By Malay Ojha | Published: 29 June 2026 at 07:41 PM
विकासशील इंसान पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि शाहजहांपुर और सहारनपुर में प्रस्तावित राजनीतिक कार्यक्रमों से पहले उन्हें उनके आवास पर ही नजरबंद कर दिया गया। सहनी का कहना है कि पुलिस ने बिना किसी कानूनी आदेश के उनके घर को चारों तरफ से घेर लिया और बाहर निकलने तक की अनुमति नहीं दी।
मुकेश सहनी के मुताबिक, रविवार रात करीब आठ बजे से ही बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी उनके आवास के बाहर तैनात कर दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सोमवार को उन्हें शाहजहांपुर और सहारनपुर में पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल होना था, लेकिन उससे पहले ही प्रशासन ने उनकी आवाजाही पर रोक लगा दी।
कानूनी आधार नहीं बताया गया
वीआईपी प्रमुख ने कहा कि अब तक उन्हें यह नहीं बताया गया है कि आखिर किस कानून के तहत उन्हें घर से बाहर निकलने से रोका गया है। प्रशासन की ओर से सिर्फ यह कहा जा रहा है कि उनके कार्यक्रम से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। सहनी ने सवाल उठाया कि अगर कोई नेता अपने समर्थकों से मिलने भी नहीं जा सकता, तो लोकतांत्रिक अधिकारों का क्या मतलब रह जाता है।
वीजा-पासपोर्ट वाले बयान से साधा निशाना
मुकेश सहनी ने इस कार्रवाई पर तंज कसते हुए कहा कि अगर उत्तर प्रदेश भारत का हिस्सा नहीं है, तो सरकार पहले ही बता देती। वह अगली बार वीजा और पासपोर्ट लेकर आते। उनका यह बयान अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
‘अघोषित आपातकाल’ जैसी स्थिति का आरोप
पूर्व मंत्री ने कहा कि प्रदेश में ऐसी स्थिति पैदा कर दी गई है, जो अघोषित आपातकाल जैसी दिखाई देती है। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है और विपक्षी नेताओं को जनता के बीच जाने से रोका जा रहा है।
निषाद आरक्षण की मांग को दबाने का आरोप
सहनी ने कहा कि वह लंबे समय से निषाद, मल्लाह, बिंद और कश्यप समाज को आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इसी आंदोलन की आवाज को दबाने के लिए उन्हें रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब देश के कुछ राज्यों में इन समुदायों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है, तो उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे लागू करने में सरकार को आपत्ति क्यों है।
घर से बाहर निकलने तक की नहीं मिली अनुमति
वीआईपी प्रमुख ने दावा किया कि उनके आवास के बाहर इतनी सख्ती कर दी गई कि न कोई वाहन बाहर जा सका और न ही कोई व्यक्ति अंदर-बाहर आ पाया। उन्होंने यह भी कहा कि रविवार रात भोजन के लिए बाहर निकलने की अनुमति तक नहीं दी गई।
‘मैं कोई अपराधी नहीं हूं’
मुकेश सहनी ने कहा कि वह कोई आतंकवादी, माओवादी या अपराधी नहीं हैं, जिनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि उनकी पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से संगठन का विस्तार कर रही है और समाज के संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है।
संघर्ष जारी रखने का किया ऐलान
पूर्व मंत्री ने साफ कहा कि चाहे उन्हें रोका जाए या जेल भेज दिया जाए, वह अपने समाज और समर्थकों के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि वह अपने तय कार्यक्रमों में जाने की कोशिश करेंगे और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
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