By Malay Ojha | Published: 01 September 2026 at 12:17 PM
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) ने बीजेपी कोटे के मंत्री लखेंद्र पासवान के बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है। पार्टी के प्रवक्ता श्याम सुंदर शरण ने लखेंद्र पासवान को सार्वजनिक बयानबाजी में संयम बरतने की नसीहत देते हुए कहा कि मंत्री या विधायक का पद हमेशा के लिए नहीं होता। राजनीति में असली मायने जनता के बीच बने विश्वास और नेता के कद के होते हैं।
श्याम सुंदर शरण ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे नेताओं को अपनी भाषा और बयानों को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। उनका कहना था कि सार्वजनिक जीवन में किसी नेता के शब्दों का असर केवल पार्टी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्गों पर भी पड़ता है।
लखेंद्र ने किन नेताओं पर साधा था निशाना?
दरअसल, लखेंद्र पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान, हम नेता संतोष सुमन और उनके पिता एवं पार्टी के संरक्षक जीतन राम मांझी को लेकर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि नेताओं को परिवार के दायरे से बाहर निकलकर अपने समाज के दूसरे लोगों को भी आगे बढ़ाना चाहिए।
‘मैं खुद पर भी यह बात लागू करता हूं’
लखेंद्र पासवान ने अपने बयान में कहा था कि वह खुद भी इस बात को अपने ऊपर लागू करते हैं और इस बात का ध्यान रखते हैं। उनके इस बयान के बाद बिहार की एनडीए राजनीति में सहयोगी दलों के बीच बयानबाजी का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
HAM ने दलित नेताओं के अपमान पर जताई नाराजगी
श्याम सुंदर शरण ने राजद प्रवक्ता की कथित टिप्पणी का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि दलित नेताओं के सम्मान से किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी समाज या उसके नेताओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली भाषा स्वीकार नहीं की जाएगी।
‘ऐसी भाषा जारी रही तो जनता के बीच देंगे जवाब’
HAM प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इसी तरह की भाषा और बयानबाजी आगे भी जारी रही तो इसका जवाब जनता के बीच दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दलित समाज और उसके नेताओं के अपमान को लेकर पार्टी चुप नहीं बैठेगी और जरूरत पड़ने पर राजनीतिक एवं सामाजिक स्तर पर इसका विरोध किया जाएगा।
आरक्षण पर भी लखेंद्र ने दिया था बयान
लखेंद्र पासवान ने अपने बयान में आरक्षण को लेकर भी स्थिति साफ करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि जब तक नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं, आरक्षण की समीक्षा करना या उसमें किसी तरह का बदलाव करना तो दूर, कोई उससे छेड़छाड़ भी नहीं कर सकता। इस बयान के साथ उन्होंने चिराग पासवान, संतोष सुमन और जीतन राम मांझी को अपने समाज के दूसरे लोगों को आगे बढ़ाने की सलाह भी दी थी।
बयानबाजी से बढ़ी सियासी हलचल
लखेंद्र पासवान और HAM प्रवक्ता श्याम सुंदर शरण के बयानों ने बिहार की सियासत में एक नई चर्चा छेड़ दी है। एक तरफ लखेंद्र पासवान ने परिवार से आगे बढ़कर समाज के दूसरे लोगों को मौका देने की बात कही, वहीं HAM ने सार्वजनिक बयानबाजी में संयम बरतने और दलित नेताओं के सम्मान का मुद्दा उठाया है। अब देखना होगा कि इस विवाद पर एनडीए के दूसरे नेताओं की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

