By Malay Ojha | Published: 24 July 2026 at 08:28 PM
नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की तैयारी सामने आई है। शुक्रवार को एजेंसी ने 47 अधिकारियों को नौकरी से हटा दिया। इनमें कुछ अधिकारियों के खिलाफ आगे कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी की जा सकती है। इसी के साथ एनटीए के पूरे ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि अगले एक महीने में एजेंसी के काम करने के तरीके से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक में कई अहम बदलाव किए जा सकते हैं।
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, 47 अधिकारियों को हटाने का फैसला एनटीए में जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। कार्रवाई यहीं रुकने वाली नहीं है। जिन लोगों की भूमिका जांच में संदिग्ध पाई जाएगी, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी अपनाया जा सकता है। यानी आने वाले दिनों में एजेंसी के भीतर और भी बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं।
एक महीने में बदल सकता है NTA का पूरा ढांचा
सरकार अब एनटीए के मौजूदा ढांचे की व्यापक समीक्षा कर रही है। इसके तहत एजेंसी के प्रशासन, परीक्षा संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अगले एक महीने के भीतर एनटीए के पुनर्गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इसका मकसद ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें परीक्षा से जुड़ी किसी भी गड़बड़ी की गुंजाइश कम से कम हो और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी साफ हो।
आउटसोर्सिंग मॉडल में भी बदलाव के संकेत
एनटीए में परीक्षा से जुड़े कई काम बाहरी एजेंसियों और कर्मचारियों की मदद से किए जाते हैं। अब सरकार इस पूरी व्यवस्था की भी समीक्षा कर रही है। परीक्षा कराने से लेकर उससे जुड़ी दूसरी प्रक्रियाओं में बाहरी एजेंसियों की भूमिका कितनी होनी चाहिए, इस पर विशेषज्ञों की सिफारिश के आधार पर फैसला लिए जाने की संभावना है। अगर मौजूदा व्यवस्था में बदलाव होता है, तो परीक्षा संचालन का पूरा तरीका भी बदल सकता है।
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती भरोसा लौटाने की
नीट विवाद के बाद सबसे बड़ा सवाल परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर उठा है। लाखों छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होते हैं और उनके भविष्य का बड़ा हिस्सा इन परीक्षाओं के नतीजों पर निर्भर करता है। ऐसे में सरकार के सामने सिर्फ व्यवस्था में बदलाव करने की चुनौती नहीं है, बल्कि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा वापस जीतना भी बड़ी जिम्मेदारी है।
NTA को लीक-प्रूफ बनाने की तैयारी
सरकार का लक्ष्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें प्रश्नपत्र की सुरक्षा से लेकर परीक्षा केंद्र तक हर स्तर पर निगरानी मजबूत हो। इसके लिए परीक्षा प्रक्रिया की कमजोर कड़ियों की पहचान की जा रही है। माना जा रहा है कि नई व्यवस्था में तकनीक, सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करने के तरीके पर खास ध्यान दिया जाएगा। हालांकि, इन बदलावों का अंतिम स्वरूप विशेषज्ञों की सिफारिशों और सरकार के फैसले के बाद ही साफ होगा।
JEE से NEET तक कई बड़ी परीक्षाओं की जिम्मेदारी
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी हर साल देश की कई बड़ी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करती है। इनमें जेईई, नीट और सीयूईटी जैसी परीक्षाएं शामिल हैं। लाखों छात्र इन परीक्षाओं में हिस्सा लेते हैं। ऐसे में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी का असर बहुत बड़े वर्ग पर पड़ता है। यही वजह है कि हाल के विवादों के बाद एनटीए की कार्यप्रणाली और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।
शिक्षा मंत्रालय में भी हुआ बड़ा बदलाव
एनटीए पर कार्रवाई के बीच केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग में भी बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। 1994 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया है। उन्होंने विनीत जोशी की जगह जिम्मेदारी संभाली है। जोशी को पंचायती राज मंत्रालय में सचिव बनाया गया है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब नीट परीक्षा को लेकर छात्रों का विरोध और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल लगातार चर्चा में हैं। हालांकि, सरकारी आदेश में इस बदलाव को सीधे नीट विवाद से जोड़ने की कोई वजह नहीं बताई गई है।
नरेश पाल गंगवार के सामने होंगी कई बड़ी चुनौतियां
नरेश पाल गंगवार के सामने सबसे अहम चुनौती राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की होगी। इसके अलावा हालिया विवादों से प्रभावित छात्रों का भरोसा लौटाना और परीक्षा व्यवस्था की कमियों की समीक्षा करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है। सरकार की कोशिश अब यह संदेश देने की है कि परीक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
NTA के भीतर पहले से चल रही थी ढांचे को मजबूत करने की कवायद
एनटीए की स्थापना एक स्व-वित्तपोषित संगठन के रूप में की गई थी और इसका नेतृत्व महानिदेशक करते हैं। केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2024 में एजेंसी के लिए 16 नए पद भी स्वीकृत किए थे। इनमें आठ निदेशक स्तर और आठ संयुक्त निदेशक स्तर के पद शामिल थे। एजेंसी में प्रतिनियुक्ति, संविदा और बाहरी माध्यम से जुड़े कर्मचारी भी काम करते हैं। ऐसे में अब होने वाला पुनर्गठन केवल अधिकारियों को हटाने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि एजेंसी की पूरी कार्यप्रणाली की समीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।
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