By Malay Ojha | Published: 27 October 2026 at 12:00 PM
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत आगे बढ़ गई है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि समझौते पर चर्चा का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है और अब अंतिम प्रारूप को बेहतर बनाने पर काम चल रहा है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के मुताबिक, समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कुछ ही मुद्दे बाकी हैं।
इस समझौते पर दोनों देशों के कारोबारियों और निर्यातकों की नजर है। भारत को उम्मीद है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान पर टैरिफ कम होने से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। दूसरी तरफ, अमेरिका चाहता है कि भारत उससे ऊर्जा, विमानन और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में खरीद बढ़ाए। हालांकि, बातचीत आगे बढ़ने के बावजूद अभी समझौते पर औपचारिक मुहर नहीं लगी है।
ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की तैयारी
पीयूष गोयल ने 26 अक्टूबर को नीदरलैंड के हेग में भारत-नीदरलैंड बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर ज्यादातर चर्चा पूरी हो चुकी है। अब इसके बाकी ब्योरे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भी हाल ही में कह चुके हैं कि समझौते के कुछ मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।
फरवरी में बनी थी टैरिफ घटाने की रूपरेखा
भारत और अमेरिका ने फरवरी 2026 में व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए एक रूपरेखा घोषित की थी। इसके तहत अमेरिका ने भारतीय सामान पर रेसिप्रोकल टैरिफ की दर 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने और रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर लगाया गया अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ हटाने की बात कही थी। हालांकि, यह रूपरेखा अंतिम व्यापार समझौते के बराबर नहीं थी।
अमेरिकी टैरिफ नीति में बदलाव से बढ़ी चुनौती
समझौते की प्रक्रिया के बीच अमेरिका की टैरिफ नीति में बदलाव हुए। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फरवरी के फैसले के बाद रेसिप्रोकल टैरिफ व्यवस्था पर असर पड़ा और भारतीय सामान पर शुल्क को लेकर नई परिस्थितियां बनीं। ऐसे में दोनों देशों को व्यापार समझौते के कई पहलुओं पर फिर से चर्चा करनी पड़ी।
अक्टूबर में भी हुईं कई अहम बैठकें
व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अक्टूबर में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच संपर्क जारी रहा। पीयूष गोयल ने 1 अक्टूबर को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर से मुलाकात की थी। इसके बाद भारतीय अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने 15 से 17 अक्टूबर के बीच वाशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत की।
20 अक्टूबर को मुंबई दौरे के दौरान मार्को रूबियो ने भी कहा था कि समझौता काफी करीब है और कुछ मुद्दों को सुलझाना बाकी है। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि इन पर जल्द सहमति बन सकती है। हालांकि, उन्होंने बाकी मुद्दों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया।
भारत अमेरिका से क्या खरीदना चाहता है?
भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के उत्पाद खरीदने का इरादा जताया है। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके कलपुर्जे, बहुमूल्य धातुएं, टेक्नोलॉजी से जुड़े उत्पाद और कोकिंग कोयला शामिल हैं। दूसरी तरफ, अमेरिका भारतीय बाजार में अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाना चाहता है।
भारतीय निर्यातकों को टैरिफ में राहत की उम्मीद
भारत के लिए इस समझौते का अहम पहलू अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान को प्रतिस्पर्धी बनाना है। टैरिफ में राहत मिलने से कपड़ा, चमड़ा, जूते, मशीनरी और दूसरे उत्पादों के निर्यातकों को फायदा हो सकता है। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम समझौते में किन उत्पादों को राहत मिलती है और उसकी शर्तें क्या तय होती हैं।
समझौते पर औपचारिक मुहर का इंतजार
भारत और अमेरिका के बीच बातचीत में प्रगति के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन दोनों देशों की ओर से अंतिम समझौते की औपचारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। पीयूष गोयल और मार्को रूबियो के हालिया बयानों से संकेत मिलता है कि वार्ता अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। अब नजर इस बात पर है कि शेष मुद्दों पर सहमति कब बनती है और समझौते की घोषणा कब होती है।
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