्षकों की कमी और मध्याह्न भोजन से जुड़ी शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने दावा किया कि कई संस्थानों में बुनियादी सुविधाएं तक पर्याप्त नहीं हैं।
दरभंगा के स्कूल का उदाहरण देकर उठाया सवाल
जेएनयू छात्रसंघ के संयुक्त सचिव दानिश ने कहा कि सिवान, आरा, बेतिया, छपरा और दरभंगा समेत कई जिलों में छात्रों से बातचीत के दौरान शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल सामने आए। उन्होंने सत्र में देरी, समय पर डिग्री नहीं मिलने, फीस बढ़ने, परीक्षा में गड़बड़ी और कथित घूसखोरी जैसे मुद्दों का जिक्र किया। उन्होंने दरभंगा के एक स्कूल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पहली से बारहवीं तक की पढ़ाई के लिए केवल चार कमरे उपलब्ध होने की बात सामने आई।
परीक्षा और रोजगार पर भी सरकार को घेरा
इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा ने कहा कि स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सरकार पर छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि परीक्षाएं समय पर नहीं होने और रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने का सीधा असर युवाओं पर पड़ रहा है। उनके मुताबिक बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करने को मजबूर हैं।
चार कमरों में कॉलेज चलाने पर सवाल
अजीत कुशवाहा ने कहा कि अगर किसी डिग्री कॉलेज में पर्याप्त कमरे, पुस्तकालय और प्रयोगशाला जैसी सुविधाएं नहीं हैं तो ऐसे संस्थानों से युवाओं को बेहतर शिक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने गर्दनीबाग में आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि छात्रों और युवाओं के बीच बढ़ता असंतोष आने वाले समय में बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
फीस बढ़ोतरी से निजीकरण तक उठेंगे मुद्दे
एआईएसए के अखिल भारतीय महासचिव प्रसेनजीत ने कहा कि Gen Z Rising अभियान के जरिए बिहार के छात्र अपने विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों की समस्याओं को खुद सामने रखेंगे। उन्होंने फीस बढ़ोतरी, शिक्षा के निजीकरण, परीक्षा व्यवस्था और रोजगार को अभियान के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नए शिक्षा कानूनों को लेकर भी संगठन की आपत्तियां सामने रखीं।
‘सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे से नहीं बदलेगी व्यवस्था’
दानिश ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में शिक्षा और रोजगार को लेकर छात्रों का आंदोलन चल रहा है। उन्होंने कहा कि केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करने से पूरी शिक्षा व्यवस्था नहीं बदलेगी, बल्कि परीक्षा और उच्च शिक्षा की पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय करनी होगी। एआईएसए का राष्ट्रीय Gen Z Rising अभियान पहले ही कई राज्यों में छात्रों और युवाओं के बीच संवाद कार्यक्रमों के जरिए आगे बढ़ रहा है। ([Awaz The Voice][1])
‘छात्र अपनी संसद में खुद उठाएंगे सवाल’
एआईएसए बिहार की उपाध्यक्ष सबा आफरीन ने कहा कि संगठन बिहार के जिलों, विश्वविद्यालयों और स्कूलों तक पहुंचकर छात्रों और युवाओं को जोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों को लेकर युवा अब अपनी बात खुद रखने की तैयारी कर रहे हैं। उनके मुताबिक 6 सितंबर के कार्यक्रम में स्कूलों में कमरों की कमी से लेकर पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता जैसे मुद्दे भी उठाए जाएंगे।
बिहार के हर जिले तक अभियान पहुंचाने की तैयारी
एआईएसए की ओर से पहले भी Gen Z Rising अभियान के तहत बिहार के अलग-अलग विश्वविद्यालयों और जिलों में छात्र-युवा संसद और संवाद कार्यक्रमों की रूपरेखा सामने रखी जा चुकी है। संगठन ने सिवान, आरा, बेतिया, छपरा, दरभंगा, मधेपुरा, भागलपुर, गया, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर और मुंगेर समेत कई जगहों पर कार्यक्रमों की घोषणा की थी।
6 सितंबर के जुटान पर टिकी नजर
पटना में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अब 6 सितंबर के छात्र-युवा जुटान पर नजर रहेगी। एआईएसए इसे बिहार में शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों को लेकर बड़े स्तर पर युवाओं को एक मंच पर लाने की कोशिश के तौर पर देख रहा है। संगठन का दावा है कि स्कूल से विश्वविद्यालय तक छात्रों के सामने मौजूद समस्याओं को सिर्फ ज्ञापन और बयान तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें आंदोलन का मुद्दा बनाया जाएगा।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

