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चीनी हुई महंगी तो भड़का राजद, केंद्र पर सीधा हमला- इथेनॉल के चक्कर में जनता की जेब काट रही सरकार

By Malay Ojha | Published: 21 August 2026 at 07:09 PM

देश में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी को लेकर राष्ट्रीय जनता दल ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। पार्टी नेता एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन समेत त्योहारों के मौसम में चीनी महंगी होने से घरों के बजट के साथ मिठाई कारोबारियों और छोटे दुकानदारों पर भी दबाव बढ़ेगा।

चीनी के दामों में हालिया तेजी के बीच सरकार ने भी बाजार को संभालने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 20 जुलाई को चीनी की औसत कीमत करीब 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर करीब 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। सरकार ने कीमतों पर लगाम लगाने के लिए चीनी के आयात और भंडारण से जुड़े कई फैसले किए हैं।

राजद ने इथेनॉल नीति को घेरा
एजाज अहमद का कहना है कि गन्ने के बड़े हिस्से का इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किए जाने से चीनी के उत्पादन और बाजार में उपलब्धता पर असर पड़ा है। उन्होंने केंद्र की इथेनॉल नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने पर जोर दिया, लेकिन इसके असर से उपभोक्ताओं को होने वाली परेशानी पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।

सरकार ने दावे को बताया गलत
हालांकि, यहां सरकार का पक्ष राजद के आरोप से अलग है। केंद्र ने 21 अगस्त को साफ किया कि चीनी की मौजूदा महंगाई के लिए इथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। सरकार के मुताबिक कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले मांग बढ़ना, मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान, वैश्विक स्तर पर आपूर्ति का दबाव और कुछ हिस्सों में जमाखोरी जैसे कारण हैं।

कीमत बढ़ने के पीछे कई वजहें
चीनी की कीमतों में तेजी अचानक नहीं आई है। अगस्त की शुरुआत में ही बाजार में चीनी के दाम एक महीने में करीब 17 प्रतिशत तक बढ़ने की खबरें सामने आई थीं। उस समय उद्योग से जुड़े लोगों ने कम उत्पादन, कुछ इलाकों में बारिश की कमी और त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली मांग को प्रमुख कारण बताया था।

जमाखोरी पर भी सरकार की नजर
कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए चीनी कारोबारियों के भंडारण पर सीमा लागू की है। यह व्यवस्था अगस्त की शुरुआत से लागू की गई और नवंबर के अंत तक जारी रहने वाली है। सरकार ने कहा था कि कुछ व्यापारियों और बाजार के बिचौलियों की ओर से जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों से बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बन सकता है।

आयात का भी लिया गया फैसला
बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र ने करीब 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति भी दी है। सरकार का मकसद घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाना और त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर कीमतों को काबू में रखना है। यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब घरेलू उत्पादन और शुरुआती स्टॉक को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी हुई है।

राजद ने तत्काल राहत की मांग की
राजद नेता एजाज अहमद ने कहा कि त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है और आने वाले दिनों में चीनी की मांग और बढ़ सकती है। ऐसे में कीमतों में और इजाफा हुआ तो इसका सीधा असर आम परिवारों पर पड़ेगा। खासकर मिठाई बनाने वाले छोटे कारोबारियों, दुकानदारों और घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका है।

महंगाई के बीच बढ़ेगा घरेलू बजट का दबाव
एजाज अहमद ने कहा कि आम लोगों पर पहले से ही महंगाई का दबाव है। खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामान की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच चीनी का महंगा होना परिवारों की परेशानी और बढ़ा सकता है। उन्होंने केंद्र से मांग की कि त्योहारों को देखते हुए बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराई जाए और कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

कालाबाजारी पर सख्ती की मांग
राजद ने सरकार से चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है। पार्टी का कहना है कि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित होने के साथ यह भी देखा जाना चाहिए कि कहीं कारोबारी भविष्य में कीमत बढ़ने की उम्मीद में बड़े पैमाने पर चीनी जमा तो नहीं कर रहे हैं।

इथेनॉल नीति की समीक्षा की मांग
एजाज अहमद ने केंद्र से चीनी और इथेनॉल से जुड़ी नीतियों की समीक्षा करने की मांग की। उनका कहना है कि ऊर्जा जरूरतों और किसानों के हितों के साथ-साथ उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर को भी नीति बनाते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।

चीनी के दाम पर सियासत तेज
चीनी की कीमतों में तेजी अब सिर्फ बाजार का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि इस पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। एक तरफ विपक्ष सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रहा है, वहीं केंद्र का कहना है कि मौजूदा तेजी के पीछे इथेनॉल नहीं, बल्कि कम उत्पादन, त्योहारों की मांग, मौसम और बाजार में कुछ स्तर पर जमाखोरी जैसे कारण हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार के कदम और बाजार में चीनी की उपलब्धता पर सभी की नजर रहेगी।

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चीनी हुई महंगी तो भड़का राजद, केंद्र पर सीधा हमला- इथेनॉल के चक्कर में जनता की जेब काट रही सरकार

By Malay Ojha | Published: 21 August 2026 at 07:09 PM

देश में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी को लेकर राष्ट्रीय जनता दल ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। पार्टी नेता एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन समेत त्योहारों के मौसम में चीनी महंगी होने से घरों के बजट के साथ मिठाई कारोबारियों और छोटे दुकानदारों पर भी दबाव बढ़ेगा।

चीनी के दामों में हालिया तेजी के बीच सरकार ने भी बाजार को संभालने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 20 जुलाई को चीनी की औसत कीमत करीब 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर करीब 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। सरकार ने कीमतों पर लगाम लगाने के लिए चीनी के आयात और भंडारण से जुड़े कई फैसले किए हैं।

राजद ने इथेनॉल नीति को घेरा
एजाज अहमद का कहना है कि गन्ने के बड़े हिस्से का इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किए जाने से चीनी के उत्पादन और बाजार में उपलब्धता पर असर पड़ा है। उन्होंने केंद्र की इथेनॉल नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने पर जोर दिया, लेकिन इसके असर से उपभोक्ताओं को होने वाली परेशानी पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।

सरकार ने दावे को बताया गलत
हालांकि, यहां सरकार का पक्ष राजद के आरोप से अलग है। केंद्र ने 21 अगस्त को साफ किया कि चीनी की मौजूदा महंगाई के लिए इथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। सरकार के मुताबिक कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले मांग बढ़ना, मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान, वैश्विक स्तर पर आपूर्ति का दबाव और कुछ हिस्सों में जमाखोरी जैसे कारण हैं।

कीमत बढ़ने के पीछे कई वजहें
चीनी की कीमतों में तेजी अचानक नहीं आई है। अगस्त की शुरुआत में ही बाजार में चीनी के दाम एक महीने में करीब 17 प्रतिशत तक बढ़ने की खबरें सामने आई थीं। उस समय उद्योग से जुड़े लोगों ने कम उत्पादन, कुछ इलाकों में बारिश की कमी और त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली मांग को प्रमुख कारण बताया था।

जमाखोरी पर भी सरकार की नजर
कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए चीनी कारोबारियों के भंडारण पर सीमा लागू की है। यह व्यवस्था अगस्त की शुरुआत से लागू की गई और नवंबर के अंत तक जारी रहने वाली है। सरकार ने कहा था कि कुछ व्यापारियों और बाजार के बिचौलियों की ओर से जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों से बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बन सकता है।

आयात का भी लिया गया फैसला
बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र ने करीब 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति भी दी है। सरकार का मकसद घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाना और त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर कीमतों को काबू में रखना है। यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब घरेलू उत्पादन और शुरुआती स्टॉक को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी हुई है।

राजद ने तत्काल राहत की मांग की
राजद नेता एजाज अहमद ने कहा कि त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है और आने वाले दिनों में चीनी की मांग और बढ़ सकती है। ऐसे में कीमतों में और इजाफा हुआ तो इसका सीधा असर आम परिवारों पर पड़ेगा। खासकर मिठाई बनाने वाले छोटे कारोबारियों, दुकानदारों और घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका है।

महंगाई के बीच बढ़ेगा घरेलू बजट का दबाव
एजाज अहमद ने कहा कि आम लोगों पर पहले से ही महंगाई का दबाव है। खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामान की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच चीनी का महंगा होना परिवारों की परेशानी और बढ़ा सकता है। उन्होंने केंद्र से मांग की कि त्योहारों को देखते हुए बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराई जाए और कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

कालाबाजारी पर सख्ती की मांग
राजद ने सरकार से चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है। पार्टी का कहना है कि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित होने के साथ यह भी देखा जाना चाहिए कि कहीं कारोबारी भविष्य में कीमत बढ़ने की उम्मीद में बड़े पैमाने पर चीनी जमा तो नहीं कर रहे हैं।

इथेनॉल नीति की समीक्षा की मांग
एजाज अहमद ने केंद्र से चीनी और इथेनॉल से जुड़ी नीतियों की समीक्षा करने की मांग की। उनका कहना है कि ऊर्जा जरूरतों और किसानों के हितों के साथ-साथ उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर को भी नीति बनाते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।

चीनी के दाम पर सियासत तेज
चीनी की कीमतों में तेजी अब सिर्फ बाजार का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि इस पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। एक तरफ विपक्ष सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रहा है, वहीं केंद्र का कहना है कि मौजूदा तेजी के पीछे इथेनॉल नहीं, बल्कि कम उत्पादन, त्योहारों की मांग, मौसम और बाजार में कुछ स्तर पर जमाखोरी जैसे कारण हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार के कदम और बाजार में चीनी की उपलब्धता पर सभी की नजर रहेगी।

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