By Malay Ojha | Published: 18 May 2026 at 06:07 PM
मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव और युद्ध के बीच पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं। एक तरफ पाकिस्तान खुद को युद्ध खत्म कराने की कोशिशों में शामिल बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसने सऊदी अरब में बड़ी सैन्य तैनाती कर दी है। इसी वजह से अब पाकिस्तान पर “डबल गेम” खेलने के आरोप लगने लगे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान ने आपसी रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब में करीब 8 हजार सैनिक तैनात किए हैं। इसके साथ ही लड़ाकू विमानों का बेड़ा और चीन से खरीदा गया एयर डिफेंस सिस्टम भी वहां भेजा गया है। बताया जा रहा है कि यह तैनाती ऐसे समय में हुई है, जब क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा है।
जेएफ-17 लड़ाकू विमान भी शामिल
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान ने चीन में बने करीब 16 जेएफ-17 लड़ाकू विमान भी सऊदी अरब भेजे हैं। ये विमान अप्रैल की शुरुआत में वहां पहुंचे थे। इसके अलावा ड्रोन के दो स्क्वाड्रन और एचक्यू-9 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली भी तैनात की गई है। इन सैन्य संसाधनों का संचालन पाकिस्तान करेगा, जबकि खर्च सऊदी अरब उठाएगा।
युद्ध के बीच मध्यस्थता भी कर रहा पाकिस्तान
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान खुद को युद्ध रोकने की कोशिशों में भी सक्रिय बता रहा है। मार्च महीने से पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने और तनाव कम करने के प्रयासों में लगा हुआ है। उसने दोनों देशों की मेजबानी भी की थी, हालांकि शुरुआती दौर की बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका।
ट्रंप से कई बार हुई बातचीत
संघर्ष के दौरान पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कई बार बातचीत की थी। ट्रंप भी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि पाकिस्तान की अपील के बाद कई बार बड़े हमले टाले गए। इसके बावजूद पाकिस्तान की सैन्य तैनाती को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
80 हजार सैनिक भेजने का भी प्रावधान
रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए रक्षा समझौते में करीब 80 हजार सैनिकों तक की तैनाती का प्रावधान मौजूद है। बताया जा रहा है कि यह तैनाती उस समय शुरू हुई थी, जब ईरान की ओर से सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर हमले किए गए थे।
पाकिस्तान की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
हालांकि सऊदी अरब में हुई इस सैन्य तैनाती को लेकर पाकिस्तान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन क्षेत्रीय हालात और पाकिस्तान की दोहरी भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
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