By aryavartalive | Published: 12 August 2026 at 09:27 PM
नई दिल्ली: देश में सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने के मुद्दे पर सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने कहा है कि सरकारी स्कूल बंद करने के बजाय उनमें बुनियादी सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया जाना चाहिए। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि बंद किए गए स्कूलों को फिर से खोलने और सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वह इस मुद्दे को देशव्यापी जन आंदोलन का रूप देगी।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) की केंद्रीय संसदीय समिति के अध्यक्ष सैयद तहसीन अहमद ने बुधवार को कहा कि सरकारी स्कूल गरीब, मध्यम वर्ग, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अन्य वंचित वर्गों के बच्चों के लिए शिक्षा के अधिकार की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। ऐसे स्कूलों को बंद करना या लगातार उपेक्षा के कारण कमजोर करना समाज के कमजोर तबके के बच्चों के शैक्षणिक अवसरों को सीमित करने जैसा है।
स्कूल बंद करने के बजाय सुविधाएं बढ़ाने की मांग
सैयद तहसीन अहमद ने सरकार से सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने, शिक्षकों के खाली पद भरने, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और आधुनिक संसाधन व तकनीक उपलब्ध कराने की मांग की। पार्टी का कहना है कि सरकारी स्कूलों को ऐसे गुणवत्तापूर्ण संस्थानों में बदला जाना चाहिए, जहां हर बच्चे को बिना भेदभाव बेहतर शिक्षा मिल सके।
उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों की लगातार बंदी से सामाजिक असमानता बढ़ सकती है। इससे गरीब और अमीर बच्चों के बीच शिक्षा का अंतर बढ़ने, स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में इजाफा होने और शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा मिलने का खतरा है।
उर्दू समेत भारतीय भाषाओं को लेकर भी चिंता
सैयद तहसीन अहमद ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया। पार्टी ने खास तौर पर उर्दू समेत भारतीय भाषाओं के संरक्षण, विकास और शिक्षण के लिए सरकारी स्कूलों को मजबूत बनाए रखने की मांग की है।
पार्टी के अनुसार, यदि सरकारी स्कूलों की संख्या लगातार कम होती गई और शिक्षा बड़े पैमाने पर निजी संस्थानों के हवाले हो गई तो गरीब परिवारों के पास अपनी भाषा और शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप विकल्प सीमित हो सकते हैं।
‘असंवैधानिक गतिविधियों का विरोध हो, स्कूल बंद करना समाधान नहीं’
सैयद तहसीन अहमद ने कहा कि यदि किसी सरकारी स्कूल में किसी खास विचारधारा, धार्मिक पक्षपात या असंवैधानिक प्रवृत्ति को थोपने की कोशिश होती है तो उसका लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से विरोध किया जाना चाहिए। हालांकि, पार्टी का कहना है कि इसका समाधान सरकारी स्कूलों को बंद करना नहीं, बल्कि उन्हें संविधान के धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और समानता के सिद्धांतों के अनुरूप मजबूत करना है।
पार्टी ने कहा कि मुस्लिम, उर्दू भाषी और अन्य कमजोर वर्गों के लिए सरकारी स्कूल शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं और वे देशभर में वैकल्पिक शिक्षा व्यवस्था खड़ी करने की स्थिति में नहीं हैं। निजी और सामुदायिक संस्थानों की अपनी भूमिका हो सकती है, लेकिन वे करोड़ों बच्चों की शिक्षा की जरूरत पूरी नहीं कर सकते।
सरकार से स्कूल दोबारा खोलने की मांग
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने सरकार से बंद किए गए सरकारी स्कूलों को फिर से खोलने, मौजूदा स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार करने, शिक्षकों के सभी खाली पद भरने और गरीब व वंचित वर्गों के बच्चों के लिए सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है।
इसके अलावा पार्टी ने स्कूलों में संवैधानिक, धर्मनिरपेक्ष, वैज्ञानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा तथा उर्दू समेत सभी भारतीय भाषाओं के विकास और शिक्षण की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
पार्टी ने कहा कि यदि सरकार ने इन मांगों पर तत्काल ध्यान नहीं दिया तो सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) सरकारी स्कूलों की रक्षा, शिक्षा के अधिकार और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर देशव्यापी जन आंदोलन शुरू करेगी। पार्टी ने शिक्षकों, छात्रों, अभिभावकों, शिक्षा विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत सभी लोकतांत्रिक एवं सामाजिक न्याय की पक्षधर ताकतों से इस अभियान में एकजुट होने की अपील की है।
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