By Malay Ojha | Published: 29 October 2026 at 11:38 AM
बिहार में मोकामा के विधायक अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता को लेकर सस्पेंस बढ़ गया है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद अब उनकी विधायकी पर भी फैसला हो सकता है। बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा है कि अनंत सिंह के खिलाफ मिले आवेदन और उसके साथ लगाए गए प्रमाणों की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद नियमों के मुताबिक आगे की कार्रवाई होगी।
अनंत सिंह के खिलाफ विधानसभा पहुंचा आवेदन
गया में मीडिया से बातचीत के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने अनंत सिंह के खिलाफ लिखित आवेदन दिया है। इसमें उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं। आवेदन के साथ संबंधित प्रमाण भी सौंपे गए हैं। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही इस मामले में अगला कदम उठाया जाएगा।
समीक्षा के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि अनंत सिंह के खिलाफ मिले आवेदन और प्रमाणों को देखा जाएगा। इसके बाद नियमानुसार विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी। उनके इस बयान के बाद विधायक की सदस्यता को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने अभी सदस्यता समाप्त करने का कोई फैसला नहीं सुनाया है।
विधान परिषद चुनाव में जदयू प्रत्याशी के खिलाफ प्रचार का आरोप
अनंत सिंह पर आरोप है कि उन्होंने हाल ही में हुए पटना स्नातक और शिक्षक विधान परिषद चुनाव में जदयू के प्रत्याशी के खिलाफ प्रचार किया था। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधि मानते हुए उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। इसके बाद जदयू की ओर से विधानसभा अध्यक्ष को आवेदन दिए जाने से मामला अब उनकी विधायकी तक पहुंच गया है।
समर्थित प्रत्याशी की हार के बाद क्या बोले अनंत सिंह?
विधान परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद अनंत सिंह ने अपने समर्थित प्रत्याशी डॉ. अनुज कुमार की हार स्वीकार कर ली। चुनाव परिणाम पर उनकी तत्काल प्रतिक्रिया को भी राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, उनके इस रुख का विधानसभा सदस्यता से जुड़े मामले पर कोई असर पड़ेगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
क्या अनंत सिंह की विधायकी बच जाएगी?
फिलहाल अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता पर अंतिम निर्णय का इंतजार है। विधानसभा अध्यक्ष के बयान से इतना साफ है कि आवेदन और उसके साथ दिए गए प्रमाणों की समीक्षा के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। अब निगाहें इस बात पर हैं कि समीक्षा के बाद अनंत सिंह को राहत मिलती है या उनकी सदस्यता को लेकर कोई बड़ा फैसला सामने आता है।
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