By Malay Ojha | Published: 25 August 2026 at 11:04 AM
बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने महिलाओं के सम्मान और बराबरी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी वास्तव में महिलाओं के सम्मान और पुरुष वर्चस्व के खिलाफ गंभीर हैं तो इसकी शुरुआत अपनी पार्टी से करनी चाहिए। संतोष सुमन ने सवाल उठाया कि कांग्रेस की कमान प्रियंका गांधी को सौंपकर क्या राहुल गांधी ऐसा उदाहरण पेश करेंगे?
संतोष कुमार सुमन ने सोशल मीडिया पर लिखे अपने पोस्ट में कहा कि महिलाओं के सम्मान, बराबरी और अधिकारों की बात केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों के लिए जरूरी है कि वे अपने संगठन और नेतृत्व में भी महिलाओं को वास्तविक जिम्मेदारी दें। उन्होंने राहुल गांधी के सामने कांग्रेस के भीतर महिला नेतृत्व को लेकर सवाल खड़ा किया।
प्रियंका गांधी को कमान सौंपने की चुनौती
बिहार के मंत्री ने सीधे राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि यदि कांग्रेस महिलाओं को बराबरी देने की बात करती है तो प्रियंका गांधी को पार्टी की वास्तविक कमान सौंपकर उदाहरण पेश किया जा सकता है। उनके मुताबिक ऐसा कदम यह दिखाएगा कि महिला सशक्तीकरण केवल मंच से कही जाने वाली बात नहीं, बल्कि राजनीतिक आचरण का भी हिस्सा है। फिलहाल प्रियंका गांधी कांग्रेस की महासचिव और लोकसभा सांसद हैं तथा हाल के दिनों में उन्होंने बिहार और उत्तर प्रदेश में महिला संवाद जैसे कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है।
तेजस्वी यादव से भी पूछा सवाल
संतोष सुमन ने अपने बयान में राष्ट्रीय जनता दल और तेजस्वी यादव को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि यदि तेजस्वी यादव सामाजिक न्याय और बराबरी की बात करते हैं तो क्या वह अपनी बहन मीसा भारती को पार्टी की कमान सौंपने का साहस दिखाएंगे? इसी तरह उन्होंने दक्षिण और उत्तर भारत के कुछ प्रमुख विपक्षी नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात तभी ज्यादा भरोसेमंद लगेगी, जब राजनीतिक संगठनों में उन्हें वास्तविक अधिकार और जिम्मेदारी भी दी जाए।
मनुस्मृति को लेकर भी राहुल पर हमला
संतोष सुमन का यह बयान राहुल गांधी के हालिया महिला अधिकार संबंधी वक्तव्य के बाद आया है। राहुल गांधी ने पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की स्वतंत्रता और उनकी अपनी पहचान की बात की थी। उन्होंने मनुस्मृति में महिलाओं की स्थिति से जुड़े कथित प्रावधानों को शर्मनाक बताते हुए कहा था कि महिला की पहचान केवल पिता, पति या बेटे से नहीं होनी चाहिए।
‘पहले अपने राजनीतिक आचरण को देखिए’
इसी मुद्दे को लेकर संतोष सुमन ने राहुल गांधी से कहा कि मनुस्मृति के खिलाफ बोलने से पहले राजनीतिक दलों के अपने कामकाज पर भी नजर डालनी चाहिए। उन्होंने महिला सशक्तीकरण के दावों को आंकड़ों के आधार पर परखने की बात कही। उनका सवाल है कि कांग्रेस ने अब तक कितने राज्यों में महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक नेतृत्व दिया और कितनी महिलाओं को संगठन में शीर्ष जिम्मेदारी मिली।
बिहार मॉडल का भी किया जिक्र
संतोष सुमन ने अपने बयान में बिहार में महिलाओं के लिए किए गए आरक्षण के प्रावधानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार में पंचायत चुनावों से लेकर शिक्षक नियुक्ति तक महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था को आगे बढ़ाया गया है। उनके मुताबिक राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए केवल बयान देने के बजाय जमीन पर ऐसे फैसले जरूरी हैं।
जीतन राम मांझी के कार्यकाल का भी हवाला
मंत्री ने अपने पिता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के कार्यकाल से जुड़े फैसलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बिहार की बेटियों को उच्च शिक्षा तक पहुंच दिलाने के लिए कई कदम उठाए गए। संतोष सुमन का कहना है कि महिलाओं को आगे बढ़ाने की राजनीति का मतलब उन्हें अवसर और संसाधन उपलब्ध कराना भी है।
‘नई पीढ़ी हर बात को जांचती है’
संतोष सुमन ने अपने बयान में नई पीढ़ी का जिक्र करते हुए कहा कि आज के युवा नेताओं के भाषणों के साथ उनके पुराने राजनीतिक फैसलों और कामकाज को भी देखते हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और नई तकनीक के दौर में किसी भी नेता के दावे की जानकारी कुछ ही समय में सामने आ जाती है। ऐसे में राजनीतिक दलों को अपने बयानों और काम के बीच अंतर नहीं रखना चाहिए।
नफरत नहीं, विकास की राजनीति का संदेश
बिहार के मंत्री ने विपक्षी दलों से जाति और धर्म के नाम पर राजनीति करने के बजाय विकास और सकारात्मक मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश को आपस में बांटने की राजनीति के बजाय एकजुटता और सद्भाव की जरूरत है। उनके मुताबिक नई पीढ़ी अब केवल लंबे भाषण नहीं सुनना चाहती, बल्कि नेताओं के काम और उनके व्यवहार में बदलाव देखना चाहती है।
‘महिलाओं को उपदेश नहीं, नेतृत्व दीजिए’
अपने पोस्ट के आखिर में संतोष सुमन ने कहा कि महिला सम्मान की शुरुआत घर और राजनीतिक संगठन से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सिर्फ मंच पर बोलने का अवसर देने के बजाय संगठन और सत्ता में वास्तविक जिम्मेदारी देनी चाहिए। उनके अनुसार तभी महिला बराबरी और सशक्तीकरण की बातें ज्यादा प्रभावी और विश्वसनीय बनेंगी।
राहुल के बयान से शुरू हुई नई राजनीतिक बहस
राहुल गांधी के हालिया बयान के बाद महिला अधिकार, राजनीतिक नेतृत्व और पार्टियों में महिलाओं की भागीदारी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। भाजपा की ओर से भी राहुल गांधी से महिला आरक्षण को लेकर सवाल पूछे गए हैं। ऐसे में संतोष सुमन का हमला इस बहस को बिहार की राजनीति से जोड़ता है। अब देखना यह है कि कांग्रेस या राहुल गांधी की ओर से संतोष सुमन के इन सवालों पर कोई जवाब सामने आता है या नहीं।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

