By Malay Ojha | Published: 21 June 2026 at 07:48 PM
देश और विदेश के हजारों परीक्षा केंद्रों पर आयोजित री-नीट परीक्षा रविवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हो गई। 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, लेकिन परीक्षा खत्म होते-होते कई विवाद और शिकायतें भी सामने आ गईं। कहीं छात्र कुछ मिनट की देरी के कारण परीक्षा से वंचित रह गए तो कहीं कलावा और हिजाब को लेकर परीक्षा केंद्रों पर बहस छिड़ गई। यही घटनाएं परीक्षा के बाद सबसे बड़ी चर्चा का विषय बन गई हैं।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की ओर से इस बार परीक्षा को लेकर अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। देश के 551 शहरों समेत विदेश के 14 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा दोपहर दो बजे शुरू होकर शाम पांच बजकर पंद्रह मिनट तक चली। परीक्षा की निगरानी के लिए बड़े स्तर पर तकनीकी और मानव संसाधनों की तैनाती की गई थी।
22 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा
इस बार परीक्षा में 22 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए। परीक्षा के लिए 5,440 केंद्र बनाए गए थे और करीब 95 हजार कमरों में अभ्यर्थियों को बैठाया गया। परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक लाख से अधिक कैमरों के जरिए लगातार निगरानी रखी गई। अधिकारियों का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक सख्त और व्यापक थी।
शिक्षा मंत्री भी रख रहे थे नजर
परीक्षा के दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। विभिन्न केंद्रों की गतिविधियों पर नियंत्रण कक्ष के माध्यम से निगरानी रखी गई। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी या नकल की आशंका को रोकने के लिए हर स्तर पर सतर्कता बरती गई।
नकल रोकने के लिए किए गए विशेष इंतजाम
परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से होने वाली नकल पर रोक लगाने के लिए हजारों जैमर लगाए गए थे। इसके अलावा बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों, जांच कर्मियों और बायोमेट्रिक सत्यापन टीमों की तैनाती की गई थी। अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए प्रवेश द्वारों पर कई चरणों में जांच की गई।
समय पर नहीं पहुंचे तो छूट गई परीक्षा
सख्त नियमों के कारण कई छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा। परीक्षा एजेंसी के नियम के अनुसार दोपहर डेढ़ बजे के बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश की अनुमति नहीं थी। ऐसे में कुछ छात्र मामूली देरी की वजह से परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के बावजूद अंदर नहीं जा सके।
छात्रा के परिवार ने लगाए आरोप
एक छात्रा के परिजनों ने दावा किया कि वह निर्धारित समय से कुछ मिनट पहले केंद्र पहुंच गई थी, लेकिन तब तक प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए थे। परिवार का कहना है कि परीक्षा में बैठने की अनुमति न मिलने से छात्रा को भारी मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई।
सड़क हादसे के कारण छूटी परीक्षा
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी ऐसा ही मामला सामने आया। यहां दो अभ्यर्थियों को देर से पहुंचने के कारण परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिला। एक छात्र के परिजन ने बताया कि परीक्षा केंद्र जाते समय सड़क दुर्घटना हो गई थी। प्राथमिक उपचार में समय लगने के कारण वे निर्धारित समय पर नहीं पहुंच सके और छात्र परीक्षा देने से वंचित रह गया।
कलावा और हिजाब को लेकर बढ़ा विवाद
परीक्षा के दौरान अहमदाबाद के एक केंद्र से धार्मिक प्रतीकों को लेकर विवाद की खबर सामने आई। कुछ अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि प्रवेश से पहले उनके हाथों में बंधे कलावे हटवाए गए। वहीं कुछ छात्राओं से हिजाब हटाने को भी कहा गया। इस घटना के बाद परीक्षा केंद्र के बाहर बहस और नाराजगी का माहौल बन गया।
पहले किए गए थे बड़े दावे
परीक्षा से पहले अधिकारियों की ओर से कहा गया था कि अभ्यर्थियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाएगा और सुरक्षा जांच के दौरान संवेदनशीलता बरती जाएगी। लेकिन परीक्षा केंद्रों से आई शिकायतों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि इस मामले में अभी तक संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
परीक्षा के बाद भी जारी है चर्चा
परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के बावजूद कई घटनाएं चर्चा में बनी हुई हैं। सुरक्षा व्यवस्था की सराहना के साथ-साथ प्रवेश नियमों और धार्मिक प्रतीकों को लेकर उठे सवाल अब बहस का विषय बन गए हैं। आने वाले दिनों में इन मामलों पर एजेंसी और प्रशासन का रुख क्या रहता है, इस पर सभी की नजर टिकी रहेगी।
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