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बिहार में उद्योग लगाना होगा आसान, 30 दिन में मंजूरी नहीं मिली तो अपने आप स्वीकृति; भाजपा ने बताया बड़ा बदलाव

By Malay Ojha | Published: 22 August 2026 at 07:47 PM

बिहार में उद्योग लगाने और निवेश करने वालों के लिए प्रक्रिया आसान बनाने की दिशा में सरकार के कदमों को भाजपा ने बड़ा बदलाव बताया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सुरेश रुँगटा ने कहा कि अब निवेशकों को जमीन, बिजली और दूसरी मंजूरियों के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। उन्होंने कहा कि 30 दिन के भीतर जरूरी मंजूरी नहीं मिलने पर उसे स्वतः स्वीकृत मानने की व्यवस्था निवेशकों के लिए बड़ा बदलाव साबित होगी। जून 2026 में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी उद्योगों से जुड़ी मंजूरियों को 30 दिनों के भीतर देने की बात कह चुके हैं।

सुरेश रुँगटा ने कहा कि सरकार उद्योग लगाने की प्रक्रिया को आसान और समयबद्ध बनाने पर काम कर रही है। उनका कहना है कि अगर किसी विभाग की ओर से तय समय में एनओसी या जरूरी मंजूरी नहीं दी जाती है तो संबंधित मामले में स्वतः मंजूरी की व्यवस्था निवेशकों के लिए राहत देगी। इससे किसी एक अनुमति के लिए लंबे समय तक इंतजार करने की समस्या कम हो सकती है।

जमीन और बिजली की परेशानी भी कम करने की कोशिश
निवेशकों के सामने सबसे बड़ी दिक्कतों में जमीन, बिजली और अलग-अलग विभागों से मिलने वाली मंजूरियां शामिल रहती हैं। भाजपा प्रवक्ता के मुताबिक सरकार इन समस्याओं को एक जगह से सुलझाने की व्यवस्था मजबूत कर रही है। इसके लिए एकल खिड़की व्यवस्था और ऑनलाइन माध्यम का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। बिहार उद्योग विभाग की वेबसाइट पर भी एकल खिड़की मंजूरी पोर्टल उपलब्ध है।

नई औद्योगिक नीति की तैयारी भी चल रही
बिहार सरकार नई औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2026 लाने की तैयारी में है। उद्योग विभाग की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक मौजूदा औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 को 31 दिसंबर 2026 तक या नई नीति लागू होने की तारीख तक बढ़ाया गया है, जो पहले हो। इससे साफ है कि राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए नई नीति की तैयारी पर काम चल रहा है।

छोटे कारोबारियों के लिए भी नई नीति का मसौदा
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि छोटे और सूक्ष्म उद्योगों के लिए भी नई नीति का मसौदा तैयार किया गया है। सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में छोटे उद्योगों का दायरा बढ़ाना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। उद्योग विभाग की वेबसाइट पर भी बिहार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति 2026 के मसौदे पर सुझाव मांगे जाने की जानकारी दी गई है।

पांच साल में उद्योग बढ़ाने का दावा
रुँगटा ने कहा कि छोटे और सूक्ष्म उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बनाई जा रही नीति के जरिए अगले पांच साल में राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बड़े स्तर पर बढ़ाने की योजना है। उनका कहना है कि अगर छोटे कारोबारियों को पूंजी, बाजार, तकनीक और आसान मंजूरी की सुविधा मिलेगी तो बिहार में नए कारोबार शुरू होने के साथ रोजगार भी बढ़ सकता है।

बिहार को पूर्वी भारत का औद्योगिक केंद्र बनाने की बात
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि बिहार को पूर्वी भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाने वाला राज्य बनाने का लक्ष्य अब केवल राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए नियमों को आसान बनाने, निवेशकों की परेशानी दूर करने और उद्योगों को जरूरी सुविधाएं देने पर एक साथ काम किया जा रहा है।

खाद्य प्रसंस्करण में युवाओं को जोड़ने की तैयारी
बिहार की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को देखते हुए खाद्य प्रसंस्करण को भी उद्योग के बड़े क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। रुँगटा ने कहा कि राज्य में पैदा होने वाली फसलों से जुड़े खाद्य प्रसंस्करण कारोबार में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्टार्टअप को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे किसानों को बाजार मिल सकता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं।

सिर्फ बड़े उद्योग नहीं, छोटे कारोबार भी होंगे अहम
बिहार में औद्योगिक विकास की चर्चा आमतौर पर बड़े निवेश और बड़ी कंपनियों के आसपास रहती है। लेकिन छोटे और सूक्ष्म कारोबारों को मजबूत करना भी रोजगार के लिहाज से अहम है। सरकार की योजनाओं में छोटे उद्योगों के लिए अनुदान और दूसरी सहायता का प्रावधान भी जारी है। उद्योग विभाग के मौजूदा आदेशों में बिहार लघु उद्यमी योजना के तहत अलग-अलग वर्गों के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान दर्ज है।

निवेश के साथ रोजगार पर भी नजर
भाजपा का कहना है कि बिहार में उद्योग बढ़ने का सीधा फायदा रोजगार के रूप में मिलना चाहिए। निवेश आने से कारखाने, सेवा क्षेत्र, परिवहन, पैकेजिंग, भंडारण और दूसरे सहायक कारोबार भी बढ़ सकते हैं। इससे स्थानीय युवाओं के लिए अपने ही राज्य में काम के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

नई तकनीक वाले उद्योगों पर भी जोर
बिहार सरकार ने उद्योगों के नए क्षेत्रों पर भी ध्यान देना शुरू किया है। उद्योग विभाग की मौजूदा नीतियों में सेमीकंडक्टर नीति 2026 भी शामिल है। इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण और दूसरे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने की योजनाएं चल रही हैं।

डिजिटल व्यवस्था से कम होगी कागजी प्रक्रिया
सरकार की कोशिश उद्योग लगाने की प्रक्रिया को ऑनलाइन और कम कागजी बनाने की भी है। एकल खिड़की व्यवस्था के जरिए निवेशक अलग-अलग विभागों से जुड़ी मंजूरियों के लिए एक ही मंच का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर यह व्यवस्था जमीन पर सही तरीके से लागू होती है तो उद्योग लगाने में लगने वाला समय कम हो सकता है।

भाजपा ने इसे आर्थिक बदलाव से जोड़ा
सुरेश रुँगटा ने कहा कि बिहार का पुराना गौरव ज्ञान और शिक्षा से जुड़ा रहा है और अब राज्य को उद्योग तथा उद्यमिता के क्षेत्र में आगे ले जाने की जरूरत है। उनका कहना है कि सरकार की नीतियों का मकसद बिहार को मजबूत अर्थव्यवस्था वाला राज्य बनाना और युवाओं के लिए रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा करना है।

विकसित बिहार के लक्ष्य पर जोर
उन्होंने कहा कि बिहार को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने के लिए उद्योग, निवेश और रोजगार तीनों पर एक साथ काम करना होगा। भाजपा प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार भी इस लक्ष्य में अपनी बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

असली चुनौती जमीन पर लागू करने की
सरकार की ओर से नियम आसान बनाने और समय सीमा तय करने की बात भले ही निवेशकों के लिए राहत वाली हो, लेकिन इसकी असली परीक्षा लागू होने के बाद होगी। निवेशकों को समय पर जमीन, बिजली, मंजूरी और दूसरी सुविधाएं मिलती हैं या नहीं, इससे ही यह तय होगा कि नई व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है।

अब निवेश और रोजगार के आंकड़ों पर नजर
बिहार में उद्योग बढ़ाने की दिशा में कई नीतिगत कदम उठाए जा रहे हैं। नई औद्योगिक नीति, छोटे उद्योगों के लिए प्रस्तावित नीति और 30 दिन में मंजूरी की व्यवस्था को इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। अब आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इन बदलावों से राज्य में कितना नया निवेश आता है और कितने रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।

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बिहार में उद्योग लगाना होगा आसान, 30 दिन में मंजूरी नहीं मिली तो अपने आप स्वीकृति; भाजपा ने बताया बड़ा बदलाव

By Malay Ojha | Published: 22 August 2026 at 07:47 PM

बिहार में उद्योग लगाने और निवेश करने वालों के लिए प्रक्रिया आसान बनाने की दिशा में सरकार के कदमों को भाजपा ने बड़ा बदलाव बताया है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सुरेश रुँगटा ने कहा कि अब निवेशकों को जमीन, बिजली और दूसरी मंजूरियों के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। उन्होंने कहा कि 30 दिन के भीतर जरूरी मंजूरी नहीं मिलने पर उसे स्वतः स्वीकृत मानने की व्यवस्था निवेशकों के लिए बड़ा बदलाव साबित होगी। जून 2026 में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी उद्योगों से जुड़ी मंजूरियों को 30 दिनों के भीतर देने की बात कह चुके हैं।

सुरेश रुँगटा ने कहा कि सरकार उद्योग लगाने की प्रक्रिया को आसान और समयबद्ध बनाने पर काम कर रही है। उनका कहना है कि अगर किसी विभाग की ओर से तय समय में एनओसी या जरूरी मंजूरी नहीं दी जाती है तो संबंधित मामले में स्वतः मंजूरी की व्यवस्था निवेशकों के लिए राहत देगी। इससे किसी एक अनुमति के लिए लंबे समय तक इंतजार करने की समस्या कम हो सकती है।

जमीन और बिजली की परेशानी भी कम करने की कोशिश
निवेशकों के सामने सबसे बड़ी दिक्कतों में जमीन, बिजली और अलग-अलग विभागों से मिलने वाली मंजूरियां शामिल रहती हैं। भाजपा प्रवक्ता के मुताबिक सरकार इन समस्याओं को एक जगह से सुलझाने की व्यवस्था मजबूत कर रही है। इसके लिए एकल खिड़की व्यवस्था और ऑनलाइन माध्यम का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। बिहार उद्योग विभाग की वेबसाइट पर भी एकल खिड़की मंजूरी पोर्टल उपलब्ध है।

नई औद्योगिक नीति की तैयारी भी चल रही
बिहार सरकार नई औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2026 लाने की तैयारी में है। उद्योग विभाग की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक मौजूदा औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 को 31 दिसंबर 2026 तक या नई नीति लागू होने की तारीख तक बढ़ाया गया है, जो पहले हो। इससे साफ है कि राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए नई नीति की तैयारी पर काम चल रहा है।

छोटे कारोबारियों के लिए भी नई नीति का मसौदा
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि छोटे और सूक्ष्म उद्योगों के लिए भी नई नीति का मसौदा तैयार किया गया है। सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में छोटे उद्योगों का दायरा बढ़ाना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। उद्योग विभाग की वेबसाइट पर भी बिहार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम नीति 2026 के मसौदे पर सुझाव मांगे जाने की जानकारी दी गई है।

पांच साल में उद्योग बढ़ाने का दावा
रुँगटा ने कहा कि छोटे और सूक्ष्म उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बनाई जा रही नीति के जरिए अगले पांच साल में राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बड़े स्तर पर बढ़ाने की योजना है। उनका कहना है कि अगर छोटे कारोबारियों को पूंजी, बाजार, तकनीक और आसान मंजूरी की सुविधा मिलेगी तो बिहार में नए कारोबार शुरू होने के साथ रोजगार भी बढ़ सकता है।

बिहार को पूर्वी भारत का औद्योगिक केंद्र बनाने की बात
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि बिहार को पूर्वी भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाने वाला राज्य बनाने का लक्ष्य अब केवल राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके लिए नियमों को आसान बनाने, निवेशकों की परेशानी दूर करने और उद्योगों को जरूरी सुविधाएं देने पर एक साथ काम किया जा रहा है।

खाद्य प्रसंस्करण में युवाओं को जोड़ने की तैयारी
बिहार की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को देखते हुए खाद्य प्रसंस्करण को भी उद्योग के बड़े क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। रुँगटा ने कहा कि राज्य में पैदा होने वाली फसलों से जुड़े खाद्य प्रसंस्करण कारोबार में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्टार्टअप को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे किसानों को बाजार मिल सकता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं।

सिर्फ बड़े उद्योग नहीं, छोटे कारोबार भी होंगे अहम
बिहार में औद्योगिक विकास की चर्चा आमतौर पर बड़े निवेश और बड़ी कंपनियों के आसपास रहती है। लेकिन छोटे और सूक्ष्म कारोबारों को मजबूत करना भी रोजगार के लिहाज से अहम है। सरकार की योजनाओं में छोटे उद्योगों के लिए अनुदान और दूसरी सहायता का प्रावधान भी जारी है। उद्योग विभाग के मौजूदा आदेशों में बिहार लघु उद्यमी योजना के तहत अलग-अलग वर्गों के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान दर्ज है।

निवेश के साथ रोजगार पर भी नजर
भाजपा का कहना है कि बिहार में उद्योग बढ़ने का सीधा फायदा रोजगार के रूप में मिलना चाहिए। निवेश आने से कारखाने, सेवा क्षेत्र, परिवहन, पैकेजिंग, भंडारण और दूसरे सहायक कारोबार भी बढ़ सकते हैं। इससे स्थानीय युवाओं के लिए अपने ही राज्य में काम के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

नई तकनीक वाले उद्योगों पर भी जोर
बिहार सरकार ने उद्योगों के नए क्षेत्रों पर भी ध्यान देना शुरू किया है। उद्योग विभाग की मौजूदा नीतियों में सेमीकंडक्टर नीति 2026 भी शामिल है। इसके अलावा खाद्य प्रसंस्करण और दूसरे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने की योजनाएं चल रही हैं।

डिजिटल व्यवस्था से कम होगी कागजी प्रक्रिया
सरकार की कोशिश उद्योग लगाने की प्रक्रिया को ऑनलाइन और कम कागजी बनाने की भी है। एकल खिड़की व्यवस्था के जरिए निवेशक अलग-अलग विभागों से जुड़ी मंजूरियों के लिए एक ही मंच का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर यह व्यवस्था जमीन पर सही तरीके से लागू होती है तो उद्योग लगाने में लगने वाला समय कम हो सकता है।

भाजपा ने इसे आर्थिक बदलाव से जोड़ा
सुरेश रुँगटा ने कहा कि बिहार का पुराना गौरव ज्ञान और शिक्षा से जुड़ा रहा है और अब राज्य को उद्योग तथा उद्यमिता के क्षेत्र में आगे ले जाने की जरूरत है। उनका कहना है कि सरकार की नीतियों का मकसद बिहार को मजबूत अर्थव्यवस्था वाला राज्य बनाना और युवाओं के लिए रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा करना है।

विकसित बिहार के लक्ष्य पर जोर
उन्होंने कहा कि बिहार को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने के लिए उद्योग, निवेश और रोजगार तीनों पर एक साथ काम करना होगा। भाजपा प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार भी इस लक्ष्य में अपनी बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

असली चुनौती जमीन पर लागू करने की
सरकार की ओर से नियम आसान बनाने और समय सीमा तय करने की बात भले ही निवेशकों के लिए राहत वाली हो, लेकिन इसकी असली परीक्षा लागू होने के बाद होगी। निवेशकों को समय पर जमीन, बिजली, मंजूरी और दूसरी सुविधाएं मिलती हैं या नहीं, इससे ही यह तय होगा कि नई व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है।

अब निवेश और रोजगार के आंकड़ों पर नजर
बिहार में उद्योग बढ़ाने की दिशा में कई नीतिगत कदम उठाए जा रहे हैं। नई औद्योगिक नीति, छोटे उद्योगों के लिए प्रस्तावित नीति और 30 दिन में मंजूरी की व्यवस्था को इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। अब आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इन बदलावों से राज्य में कितना नया निवेश आता है और कितने रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।

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