By Malay Ojha | Published: 23 August 2026 at 04:40 PM
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् को वोट बैंक की राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जा सकता। यह देश की आजादी, राष्ट्रभक्ति और स्वतंत्रता आंदोलन में बलिदान देने वाले लोगों की विरासत से जुड़ा गीत है। सरावगी ने कहा कि भाजपा इसके सम्मान और गौरव से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी।
भाजपा की नई टीम की बैठक में शनिवार को वंदे मातरम् के सम्मान और इसकी ऐतिहासिक विरासत की रक्षा से जुड़ा प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में कांग्रेस कार्यसमिति के उस फैसले का विरोध किया गया, जिसमें पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो पदों को गाने की पुरानी व्यवस्था को दोहराया गया है। भाजपा ने इसे लेकर अपना विरोध साफ कर दिया है।
संजय सरावगी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
संजय सरावगी ने कहा कि वंदे मातरम् किसी राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं है। यह देश की राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन की महत्वपूर्ण विरासत है। उनके मुताबिक इसे आज की राजनीतिक गणित और वोट बैंक के हिसाब से देखने की कोशिश उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान इस गीत ने लोगों में देश के लिए कुछ करने और बलिदान देने की भावना पैदा की थी।
कांग्रेस के फैसले पर उठाए सवाल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने 19 अगस्त को कांग्रेस कार्यसमिति की ओर से लिए गए फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पहले दो पदों को गाने की परंपरा जारी रखने का फैसला किया है। पार्टी ने इसे 1937 में लिए गए अपने पुराने निर्णय से जोड़कर देखा है।
‘राजनीतिक दल से बड़ी है राष्ट्रीय विरासत’
सरावगी ने कहा कि वंदे मातरम् को किसी दल के राजनीतिक फैसले तक सीमित करना इसके इतिहास को छोटा करने जैसा है। उन्होंने कहा कि देश का लोकतंत्र संविधान और कानून के आधार पर चलता है। किसी राजनीतिक दल की कार्यसमिति का फैसला राष्ट्रीय भावना से जुड़े विषयों का अंतिम आधार नहीं हो सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को वंदे मातरम् गाने के लिए मजबूर करने की बात अलग है, लेकिन जानबूझकर इसके गायन में बाधा डालना भी उचित नहीं माना जा सकता। सरावगी ने कहा कि संविधान और कानून से ऊपर किसी परिवार, दल या संगठन को नहीं रखा जा सकता।
कांग्रेस मुख्यालय की घटना का भी जिक्र
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् के गायन के दौरान सामने आए विवाद का भी उल्लेख किया। उस कार्यक्रम से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस नेताओं के व्यवहार पर सवाल उठाए थे। भाजपा की ओर से आरोप लगाया गया कि वंदे मातरम् के दौरान गीत को रोकने की कोशिश की गई। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस आरोप को खारिज करते हुए अलग स्पष्टीकरण दिया गया था। इसलिए इस घटना को आरोप के तौर पर ही देखना उचित है।
विवाद के बाद कांग्रेस ने साफ किया रुख
वंदे मातरम् को लेकर विवाद 15 अगस्त के कार्यक्रम के बाद और तेज हुआ। इसके बाद 19 अगस्त को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी ने अपने कार्यक्रमों में शुरुआती दो पदों को ही गाने की परंपरा जारी रखने का फैसला किया। इस निर्णय के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रगीत की ऐतिहासिक विरासत को सीमित करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
आजादी के आंदोलन से जुड़ी है इसकी कहानी
संजय सरावगी ने कहा कि वंदे मातरम् का इतिहास सिर्फ एक गीत तक सीमित नहीं है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में यह देशवासियों के बीच राष्ट्रीय भावना जगाने वाले प्रमुख प्रतीकों में शामिल रहा। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने इसे देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना के साथ अपनाया।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी समेत स्वतंत्रता आंदोलन के कई नेताओं ने वंदे मातरम् से जुड़ी राष्ट्रीय भावना को स्वीकार किया था। इसलिए इसे किसी एक धर्म या समुदाय के साथ जोड़कर देखना उचित नहीं है। उनके मुताबिक वंदे मातरम् को लेकर बहस इतिहास और राष्ट्रीय भावना के संदर्भ में होनी चाहिए, न कि केवल राजनीतिक फायदे-नुकसान के आधार पर।
गांव-गांव तक पहुंचाएगी भाजपा
संजय सरावगी ने कहा कि भाजपा वंदे मातरम् के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका को आम लोगों तक पहुंचाएगी। पार्टी की कोशिश होगी कि खासकर युवा पीढ़ी को बताया जाए कि आजादी की लड़ाई में इस गीत की क्या भूमिका रही और किस तरह यह राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा बना।
उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता गांवों, कस्बों और शहरों में लोगों के बीच जाकर वंदे मातरम् से जुड़े इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन की घटनाओं की जानकारी साझा करेंगे। भाजपा का कहना है कि आने वाली पीढ़ी को केवल गीत के शब्द नहीं, बल्कि उसके पीछे जुड़ी ऐतिहासिक भावना और बलिदान की कहानी भी जाननी चाहिए।
‘तुष्टीकरण की राजनीति छोड़ने’ की अपील
प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस से अपील की कि वह राष्ट्रीय एकता से जुड़े विषयों को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय सकारात्मक भूमिका निभाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति में तुष्टीकरण और वोट बैंक का असर दिखाई देता है और इसी वजह से वंदे मातरम् जैसे विषयों पर विवाद खड़ा हो रहा है।
संजय सरावगी ने कहा कि देश की एकता और अखंडता के सवाल पर भाजपा किसी तरह का समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् करोड़ों भारतीयों के लिए मातृभूमि के प्रति सम्मान, स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष और देश के लिए बलिदान की भावना का प्रतीक है।
भाजपा ने देशभर में पहुंचाने का बनाया मन
वंदे मातरम् को लेकर भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम की बैठक में पारित प्रस्ताव के बाद पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को देशभर में उठाया जाएगा। पार्टी ने पूर्ण वंदे मातरम् के सम्मान, गरिमा और ऐतिहासिक विरासत की रक्षा का संकल्प लिया है।
संजय सरावगी के बयान से भी साफ है कि पार्टी इस मुद्दे को केवल दिल्ली की राजनीतिक बहस तक सीमित रखने के मूड में नहीं है। भाजपा इसे राष्ट्रीय भावना और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। ऐसे में वंदे मातरम् को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।
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