By Malay Ojha | Published: 01 November 2026 at 05:17 PM
वाराणसी: सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में रविवार को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर सांस्कृतिक महोत्सव आयोजित किया गया। योगसाधना केंद्र में हुए इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत की झलक देखने को मिली। विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ पर आधारित भाषण, लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए वहां की परंपराओं को सामने रखा।
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा और सांस्कृतिक पहचान पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई। इसके साथ ही सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 के तहत ‘सतर्क नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र’ और ‘श्रेष्ठ एवं समृद्ध भारत’ विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
लोकगीतों और प्रस्तुतियों से जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की संस्कृति
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक एवं पौराणिक मंगलाचरण, दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विशेषताओं को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शाया।
हर राज्य की संस्कृति का सम्मान जरूरी: कुलपति
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता है। देश के हर राज्य की भाषा, परंपरा, लोकाचार और सांस्कृतिक भावनाओं का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि किसी राज्य का गठन केवल भौगोलिक सीमाओं का निर्धारण नहीं होता, बल्कि उस क्षेत्र की सामाजिक मान्यताओं, सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को सम्मान देने का अवसर भी होता है। छत्तीसगढ़ का गठन भी वहां की विशिष्ट जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं और परंपराओं को पहचान देने का प्रतीक है।
विद्यार्थियों को देश की विविधता से जोड़ते हैं ऐसे आयोजन
कुलपति ने कहा कि विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस समारोह विद्यार्थियों को देश की बहुआयामी सांस्कृतिक विरासत समझने का अवसर देते हैं। सभी राज्यों को अपनी विशिष्ट पहचान और परंपराओं को संरक्षित करते हुए राष्ट्रीय विकास में योगदान देना चाहिए। आपसी सम्मान, सद्भाव और समन्वय से ही ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना मजबूत होगी।
ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से बनेगा समृद्ध भारत
विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार शाही ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह के तहत आयोजित कार्यक्रम में कहा कि देश की समृद्धि केवल आर्थिक विकास से तय नहीं होती, बल्कि नागरिकों के नैतिक चरित्र, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की भी इसमें अहम भूमिका है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी चाहिए। पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने व्यवहार का हिस्सा बनाना जरूरी है। जागरूक नागरिक ही सुरक्षित राष्ट्र की नींव हैं। युवा पीढ़ी में नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करके ही श्रेष्ठ एवं समृद्ध भारत का निर्माण किया जा सकता है।
15 नवंबर तक होंगे विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस समारोह
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं छात्र कल्याण संकाय प्रमुख प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सामाजिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं की जानकारी देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति के निर्देश पर 31 अक्टूबर से 15 नवंबर 2026 तक विश्वविद्यालय में विभिन्न प्रदेशों के स्थापना दिवस समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस का आयोजन किया गया।
इनकी रही मौजूदगी
कार्यक्रम का संचालन सह-नोडल अधिकारी डॉ. रविशंकर पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव राकेश कुमार, प्रो. जितेन्द्र कुमार, डॉ. उमाशंकर उपाध्याय, डॉ. श्रुति उपाध्याय सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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