By Malay Ojha | Published: 22 June 2026 at 11:18 AM
री-नीट परीक्षा के दौरान बिहार में एक बार फिर बड़े परीक्षा घोटाले का खुलासा हुआ है। लखीसराय में प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में सात सॉल्वर समेत कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा दिलाने के लिए 30 लाख रुपये तक का सौदा तय किया गया था। इस मामले में बायोमेट्रिक जांच करने वाली कंपनी के 14 कर्मचारी भी गिरफ्तार किए गए हैं।
पुलिस को परीक्षा के दौरान कुछ संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी। इसके बाद प्रशासन ने लखीसराय के तीन अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई में कई ऐसे लोग पकड़े गए जो कथित तौर पर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे। जांच में कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी भी गिरफ्तार
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले में बायोमेट्रिक जांच का काम करने वाली कंपनी के 14 कर्मचारी भी गिरफ्तार किए गए हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि परीक्षा केंद्रों में फर्जी अभ्यर्थियों को प्रवेश दिलाने में इन कर्मचारियों की अहम भूमिका रही है। इसी वजह से अब जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है।
30 लाख रुपये में तय हो रहा था खेल
प्राथमिक जांच में पता चला है कि मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से मोटी रकम वसूली जा रही थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एक उम्मीदवार की जगह दूसरे व्यक्ति को परीक्षा में बैठाने के लिए 30 लाख रुपये तक का सौदा किया गया था। माना जा रहा है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था।
पीएमसीएच के छात्र से खुला पूरा राज
इस पूरे रैकेट का खुलासा तब हुआ जब हाजीपुर निवासी और पीएमसीएच का छात्र मयंक कश्यप संदिग्ध हालात में पकड़ा गया। बताया जा रहा है कि वह बायोमेट्रिक कंपनी का कर्मचारी बनकर परीक्षा केंद्र में दाखिल हुआ था। उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर प्रशासन ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद पूरे गिरोह की परतें खुलनी शुरू हो गईं।
बीएचयू की छात्रा समेत कई मेडिकल छात्र गिरफ्तार
जांच के दौरान कई और नाम सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, पूनम कुमारी नाम की युवती एक अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने पहुंची थी। वह बीएचयू में नर्सिंग की छात्रा बताई जा रही है। इसके अलावा रायबरेली एम्स का छात्र सौरभ झा, एनएमसीएच पटना का छात्र संजीत और उत्तर प्रदेश के एक मेडिकल कॉलेज का छात्र अमन अग्रवाल भी इस गिरोह से जुड़े पाए गए हैं।
पुराने पेपर लीक मामले से जुड़ा तार
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड अर्पित राज है, जो गया मेडिकल कॉलेज का छात्र बताया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अर्पित राज का नाम वर्ष 2024 के चर्चित नीट पेपर लीक मामले में भी सामने आया था। उस समय केंद्रीय जांच एजेंसी ने उससे पूछताछ की थी। अब उसका नाम फिर सामने आने से जांच एजेंसियां पुराने मामलों की फाइलें भी खंगाल रही हैं।
कई राज्यों तक फैला हो सकता है नेटवर्क
पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह केवल बिहार तक सीमित नहीं है। जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि इसके तार दूसरे राज्यों तक भी जुड़े हो सकते हैं। गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और आने वाले दिनों में कई और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।
री-नीट की साख पर फिर उठे सवाल
लगातार दूसरी बार परीक्षा में धांधली की खबर सामने आने के बाद री-नीट की विश्वसनीयता पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अभ्यर्थियों और अभिभावकों के बीच भी इस घटना को लेकर नाराजगी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क का कितना बड़ा खुलासा कर पाती हैं।
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