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अनंत सिंह के निष्कासन पर प्रशांत किशोर ने क्यों बनाई दूरी? 26 दिन पुराने बयान से उठे सवाल

By Malay Ojha | Published: 26 October 2026 at 10:35 AM

जेडीयू से छह साल के लिए निष्कासित किए गए मोकामा विधायक अनंत सिंह के मामले में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपना रुख साफ कर दिया है। अनंत सिंह के निष्कासन को उन्होंने जेडीयू का आंतरिक मामला बताया और कहा कि इस कार्रवाई से जन सुराज का कोई लेना-देना नहीं है। पीके के इस बयान के बाद उनके पुराने रुख को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है।

प्रशांत किशोर ने राघोपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि जेडीयू अपने नेताओं को पार्टी में रखे या बाहर करे, यह उसका अपना फैसला है। उन्होंने कार्रवाई के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अनंत सिंह पहले से ही जेडीयू प्रत्याशी के खिलाफ प्रचार कर रहे थे, तब उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इसका जवाब जेडीयू के नेताओं को देना चाहिए।

26 दिन पहले अनंत सिंह के स्वागत की कही थी बात
प्रशांत किशोर के ताजा बयान की तुलना उनके करीब 26 दिन पुराने रुख से की जा रही है। उस समय अनंत सिंह अपने करीबी और जन सुराज के एमएलसी प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। वह जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर आए थे।

तब प्रशांत किशोर ने कहा था कि बिहार की बेहतरी और बदलाव के लिए पूरा समाज जन सुराज के साथ खड़ा है। अगर अनंत सिंह भी इस बदलाव के समर्थन में आते हैं, तो उनका स्वागत है। उस बयान को अनंत सिंह के जन सुराज प्रत्याशी के समर्थन से जोड़कर देखा गया था।

निष्कासन के बाद पीके का बदला रुख चर्चा में
अनंत सिंह के निष्कासन के बाद प्रशांत किशोर का यह कहना कि मामले से जन सुराज का कोई संबंध नहीं है, कई सवाल खड़े कर रहा है। जिस अनंत सिंह के जन सुराज प्रत्याशी के समर्थन में उतरने को लेकर पहले स्वागत की बात कही गई थी, अब उनके खिलाफ जेडीयू की कार्रवाई पर पीके ने खुद को अलग कर लिया है।

हालांकि, प्रशांत किशोर ने अनंत सिंह के निष्कासन की टाइमिंग पर सवाल जरूर उठाए। उनका कहना है कि अगर पार्टी को अनंत सिंह की गतिविधियों पर आपत्ति थी, तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

पीके ने जेडीयू से पूछा कार्रवाई में देरी का सवाल
प्रशांत किशोर के मुताबिक, अनंत सिंह शुरू से ही जन सुराज के प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। ऐसे में जेडीयू ने उन्हें उसी समय क्यों नहीं हटाया? निष्कासन के समय को लेकर उन्होंने सवाल उठाया और इसका जवाब पार्टी के नेताओं पर छोड़ दिया।

उनका साफ कहना था कि किसी प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करने का मतलब यह नहीं कि उसके खिलाफ दूसरी पार्टी की कार्रवाई में भी जन सुराज की कोई भूमिका हो।

अनुज सिंह और नीरज कुमार के नतीजों पर टिकी नजरें
अनंत सिंह के निष्कासन के पीछे जन सुराज के प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार को अहम वजह माना जा रहा है। अब एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद इस पूरे घटनाक्रम का सियासी असर देखने को मिल सकता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनाव परिणाम आने के बाद प्रशांत किशोर और अनंत सिंह के बीच कोई नया सियासी समीकरण बनता है या दोनों के रास्ते अलग ही रहते हैं। फिलहाल, प्रशांत किशोर ने इस मामले में जन सुराज की भूमिका से दूरी बना ली है।

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अनंत सिंह के निष्कासन पर प्रशांत किशोर ने क्यों बनाई दूरी? 26 दिन पुराने बयान से उठे सवाल

By Malay Ojha | Published: 26 October 2026 at 10:35 AM

जेडीयू से छह साल के लिए निष्कासित किए गए मोकामा विधायक अनंत सिंह के मामले में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपना रुख साफ कर दिया है। अनंत सिंह के निष्कासन को उन्होंने जेडीयू का आंतरिक मामला बताया और कहा कि इस कार्रवाई से जन सुराज का कोई लेना-देना नहीं है। पीके के इस बयान के बाद उनके पुराने रुख को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है।

प्रशांत किशोर ने राघोपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि जेडीयू अपने नेताओं को पार्टी में रखे या बाहर करे, यह उसका अपना फैसला है। उन्होंने कार्रवाई के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अनंत सिंह पहले से ही जेडीयू प्रत्याशी के खिलाफ प्रचार कर रहे थे, तब उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इसका जवाब जेडीयू के नेताओं को देना चाहिए।

26 दिन पहले अनंत सिंह के स्वागत की कही थी बात
प्रशांत किशोर के ताजा बयान की तुलना उनके करीब 26 दिन पुराने रुख से की जा रही है। उस समय अनंत सिंह अपने करीबी और जन सुराज के एमएलसी प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। वह जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर आए थे।

तब प्रशांत किशोर ने कहा था कि बिहार की बेहतरी और बदलाव के लिए पूरा समाज जन सुराज के साथ खड़ा है। अगर अनंत सिंह भी इस बदलाव के समर्थन में आते हैं, तो उनका स्वागत है। उस बयान को अनंत सिंह के जन सुराज प्रत्याशी के समर्थन से जोड़कर देखा गया था।

निष्कासन के बाद पीके का बदला रुख चर्चा में
अनंत सिंह के निष्कासन के बाद प्रशांत किशोर का यह कहना कि मामले से जन सुराज का कोई संबंध नहीं है, कई सवाल खड़े कर रहा है। जिस अनंत सिंह के जन सुराज प्रत्याशी के समर्थन में उतरने को लेकर पहले स्वागत की बात कही गई थी, अब उनके खिलाफ जेडीयू की कार्रवाई पर पीके ने खुद को अलग कर लिया है।

हालांकि, प्रशांत किशोर ने अनंत सिंह के निष्कासन की टाइमिंग पर सवाल जरूर उठाए। उनका कहना है कि अगर पार्टी को अनंत सिंह की गतिविधियों पर आपत्ति थी, तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

पीके ने जेडीयू से पूछा कार्रवाई में देरी का सवाल
प्रशांत किशोर के मुताबिक, अनंत सिंह शुरू से ही जन सुराज के प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। ऐसे में जेडीयू ने उन्हें उसी समय क्यों नहीं हटाया? निष्कासन के समय को लेकर उन्होंने सवाल उठाया और इसका जवाब पार्टी के नेताओं पर छोड़ दिया।

उनका साफ कहना था कि किसी प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार करने का मतलब यह नहीं कि उसके खिलाफ दूसरी पार्टी की कार्रवाई में भी जन सुराज की कोई भूमिका हो।

अनुज सिंह और नीरज कुमार के नतीजों पर टिकी नजरें
अनंत सिंह के निष्कासन के पीछे जन सुराज के प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार को अहम वजह माना जा रहा है। अब एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद इस पूरे घटनाक्रम का सियासी असर देखने को मिल सकता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनाव परिणाम आने के बाद प्रशांत किशोर और अनंत सिंह के बीच कोई नया सियासी समीकरण बनता है या दोनों के रास्ते अलग ही रहते हैं। फिलहाल, प्रशांत किशोर ने इस मामले में जन सुराज की भूमिका से दूरी बना ली है।

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