By Malay Ojha | Published: 25 June 2026 at 06:45 PM
हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए आने वाले दिनों में बड़ी राहत की उम्मीद बन गई है। केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि अगर कच्चे तेल और विमान ईंधन (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो एयरलाइंस से बढ़े हुए किराए और अतिरिक्त शुल्क की समीक्षा कराई जा सकती है। इससे हवाई टिकटों की कीमतों में कमी आने की संभावना बढ़ गई है।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने कहा है कि सरकार लगातार विमान ईंधन की कीमतों पर नजर रख रही है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर कच्चे तेल और विमान ईंधन की कीमतों में स्थिरता बनी रहती है, तो एयरलाइंस से बढ़ाए गए किराए और अतिरिक्त शुल्क की समीक्षा करवाई जा सकती है।
मंत्री के इस बयान के बाद हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों में उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में टिकट सस्ते हो सकते हैं।
ईंधन की कीमतों पर सरकार की नजर
सरकार का कहना है कि हाल के दिनों में विमान ईंधन की कीमतों में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन यह देखना जरूरी है कि यह गिरावट स्थायी है या नहीं। इसी वजह से सरकार जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला नहीं लेना चाहती।
नियमित रूप से सरकार हर पंद्रह दिन में वैश्विक बाजार के हिसाब से ईंधन कीमतों की समीक्षा करती है। क्योंकि यही वह सबसे बड़ा खर्च है, जो एयरलाइंस के टिकटों को सीधे प्रभावित करता है।
एयरलाइंस पर बढ़ते खर्च का दबाव
पिछले कुछ महीनों में विमानन क्षेत्र पर काफी दबाव देखा गया है। ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों और संचालन लागत में वृद्धि के कारण एयरलाइंस ने कई रूटों पर अतिरिक्त शुल्क और महंगे किराए लागू किए थे।
सरकार अब यह आकलन कर रही है कि क्या इन बढ़े हुए किराए को कम किया जा सकता है और यात्रियों को राहत दी जा सकती है।
वैश्विक हालात का असर
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर सीधे विमानन क्षेत्र पर पड़ता है। इसी वजह से सरकार ने एयरलाइंस को कुछ राहत देने के लिए कई कदम भी उठाए हैं।
इनमें विमान ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण, एयरपोर्ट शुल्क में राहत और इमरजेंसी क्रेडिट सहायता जैसी योजनाएं शामिल हैं।
यात्रियों को कब मिलेगी राहत?
सरकार का कहना है कि जैसे ही ईंधन की कीमतों में स्थायी स्थिरता के संकेत मिलेंगे, एयरलाइंस के साथ बातचीत कर किराए में कमी पर फैसला लिया जाएगा। इसका सीधा फायदा हवाई यात्रियों को मिल सकता है।
हालांकि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन संकेत साफ हैं कि सरकार कीमतों को नियंत्रित रखने की दिशा में काम कर रही है।
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