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आतंकियों पर मुकदमे वापस लेने वाले जवाब दें’! ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को 2013 की याद दिलाकर साधा बड़ा निशाना

By Malay Ojha | Published: 06 June 2026 at 06:52 PM

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए वर्ष 2013 के एक पुराने मामले को उठाया है। राजभर ने सामाजिक माध्यम पर पोस्ट साझा कर आतंकवाद से जुड़े मामलों में तत्कालीन समाजवादी सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए और अखिलेश यादव को पुराने फैसलों की याद दिलाई।

लोकसभा चुनाव के बाद से प्रदेश की राजनीति में लगातार बयानबाजी देखने को मिल रही है। इसी क्रम में ओम प्रकाश राजभर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक लंबा संदेश साझा किया। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह हमेशा की तरह बेफिक्र और व्यस्त होंगे, लेकिन आज की तारीख उन्हें एक पुराने विवाद की याद दिलाने के लिए पर्याप्त है।

2013 के फैसले का किया जिक्र
राजभर ने अपने संदेश में वर्ष 2013 की उस घटना का उल्लेख किया जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आतंकवाद से जुड़े मामलों में तत्कालीन सरकार के फैसले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया कि उस समय अदालत ने सरकार से जवाब मांगा था और मामले को गंभीरता से लिया था।

पोस्ट में क्या लिखा?
राजभर ने अपने संदेश के साथ एक पुरानी खबर का चित्र भी साझा किया। उन्होंने लिखा कि उस खबर को पढ़ने के बाद समाजवादी पार्टी नेतृत्व को अपने पुराने फैसलों की याद आ जाएगी। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भविष्य में चुनावी हार का ठीकरा किसी अन्य व्यवस्था पर नहीं फोड़ा जा सकेगा।

समर्थकों और विरोधियों को भी दिया जवाब
अपने पोस्ट में राजभर ने समाजवादी पार्टी के समर्थकों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी नेतृत्व का बचाव करते हैं, उन्हें भी पुराने घटनाक्रमों को समझना चाहिए। उनका कहना था कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अपने नेताओं के फैसलों के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

आखिर कौन सा मामला उठा रहे हैं राजभर?
राजभर ने जिस खबर का उल्लेख किया, वह वर्ष 2007 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों से जुड़ी बताई जा रही है। उस समय लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद में हुए धमाकों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। इन घटनाओं में कई लोगों की जान गई थी जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।

अदालत की टिप्पणी का हवाला
राजभर द्वारा साझा किए गए स्क्रीनशॉट में दावा किया गया कि आतंकवाद के आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने के फैसले पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन सरकार से जवाब मांगा था। अदालत ने सरकार से संबंधित आरोपियों की सूची उपलब्ध कराने को भी कहा था।

चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी तल्खी
प्रदेश में विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो चुका है। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों एक-दूसरे के पुराने फैसलों और बयानों को जनता के सामने रखकर राजनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

पुराने मुद्दों को फिर से जिंदा करने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, वैसे-वैसे पुराने विवाद और फैसले फिर चर्चा में लाए जाएंगे। राजभर का यह बयान भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें विपक्षी दलों के पिछले कार्यकाल के फैसलों को जनता के सामने रखा जा रहा है।

समाजवादी पार्टी की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार
राजभर के इस हमले के बाद अब निगाहें समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। अभी तक पार्टी नेतृत्व की ओर से इस मामले में कोई औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

आगे क्या?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बयानबाजी और तेज हो सकती है। प्रदेश की राजनीति में पुराने मामलों को लेकर एक बार फिर बहस शुरू होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि समाजवादी पार्टी इस हमले का क्या जवाब देती है और यह विवाद आगे किस दिशा में बढ़ता है।

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आतंकियों पर मुकदमे वापस लेने वाले जवाब दें’! ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को 2013 की याद दिलाकर साधा बड़ा निशाना

By Malay Ojha | Published: 06 June 2026 at 06:52 PM

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए वर्ष 2013 के एक पुराने मामले को उठाया है। राजभर ने सामाजिक माध्यम पर पोस्ट साझा कर आतंकवाद से जुड़े मामलों में तत्कालीन समाजवादी सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए और अखिलेश यादव को पुराने फैसलों की याद दिलाई।

लोकसभा चुनाव के बाद से प्रदेश की राजनीति में लगातार बयानबाजी देखने को मिल रही है। इसी क्रम में ओम प्रकाश राजभर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक लंबा संदेश साझा किया। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वह हमेशा की तरह बेफिक्र और व्यस्त होंगे, लेकिन आज की तारीख उन्हें एक पुराने विवाद की याद दिलाने के लिए पर्याप्त है।

2013 के फैसले का किया जिक्र
राजभर ने अपने संदेश में वर्ष 2013 की उस घटना का उल्लेख किया जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आतंकवाद से जुड़े मामलों में तत्कालीन सरकार के फैसले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया कि उस समय अदालत ने सरकार से जवाब मांगा था और मामले को गंभीरता से लिया था।

पोस्ट में क्या लिखा?
राजभर ने अपने संदेश के साथ एक पुरानी खबर का चित्र भी साझा किया। उन्होंने लिखा कि उस खबर को पढ़ने के बाद समाजवादी पार्टी नेतृत्व को अपने पुराने फैसलों की याद आ जाएगी। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भविष्य में चुनावी हार का ठीकरा किसी अन्य व्यवस्था पर नहीं फोड़ा जा सकेगा।

समर्थकों और विरोधियों को भी दिया जवाब
अपने पोस्ट में राजभर ने समाजवादी पार्टी के समर्थकों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी नेतृत्व का बचाव करते हैं, उन्हें भी पुराने घटनाक्रमों को समझना चाहिए। उनका कहना था कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अपने नेताओं के फैसलों के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

आखिर कौन सा मामला उठा रहे हैं राजभर?
राजभर ने जिस खबर का उल्लेख किया, वह वर्ष 2007 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों से जुड़ी बताई जा रही है। उस समय लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद में हुए धमाकों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। इन घटनाओं में कई लोगों की जान गई थी जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।

अदालत की टिप्पणी का हवाला
राजभर द्वारा साझा किए गए स्क्रीनशॉट में दावा किया गया कि आतंकवाद के आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने के फैसले पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन सरकार से जवाब मांगा था। अदालत ने सरकार से संबंधित आरोपियों की सूची उपलब्ध कराने को भी कहा था।

चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी तल्खी
प्रदेश में विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो चुका है। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों एक-दूसरे के पुराने फैसलों और बयानों को जनता के सामने रखकर राजनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

पुराने मुद्दों को फिर से जिंदा करने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, वैसे-वैसे पुराने विवाद और फैसले फिर चर्चा में लाए जाएंगे। राजभर का यह बयान भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें विपक्षी दलों के पिछले कार्यकाल के फैसलों को जनता के सामने रखा जा रहा है।

समाजवादी पार्टी की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार
राजभर के इस हमले के बाद अब निगाहें समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। अभी तक पार्टी नेतृत्व की ओर से इस मामले में कोई औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

आगे क्या?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बयानबाजी और तेज हो सकती है। प्रदेश की राजनीति में पुराने मामलों को लेकर एक बार फिर बहस शुरू होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि समाजवादी पार्टी इस हमले का क्या जवाब देती है और यह विवाद आगे किस दिशा में बढ़ता है।

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