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ब्रेस्ट में गांठ को न करें नजरअंदाज, बिना दर्द के भी हो सकता है कैंसर; डॉक्टर ने दी जरूरी सलाह

By Malay Ojha | Published: 27 October 2026 at 05:19 PM

स्तन में गांठ होने पर दर्द का इंतजार करना भारी पड़ सकता है। ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों में गांठ के अलावा निप्पल से असामान्य स्राव और त्वचा में बदलाव भी शामिल हैं। ऐसे संकेत दिखने पर महिलाओं को बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह के मौके पर नारायणा कैंसर सेंटर एवं पारस एचएमआरआई अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. अभिषेक आनंद ने महिलाओं को नियमित जांच कराने और शरीर में होने वाले बदलावों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी।

दर्द नहीं है, तब भी गांठ की कराएं जांच
डॉ. अभिषेक आनंद ने बताया कि स्तन में हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन किसी भी नई या असामान्य गांठ को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। कई बार शुरुआती अवस्था में स्तन कैंसर के लक्षण स्पष्ट नहीं होते। इसलिए गांठ में दर्द होने का इंतजार करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

शुरुआती पहचान से इलाज में मिलती है मदद
डॉक्टर के मुताबिक, स्तन कैंसर का शुरुआती चरण में पता चलने पर इलाज के बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है। महिलाओं को स्तन के आकार में बदलाव, त्वचा में असामान्य खिंचाव या बदलाव और निप्पल से असामान्य स्राव जैसे संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

नई तकनीकों से इलाज के विकल्प बढ़े
डॉ. आनंद ने बताया कि स्तन कैंसर के इलाज में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ा है। इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी जैसी उपचार पद्धतियों ने कई मरीजों के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं। बीमारी की अवस्था और मरीज की स्थिति के अनुसार इलाज तय किया जाता है। उन्नत अवस्था में भी कुछ मरीजों को प्रभावी उपचार से लाभ मिल सकता है।

पारिवारिक इतिहास होने पर रहें सतर्क
डॉक्टर ने कहा कि स्तन कैंसर के जोखिम को समझने के लिए उम्र और पारिवारिक इतिहास जैसे कारकों को ध्यान में रखना चाहिए। महिलाओं को अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह पर स्क्रीनिंग करानी चाहिए। जागरूकता और समय पर जांच से बीमारी की पहचान में मदद मिल सकती है।

झिझक छोड़ें, सेहत को दें प्राथमिकता
अक्टूबर को ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान महिलाओं को बीमारी के लक्षणों, जांच और इलाज के बारे में जागरूक किया जाता है। डॉ. अभिषेक आनंद ने महिलाओं से अपील की कि वे झिझक के कारण अपनी परेशानी न छिपाएं और किसी भी असामान्य बदलाव पर चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी न करें।

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ब्रेस्ट में गांठ को न करें नजरअंदाज, बिना दर्द के भी हो सकता है कैंसर; डॉक्टर ने दी जरूरी सलाह

By Malay Ojha | Published: 27 October 2026 at 05:19 PM

स्तन में गांठ होने पर दर्द का इंतजार करना भारी पड़ सकता है। ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों में गांठ के अलावा निप्पल से असामान्य स्राव और त्वचा में बदलाव भी शामिल हैं। ऐसे संकेत दिखने पर महिलाओं को बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह के मौके पर नारायणा कैंसर सेंटर एवं पारस एचएमआरआई अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. अभिषेक आनंद ने महिलाओं को नियमित जांच कराने और शरीर में होने वाले बदलावों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी।

दर्द नहीं है, तब भी गांठ की कराएं जांच
डॉ. अभिषेक आनंद ने बताया कि स्तन में हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन किसी भी नई या असामान्य गांठ को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। कई बार शुरुआती अवस्था में स्तन कैंसर के लक्षण स्पष्ट नहीं होते। इसलिए गांठ में दर्द होने का इंतजार करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

शुरुआती पहचान से इलाज में मिलती है मदद
डॉक्टर के मुताबिक, स्तन कैंसर का शुरुआती चरण में पता चलने पर इलाज के बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है। महिलाओं को स्तन के आकार में बदलाव, त्वचा में असामान्य खिंचाव या बदलाव और निप्पल से असामान्य स्राव जैसे संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

नई तकनीकों से इलाज के विकल्प बढ़े
डॉ. आनंद ने बताया कि स्तन कैंसर के इलाज में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ा है। इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी जैसी उपचार पद्धतियों ने कई मरीजों के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं। बीमारी की अवस्था और मरीज की स्थिति के अनुसार इलाज तय किया जाता है। उन्नत अवस्था में भी कुछ मरीजों को प्रभावी उपचार से लाभ मिल सकता है।

पारिवारिक इतिहास होने पर रहें सतर्क
डॉक्टर ने कहा कि स्तन कैंसर के जोखिम को समझने के लिए उम्र और पारिवारिक इतिहास जैसे कारकों को ध्यान में रखना चाहिए। महिलाओं को अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह पर स्क्रीनिंग करानी चाहिए। जागरूकता और समय पर जांच से बीमारी की पहचान में मदद मिल सकती है।

झिझक छोड़ें, सेहत को दें प्राथमिकता
अक्टूबर को ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान महिलाओं को बीमारी के लक्षणों, जांच और इलाज के बारे में जागरूक किया जाता है। डॉ. अभिषेक आनंद ने महिलाओं से अपील की कि वे झिझक के कारण अपनी परेशानी न छिपाएं और किसी भी असामान्य बदलाव पर चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी न करें।

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