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प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ बड़ा कदम, गर्दनीबाग में AISA नेताओं ने शुरू की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

By Malay Ojha | Published: 23 August 2026 at 08:30 PM

बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे आंदोलन ने अब नया रूप ले लिया है। गर्दनीबाग धरना स्थल पर जारी प्रदर्शन के समर्थन में आइसा के तीन नेताओं ने रविवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। संगठन ने बीपीएससी, बीएसएससी, बीपीएसएससी, दरोगा भर्ती और शिक्षक भर्ती परीक्षा सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई है।

आइसा बिहार की राज्य उपाध्यक्ष मनीषा, राज्य उपाध्यक्ष सोनू फर्नाज़ और पटना विश्वविद्यालय इकाई के सचिव आदर्श भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह कदम सरकार और संबंधित भर्ती आयोगों पर परीक्षा प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही तय करने का दबाव बनाने के लिए उठाया गया है।

भूख हड़ताल पर बैठे नेताओं ने कहा कि परीक्षार्थियों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। उनका कहना है कि जब तक परीक्षा व्यवस्था में नियमितता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

किन परीक्षाओं को लेकर है विरोध?
आइसा ने बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार कर्मचारी चयन आयोग, बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग, दरोगा भर्ती और शिक्षक भर्ती परीक्षा समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि अलग-अलग परीक्षाओं में समय-समय पर पेपर लीक, तकनीकी समस्याओं, प्रक्रिया में देरी और दूसरी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं।

आंदोलनकारियों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी करने वाले लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर केवल एक परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि अभ्यर्थियों का समय, पैसा और भविष्य भी प्रभावित होता है।

गर्दनीबाग में पहले से चल रहा है आंदोलन
इन मुद्दों को लेकर गर्दनीबाग धरना स्थल पर पहले से आंदोलन चल रहा है। आइसा नेताओं ने इसी आंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू करने का फैसला लिया है। संगठन का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी एक परीक्षा या भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद बनाने की मांग करना है।

आंदोलनकारियों ने कहा कि परीक्षार्थियों को परीक्षा की तारीख, प्रश्नपत्र, परिणाम और नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी समय पर मिलनी चाहिए। किसी भी स्तर पर देरी या अस्पष्टता से अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति पैदा होती है।

‘छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद हो’
आइसा नेताओं ने कहा कि बिहार के छात्र और युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कई साल लगा देते हैं। परिवार आर्थिक दबाव के बावजूद बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। ऐसे में अगर परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी होती है तो उसका असर केवल अभ्यर्थी पर नहीं, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है।

संगठन ने सरकार और संबंधित आयोगों से मांग की है कि परीक्षा से जुड़े मामलों में शिकायतों की गंभीरता से जांच हो और जहां भी जिम्मेदारी तय होती है, वहां कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं आए, इसके लिए परीक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए।

मीना तिवारी ने भूख हड़ताल की शुरुआत कराई
भूख हड़ताल की शुरुआत माकपा-माले की पोलित ब्यूरो सदस्य और अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ की महासचिव मीना तिवारी ने कराई। उन्होंने आंदोलनरत छात्रों के साथ एकजुटता जताई और भूख हड़ताल पर बैठे आइसा नेताओं का समर्थन किया।

इस दौरान उन्होंने कहा कि परीक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों पर युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। आंदोलनकारियों ने भी कहा कि यह संघर्ष केवल कुछ अभ्यर्थियों का मुद्दा नहीं है, बल्कि बिहार के उन लाखों युवाओं से जुड़ा है जो सरकारी नौकरी के लिए लगातार तैयारी कर रहे हैं।

परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
भूख हड़ताल के जरिए आइसा नेताओं ने मुख्य रूप से तीन मांगों पर जोर दिया है—जवाबदेही, नियमितता और पारदर्शिता। उनका कहना है कि परीक्षा कराने वाली संस्थाओं को अपनी प्रक्रिया के हर चरण में अभ्यर्थियों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।

आंदोलनकारियों के मुताबिक परीक्षा की घोषणा से लेकर परिणाम और नियुक्ति तक पूरी प्रक्रिया स्पष्ट और समयबद्ध होनी चाहिए। अगर किसी परीक्षा में तकनीकी या प्रशासनिक समस्या आती है तो आयोग को अभ्यर्थियों को उसकी सही जानकारी भी देनी चाहिए।

‘मेहनत करने वालों के साथ न्याय जरूरी’
आइसा नेताओं ने कहा कि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं की सबसे बड़ी उम्मीद निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था है। छात्र अपनी तैयारी के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं और कई बार एक ही परीक्षा के लिए वर्षों तक प्रयास करते हैं।

ऐसे में प्रश्नपत्र से जुड़ी गड़बड़ी, परीक्षा केंद्र पर तकनीकी परेशानी, परिणाम में देरी या भर्ती प्रक्रिया के लंबे समय तक अटके रहने से छात्रों में निराशा पैदा होती है। संगठन का कहना है कि सरकार को इन शिकायतों को केवल आंदोलन या विरोध के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इन्हें परीक्षा व्यवस्था में सुधार का संकेत मानना चाहिए।

बड़ी संख्या में छात्र और युवा पहुंचे
गर्दनीबाग धरना स्थल पर भूख हड़ताल के दौरान आइसा के कई नेता, छात्र कार्यकर्ता और आंदोलनकारी युवा मौजूद रहे। संगठन के बिहार राज्य सचिव दीपांकर, राज्य उपाध्यक्ष सबा आफ़रीन और पटना विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष नितीश सहित कई कार्यकर्ताओं ने भूख हड़ताल पर बैठे नेताओं के समर्थन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

धरना स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार और अभ्यर्थियों की शिकायतों का समाधान करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आंदोलन को आगे भी मजबूती के साथ जारी रखा जाएगा।

भर्ती प्रक्रिया में देरी का भी उठा मुद्दा
आइसा ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं के साथ-साथ नियुक्ति प्रक्रिया में होने वाली देरी पर भी सवाल उठाया। संगठन का कहना है कि परीक्षा पास करने के बाद भी अगर अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़े तो इसका सीधा असर उनकी उम्र, रोजगार के अवसर और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।

आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की कि भर्ती प्रक्रिया के हर चरण के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए और उसे सार्वजनिक किया जाए। इससे अभ्यर्थियों को यह पता रहेगा कि परीक्षा के बाद अगला चरण कब पूरा होना है।

आंदोलन लंबा चलने के संकेत
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू होने के बाद अब यह आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है, इस पर नजर रहेगी। आइसा ने साफ किया है कि जब तक परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

संगठन का कहना है कि छात्रों की मांगों को लेकर सरकार और संबंधित आयोगों को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए। वहीं आंदोलनकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर प्रदर्शन को और व्यापक किया जा सकता है।

‘जब तक पारदर्शिता नहीं, संघर्ष जारी रहेगा’
आइसा ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार केवल छात्रों की मांग नहीं, बल्कि निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के लिए जरूरी कदम है। संगठन के मुताबिक बिहार के युवाओं को ऐसी व्यवस्था चाहिए, जिसमें उन्हें अपनी मेहनत के आधार पर आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे।

आंदोलनरत नेताओं ने दोहराया कि “जब तक जवाबदेही, नियमितता और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।” अब सरकार और संबंधित आयोग इस आंदोलन को लेकर क्या कदम उठाते हैं, इस पर छात्र समुदाय की नजर रहेगी।

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प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ बड़ा कदम, गर्दनीबाग में AISA नेताओं ने शुरू की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

By Malay Ojha | Published: 23 August 2026 at 08:30 PM

बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे आंदोलन ने अब नया रूप ले लिया है। गर्दनीबाग धरना स्थल पर जारी प्रदर्शन के समर्थन में आइसा के तीन नेताओं ने रविवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। संगठन ने बीपीएससी, बीएसएससी, बीपीएसएससी, दरोगा भर्ती और शिक्षक भर्ती परीक्षा सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई है।

आइसा बिहार की राज्य उपाध्यक्ष मनीषा, राज्य उपाध्यक्ष सोनू फर्नाज़ और पटना विश्वविद्यालय इकाई के सचिव आदर्श भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह कदम सरकार और संबंधित भर्ती आयोगों पर परीक्षा प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही तय करने का दबाव बनाने के लिए उठाया गया है।

भूख हड़ताल पर बैठे नेताओं ने कहा कि परीक्षार्थियों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। उनका कहना है कि जब तक परीक्षा व्यवस्था में नियमितता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

किन परीक्षाओं को लेकर है विरोध?
आइसा ने बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार कर्मचारी चयन आयोग, बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग, दरोगा भर्ती और शिक्षक भर्ती परीक्षा समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि अलग-अलग परीक्षाओं में समय-समय पर पेपर लीक, तकनीकी समस्याओं, प्रक्रिया में देरी और दूसरी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं।

आंदोलनकारियों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी करने वाले लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर केवल एक परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि अभ्यर्थियों का समय, पैसा और भविष्य भी प्रभावित होता है।

गर्दनीबाग में पहले से चल रहा है आंदोलन
इन मुद्दों को लेकर गर्दनीबाग धरना स्थल पर पहले से आंदोलन चल रहा है। आइसा नेताओं ने इसी आंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू करने का फैसला लिया है। संगठन का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी एक परीक्षा या भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद बनाने की मांग करना है।

आंदोलनकारियों ने कहा कि परीक्षार्थियों को परीक्षा की तारीख, प्रश्नपत्र, परिणाम और नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी समय पर मिलनी चाहिए। किसी भी स्तर पर देरी या अस्पष्टता से अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति पैदा होती है।

‘छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद हो’
आइसा नेताओं ने कहा कि बिहार के छात्र और युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कई साल लगा देते हैं। परिवार आर्थिक दबाव के बावजूद बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। ऐसे में अगर परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी होती है तो उसका असर केवल अभ्यर्थी पर नहीं, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है।

संगठन ने सरकार और संबंधित आयोगों से मांग की है कि परीक्षा से जुड़े मामलों में शिकायतों की गंभीरता से जांच हो और जहां भी जिम्मेदारी तय होती है, वहां कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं आए, इसके लिए परीक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए।

मीना तिवारी ने भूख हड़ताल की शुरुआत कराई
भूख हड़ताल की शुरुआत माकपा-माले की पोलित ब्यूरो सदस्य और अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ की महासचिव मीना तिवारी ने कराई। उन्होंने आंदोलनरत छात्रों के साथ एकजुटता जताई और भूख हड़ताल पर बैठे आइसा नेताओं का समर्थन किया।

इस दौरान उन्होंने कहा कि परीक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों पर युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। आंदोलनकारियों ने भी कहा कि यह संघर्ष केवल कुछ अभ्यर्थियों का मुद्दा नहीं है, बल्कि बिहार के उन लाखों युवाओं से जुड़ा है जो सरकारी नौकरी के लिए लगातार तैयारी कर रहे हैं।

परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
भूख हड़ताल के जरिए आइसा नेताओं ने मुख्य रूप से तीन मांगों पर जोर दिया है—जवाबदेही, नियमितता और पारदर्शिता। उनका कहना है कि परीक्षा कराने वाली संस्थाओं को अपनी प्रक्रिया के हर चरण में अभ्यर्थियों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।

आंदोलनकारियों के मुताबिक परीक्षा की घोषणा से लेकर परिणाम और नियुक्ति तक पूरी प्रक्रिया स्पष्ट और समयबद्ध होनी चाहिए। अगर किसी परीक्षा में तकनीकी या प्रशासनिक समस्या आती है तो आयोग को अभ्यर्थियों को उसकी सही जानकारी भी देनी चाहिए।

‘मेहनत करने वालों के साथ न्याय जरूरी’
आइसा नेताओं ने कहा कि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं की सबसे बड़ी उम्मीद निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था है। छात्र अपनी तैयारी के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं और कई बार एक ही परीक्षा के लिए वर्षों तक प्रयास करते हैं।

ऐसे में प्रश्नपत्र से जुड़ी गड़बड़ी, परीक्षा केंद्र पर तकनीकी परेशानी, परिणाम में देरी या भर्ती प्रक्रिया के लंबे समय तक अटके रहने से छात्रों में निराशा पैदा होती है। संगठन का कहना है कि सरकार को इन शिकायतों को केवल आंदोलन या विरोध के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इन्हें परीक्षा व्यवस्था में सुधार का संकेत मानना चाहिए।

बड़ी संख्या में छात्र और युवा पहुंचे
गर्दनीबाग धरना स्थल पर भूख हड़ताल के दौरान आइसा के कई नेता, छात्र कार्यकर्ता और आंदोलनकारी युवा मौजूद रहे। संगठन के बिहार राज्य सचिव दीपांकर, राज्य उपाध्यक्ष सबा आफ़रीन और पटना विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष नितीश सहित कई कार्यकर्ताओं ने भूख हड़ताल पर बैठे नेताओं के समर्थन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

धरना स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार और अभ्यर्थियों की शिकायतों का समाधान करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आंदोलन को आगे भी मजबूती के साथ जारी रखा जाएगा।

भर्ती प्रक्रिया में देरी का भी उठा मुद्दा
आइसा ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं के साथ-साथ नियुक्ति प्रक्रिया में होने वाली देरी पर भी सवाल उठाया। संगठन का कहना है कि परीक्षा पास करने के बाद भी अगर अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़े तो इसका सीधा असर उनकी उम्र, रोजगार के अवसर और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।

आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की कि भर्ती प्रक्रिया के हर चरण के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए और उसे सार्वजनिक किया जाए। इससे अभ्यर्थियों को यह पता रहेगा कि परीक्षा के बाद अगला चरण कब पूरा होना है।

आंदोलन लंबा चलने के संकेत
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू होने के बाद अब यह आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है, इस पर नजर रहेगी। आइसा ने साफ किया है कि जब तक परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

संगठन का कहना है कि छात्रों की मांगों को लेकर सरकार और संबंधित आयोगों को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए। वहीं आंदोलनकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर प्रदर्शन को और व्यापक किया जा सकता है।

‘जब तक पारदर्शिता नहीं, संघर्ष जारी रहेगा’
आइसा ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार केवल छात्रों की मांग नहीं, बल्कि निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया के लिए जरूरी कदम है। संगठन के मुताबिक बिहार के युवाओं को ऐसी व्यवस्था चाहिए, जिसमें उन्हें अपनी मेहनत के आधार पर आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे।

आंदोलनरत नेताओं ने दोहराया कि “जब तक जवाबदेही, नियमितता और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।” अब सरकार और संबंधित आयोग इस आंदोलन को लेकर क्या कदम उठाते हैं, इस पर छात्र समुदाय की नजर रहेगी।

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