By Malay Ojha | Published: 31 October 2026 at 10:41 PM
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। रामपुर जेल से रिहा होने के कुछ समय बाद ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में उन्हें हिरासत में ले लिया। अधिकारियों के अनुसार, अब उन्हें गाजियाबाद की अदालत में पेश किया जाएगा, जहां ED उनकी औपचारिक गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी कर सकती है।
रिहाई के बाद फिर कार्रवाई
आजम खान को इससे पहले दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इसके बाद वह रामपुर जेल से बाहर आए, लेकिन उनकी रिहाई के साथ ही ED की कार्रवाई ने उनके सामने नई कानूनी चुनौती खड़ी कर दी है।
जौहर ट्रस्ट की संपत्तियों पर भी ED का शिकंजा
मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत ED ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ी संपत्तियों पर भी कार्रवाई की है। एजेंसी ने जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों समेत 426.46 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। ED के मुताबिक, इन संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये आंकी गई है।
जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन जांच के घेरे में
रामपुर के सिंहनखेड़ा गांव में स्थित जौहर यूनिवर्सिटी का परिसर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के नाम पर है। ट्रस्ट की स्थापना आजम खान ने की थी और वह यूनिवर्सिटी के मानद चांसलर भी हैं।
ED ने अपनी जांच रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 FIR के आधार पर शुरू की थी। इनमें आरोप लगाया गया था कि यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए किसानों की कृषि भूमि पर कथित तौर पर जबरन कब्जा किया गया।
शत्रु संपत्ति पर कब्जे का भी आरोप
जांच के दौरान जिला प्रशासन की रिपोर्ट में सिंहनखेड़ा गांव की करीब 34 एकड़ जमीन से जुड़े मामले भी सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक, शत्रु संपत्ति के 45 प्लॉट पर कथित अवैध कब्जे के आरोप हैं। ED का कहना है कि इस जमीन का इस्तेमाल जौहर यूनिवर्सिटी के लिए किया गया, जबकि गृह मंत्रालय की ओर से नियुक्त कस्टोडियन पहले ही ट्रस्ट को दी गई जमीन की लीज रद्द कर चुका था। बाद में इस जमीन का कब्जा शत्रु संपत्ति कस्टोडियन ने जिला प्रशासन के जरिए वापस ले लिया।
सरकारी धन के इस्तेमाल की भी जांच
ED की जांच में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का मामला भी सामने आया है। एजेंसी का आरोप है कि सार्वजनिक कार्यों के लिए आवंटित धन को यूनिवर्सिटी से जुड़े कामों की ओर डायवर्ट किया गया। जांच में यह भी आरोप है कि सरकारी ठेके लेने वाले ठेकेदारों से पैसा ट्रस्ट को दान के रूप में दिलवाया गया।
अक्टूबर में दर्ज हुई नई FIR
ED ने PMLA की धारा 66(2) के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ अपनी जांच से जुड़ी जानकारी साझा की थी। इसके बाद 13 अक्टूबर 2026 को रामपुर के अजीमनगर थाने में FIR नंबर 0224/2026 दर्ज की गई। इसमें आजम खान, ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार निवारण कानून की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
बुलडोजर कार्रवाई वाले मामले भी जांच में
ED ने आजम खान और अन्य लोगों के खिलाफ रामपुर पुलिस में दर्ज 28 अन्य FIR को भी जांच के दायरे में लिया है। इनमें से कई मामलों में पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इन मामलों में आरोप है कि वर्ष 2016 में रामपुर शहर में कई मकानों को बुलडोजर से गिराया गया था। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि उन्हें धमकाया गया, मारपीट की गई और उनके सामान को नुकसान पहुंचाया गया। जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि तोड़े गए मकानों का मलबा जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में पहुंचाया गया।
नगर पालिका की मशीनरी को लेकर भी आरोप
रामपुर नगर पालिका की सफाई मशीनरी से जुड़ा मामला भी ED की जांच में शामिल है। FIR और पुलिस चार्जशीट के अनुसार, नगर पालिका के लिए खरीदी गई कुछ मशीनरी को कथित तौर पर यूनिवर्सिटी परिसर में भेजा गया था। ED अब इन सभी मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
रिहाई के बाद आजम खान ने क्या कहा
रामपुर जेल से बाहर आने के बाद आजम खान ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि अब कहने के लिए कुछ बचा नहीं है और कानून का अस्तित्व खत्म हो गया है। उन्होंने अपने खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए जौहर यूनिवर्सिटी और शिक्षा संस्थानों की स्थापना का भी जिक्र किया था।
अब ED की हिरासत के बाद आजम खान के खिलाफ चल रहे मामलों ने एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी हलचल बढ़ा दी है। गाजियाबाद की अदालत में पेशी के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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