By Malay Ojha | Published: 22 August 2026 at 10:04 PM
बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विधायक दीपा मांझी ने लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य पर बिना नाम लिए तीखा हमला बोला है। उन्होंने विदेश में रहकर सोशल मीडिया पर महंगाई और बिहार की जनता से जुड़े मुद्दों पर टिप्पणी करने को लेकर सवाल उठाए। दीपा मांझी ने तंज कसते हुए कहा कि **विदेश से बैठकर रोज ट्वीट करने से कोई स्वतंत्रता सेनानी नहीं बन जाता और महंगाई पर ट्वीट करने से गरीबों का दर्द समझ में नहीं आता।
दीपा मांझी ने अपने बयान में रोहिणी आचार्य का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके विदेश में रहने और चुनाव के दौरान बिहार आने को लेकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि एक ‘विदेशिया मैडम’ रोज ट्वीट कर खुद को बड़ी स्वतंत्रता सेनानी समझती रहती हैं। उनके मुताबिक चुनाव के समय हवाई जहाज से आने और चुनाव के बाद वापस विदेश लौट जाने के बाद विदेश से बैठकर बिहार के मुद्दों पर टिप्पणी करना आसान है।
महंगाई के मुद्दे पर भी घेरा
दीपा मांझी ने महंगाई को लेकर रोहिणी आचार्य की टिप्पणियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने अपने बयान में खाने-पीने की कई चीजों का जिक्र करते हुए कहा कि जब फसल चक्र के हिसाब से खाद्यान्न के दाम बढ़ते हैं, उसी समय उन्हें उन्हीं चीजों की तलब होने लगती है। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष की राजनीति पर सवाल खड़ा करने की कोशिश की।
‘अपने पापा-मम्मी से पूछिए’ कहकर परिवार पर हमला
विधायक ने अपने बयान को लालू यादव और राबड़ी देवी के दौर से जोड़ते हुए भी कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अपने माता-पिता से पूछना चाहिए कि उनके समय में होली, दिवाली और दशहरा के दौरान कर्मचारियों को वेतन मिलता था या नहीं। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में नौकरीपेशा लोगों से लेकर किसान और मजदूर तक त्योहार मनाने के लिए आर्थिक परेशानियों का सामना करते थे।
पुराने दौर की आर्थिक मुश्किलों का किया जिक्र
दीपा मांझी ने कहा कि उस समय शिक्षक और कर्मचारी तक किराना दुकानदारों से सामान उधार मांगने को मजबूर होते थे। उन्होंने कपड़ों की दुकानों पर भी उधार सामान लेने की मजबूरी का जिक्र किया। इसके बाद उन्होंने लालू परिवार की जीवनशैली पर तंज कसते हुए कई बड़े शहरों का नाम लिया और परिवार पर ऐशोआराम की राजनीति करने का आरोप लगाया।
शादी-ब्याह को लेकर भी साधा निशाना
दीपा मांझी ने अपने बयान में शादी-ब्याह के आयोजनों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि शोरूम से गाड़ी और फर्नीचर लेना, बाहर से नाच-पाटी बुलाना और फूलों से भरे ट्रक मंगाना जैसे इंतजाम उस परिवार के लिए सामान्य रहे हैं। हालांकि, ये सभी बातें दीपा मांझी के राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती।
लालू परिवार पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
विधायक ने अपने बयान में लालू यादव और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार के पुराने राजनीतिक आरोपों को भी उठाया। उन्होंने बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए दावा किया कि जनता को लूटने के बाद अब वही लोग ईमानदारी, गरीबी और महंगाई का पाठ पढ़ा रहे हैं। उन्होंने इसे लेकर विपक्षी नेताओं पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
‘नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज को’
दीपा मांझी ने अपने हमले को धार देने के लिए मशहूर कहावत का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि ‘नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज को’ वाली कहावत यहां बिल्कुल सटीक बैठती है। उनका कहना था कि जनता सब देख और समझ रही है और अब ऐसे राजनीतिक दिखावे को पहचानने लगी है।
बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज
दीपा मांझी के इस बयान को बिहार की सियासत में चल रही लगातार बयानबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है। महंगाई, रोजगार, परिवारवाद और शासन के पुराने रिकॉर्ड जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता लगातार एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। ऐसे में रोहिणी आचार्य पर दीपा मांझी का ताजा हमला राजनीतिक बहस को और गरमा सकता है।
‘ट्वीट करने से गरीबों का दर्द नहीं समझ आता’
अपने बयान के आखिर में दीपा मांझी ने फिर सोशल मीडिया के जरिए होने वाली राजनीति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विदेश से बैठकर लगातार ट्वीट करने से कोई स्वतंत्रता सेनानी नहीं बन जाता। इसी तरह केवल महंगाई पर ट्वीट करने से गरीबों की परेशानियों को समझा नहीं जा सकता। उन्होंने दावा किया कि बिहार की जनता अब ऐसे दिखावे और कथित दोहरे चरित्र को अच्छी तरह पहचानती है।
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