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3 महीने की गर्भावस्था बनी जानलेवा, बच्चेदानी फटने के बाद पटना के डॉक्टरों ने इमरजेंसी सर्जरी कर बचाई युवती की जान

By Malay Ojha | Published: 11 July 2026 at 02:47 PM

जहानाबाद की 21 वर्षीय एक युवती की जान उस समय मुश्किल में पड़ गई, जब तीन महीने की गर्भावस्था के दौरान उसकी बच्चेदानी अचानक फट गई और पेट के भीतर करीब दो लीटर खून जमा हो गया। हालत इतनी गंभीर थी कि अस्पताल पहुंचते-पहुंचते उसका हीमोग्लोबिन भी काफी नीचे जा चुका था। समय रहते पटना के फोर्ड हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने इमरजेंसी सर्जरी कर उसकी जान बचा ली। चिकित्सकों के अनुसार यह मामला बेहद दुर्लभ और जानलेवा स्कार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का था।

अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार मरीज को बेहद नाजुक हालत में भर्ती कराया गया था। जांच में पता चला कि गर्भाशय पहले ही फट चुका था और लगातार अंदरूनी रक्तस्राव हो रहा था। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बिना देर किए ऑपरेशन का फैसला लिया। सर्जरी के दौरान रक्तस्राव पर नियंत्रण पाया गया और गर्भाशय की गंभीर क्षति का इलाज किया गया। समय पर उपचार मिलने से युवती की जान बचाई जा सकी।

डॉक्टरों की टीम ने संभाली पूरी जिम्मेदारी
इस जटिल ऑपरेशन को फोर्ड हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. जागृति भारद्वाज, डॉ. अनिता और जनरल सर्जन डॉ. प्रभात रंजन की टीम ने मिलकर सफलतापूर्वक पूरा किया। अस्पताल के अनुसार मरीज की हालत अब पहले से बेहतर है और वह चिकित्सकीय निगरानी में स्वस्थ हो रही है।

क्या होती है स्कार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी?
डॉ. जागृति भारद्वाज ने बताया कि स्कार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी सामान्य गर्भावस्था से बिल्कुल अलग और अत्यंत दुर्लभ स्थिति होती है। इसमें भ्रूण गर्भाशय के सामान्य हिस्से में विकसित होने के बजाय पहले हुए सिजेरियन ऑपरेशन के निशान वाले हिस्से में जाकर विकसित होने लगता है। यही कारण है कि जैसे-जैसे गर्भ बढ़ता है, गर्भाशय के फटने और अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

किन महिलाओं में ज्यादा रहता है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार जिन महिलाओं का पहला या पिछला प्रसव सिजेरियन ऑपरेशन से हुआ हो, उनमें इस तरह की जटिलता होने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक रहती है। हालांकि यह बीमारी बहुत कम मामलों में सामने आती है, लेकिन समय पर पहचान न होने पर यह जानलेवा साबित हो सकती है। कई बार मरीज को अचानक तेज पेट दर्द, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना या अंदरूनी रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

शुरुआती जांच से टल सकता है बड़ा खतरा
डॉक्टरों का कहना है कि गर्भधारण की शुरुआती अवस्था में अल्ट्रासाउंड जांच कराना बेहद जरूरी है, खासकर उन महिलाओं के लिए जिनका पहले सिजेरियन ऑपरेशन हो चुका है। शुरुआती जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि भ्रूण सही स्थान पर विकसित हो रहा है या नहीं। यदि समय रहते इस समस्या की पहचान हो जाए तो गंभीर जटिलताओं और जान के खतरे से बचा जा सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह को नजरअंदाज न करें
स्त्री रोग विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह के असामान्य दर्द, रक्तस्राव या कमजोरी को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने से मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

यह मामला क्यों बना चर्चा का विषय?
चिकित्सकों के अनुसार स्कार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के मामले बेहद कम देखने को मिलते हैं, लेकिन जब ऐसा होता है तो कुछ ही घंटों में मरीज की जान पर बन सकती है। जहानाबाद की इस युवती के मामले में समय पर अस्पताल पहुंचना और डॉक्टरों द्वारा तुरंत लिया गया फैसला उसकी जिंदगी बचाने में सबसे बड़ा कारण साबित हुआ।

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3 महीने की गर्भावस्था बनी जानलेवा, बच्चेदानी फटने के बाद पटना के डॉक्टरों ने इमरजेंसी सर्जरी कर बचाई युवती की जान

By Malay Ojha | Published: 11 July 2026 at 02:47 PM

जहानाबाद की 21 वर्षीय एक युवती की जान उस समय मुश्किल में पड़ गई, जब तीन महीने की गर्भावस्था के दौरान उसकी बच्चेदानी अचानक फट गई और पेट के भीतर करीब दो लीटर खून जमा हो गया। हालत इतनी गंभीर थी कि अस्पताल पहुंचते-पहुंचते उसका हीमोग्लोबिन भी काफी नीचे जा चुका था। समय रहते पटना के फोर्ड हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने इमरजेंसी सर्जरी कर उसकी जान बचा ली। चिकित्सकों के अनुसार यह मामला बेहद दुर्लभ और जानलेवा स्कार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का था।

अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार मरीज को बेहद नाजुक हालत में भर्ती कराया गया था। जांच में पता चला कि गर्भाशय पहले ही फट चुका था और लगातार अंदरूनी रक्तस्राव हो रहा था। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बिना देर किए ऑपरेशन का फैसला लिया। सर्जरी के दौरान रक्तस्राव पर नियंत्रण पाया गया और गर्भाशय की गंभीर क्षति का इलाज किया गया। समय पर उपचार मिलने से युवती की जान बचाई जा सकी।

डॉक्टरों की टीम ने संभाली पूरी जिम्मेदारी
इस जटिल ऑपरेशन को फोर्ड हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. जागृति भारद्वाज, डॉ. अनिता और जनरल सर्जन डॉ. प्रभात रंजन की टीम ने मिलकर सफलतापूर्वक पूरा किया। अस्पताल के अनुसार मरीज की हालत अब पहले से बेहतर है और वह चिकित्सकीय निगरानी में स्वस्थ हो रही है।

क्या होती है स्कार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी?
डॉ. जागृति भारद्वाज ने बताया कि स्कार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी सामान्य गर्भावस्था से बिल्कुल अलग और अत्यंत दुर्लभ स्थिति होती है। इसमें भ्रूण गर्भाशय के सामान्य हिस्से में विकसित होने के बजाय पहले हुए सिजेरियन ऑपरेशन के निशान वाले हिस्से में जाकर विकसित होने लगता है। यही कारण है कि जैसे-जैसे गर्भ बढ़ता है, गर्भाशय के फटने और अत्यधिक रक्तस्राव का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

किन महिलाओं में ज्यादा रहता है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार जिन महिलाओं का पहला या पिछला प्रसव सिजेरियन ऑपरेशन से हुआ हो, उनमें इस तरह की जटिलता होने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक रहती है। हालांकि यह बीमारी बहुत कम मामलों में सामने आती है, लेकिन समय पर पहचान न होने पर यह जानलेवा साबित हो सकती है। कई बार मरीज को अचानक तेज पेट दर्द, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना या अंदरूनी रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

शुरुआती जांच से टल सकता है बड़ा खतरा
डॉक्टरों का कहना है कि गर्भधारण की शुरुआती अवस्था में अल्ट्रासाउंड जांच कराना बेहद जरूरी है, खासकर उन महिलाओं के लिए जिनका पहले सिजेरियन ऑपरेशन हो चुका है। शुरुआती जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि भ्रूण सही स्थान पर विकसित हो रहा है या नहीं। यदि समय रहते इस समस्या की पहचान हो जाए तो गंभीर जटिलताओं और जान के खतरे से बचा जा सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह को नजरअंदाज न करें
स्त्री रोग विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह के असामान्य दर्द, रक्तस्राव या कमजोरी को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने से मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

यह मामला क्यों बना चर्चा का विषय?
चिकित्सकों के अनुसार स्कार एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के मामले बेहद कम देखने को मिलते हैं, लेकिन जब ऐसा होता है तो कुछ ही घंटों में मरीज की जान पर बन सकती है। जहानाबाद की इस युवती के मामले में समय पर अस्पताल पहुंचना और डॉक्टरों द्वारा तुरंत लिया गया फैसला उसकी जिंदगी बचाने में सबसे बड़ा कारण साबित हुआ।

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