By Malay Ojha | Published: 02 November 2026 at 10:07 PM
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भगवान राम और कृष्ण को लेकर दिए गए बयान पर विवाद तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए उन पर निशाना साधते हुए इसे सनातन समाज की एकता को नुकसान पहुंचाने वाली कोशिश बताया है। अखिलेश ने मामले की जांच और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।
सनातन समाज को बांटने की कोशिश का आरोप
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि एक अवतार की तुलना दूसरे अवतार से कर किसी को बड़ा या छोटा बताने की कोशिश बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे सनातन समाज के खिलाफ एक गहरी साजिश बताते हुए सवाल उठाया कि आखिर धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने के पीछे किसकी मंशा काम कर रही है।
‘जहर उगलना किसी भी हालत में स्वीकार नहीं’
सपा प्रमुख ने कहा कि किसी भी धर्म, संप्रदाय, आराध्य या महापुरुष के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि समाज में वैमनस्य फैलाने वालों को रोका जा सके।
शिवपुरी की कथा में दिया था विवादित बयान
विवाद की शुरुआत मध्य प्रदेश के शिवपुरी में आयोजित श्रीराम कथा से हुई। धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और भगवान कृष्ण की तुलना करते हुए कहा था कि बांसुरी बजाना खेल है, जबकि धनुष चलाना खेल नहीं है। बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं।
विवाद बढ़ा तो धीरेंद्र शास्त्री ने मांगी माफी
बयान पर विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने सफाई देते हुए माफी मांगी। उन्होंने कहा कि यह बात भाव में कही गई थी और उनके शब्दों का वह अर्थ नहीं था, जो विवाद के रूप में सामने आया। हालांकि, इसके बावजूद राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर बयान को लेकर प्रतिक्रियाएं जारी हैं।
अखिलेश बोले- दोनों अवतारों के बीच भेद क्यों?
अखिलेश यादव ने कहा कि हर सच्चे सनातनी के लिए दोनों ही अवतार पूजनीय हैं और उनके बीच किसी तरह का भेद नहीं किया जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि अलग-अलग समय और परिस्थितियों में हुई लीलाओं की तुलना कर विवाद खड़ा करने की जरूरत क्या थी और इसके पीछे आखिर क्या उद्देश्य है।
पुराने धार्मिक विवादों का भी किया जिक्र
सपा अध्यक्ष ने अपने बयान में देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा के कथित अपमान, मणिकर्णिका घाट से जुड़े विवादों, मंदिरों को तोड़े जाने और शंकराचार्य से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के पीछे किसी बड़ी साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक दलों से भी एकजुट होने की अपील
अखिलेश यादव ने कहा कि धार्मिक आस्था और समाज की एकता से जुड़े ऐसे मामलों में सभी राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस तरह की बयानबाजी पर रोक नहीं लगी तो समाज में अशांति और आपसी तनाव का माहौल बन सकता है।
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