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परीक्षा से पहले WhatsApp पर पहुंच गया पेपर! उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में हड़कंप, आरोपी शिक्षक गिरफ्तार

By Malay Ojha | Published: 23 July 2026 at 06:02 PM

उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में प्रश्नपत्र लीक होने के मामले ने छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच हड़कंप मचा दिया है। जांच में पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद विश्वविद्यालय ने 8 जुलाई को हुई परीक्षा को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही 24 जून को हुई इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विषय की परीक्षा भी दोबारा कराने का फैसला लिया गया है। मामले में शिवालिक कॉलेज के सहायक प्रोफेसर आशीष गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है।

मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक जांच समिति का गठन किया था। समिति ने शिकायत से जुड़े तथ्यों की जांच की और प्रथम दृष्टया आरोपों को सही पाया। इसके बाद विश्वविद्यालय ने आरोपी शिक्षक को अपनी परीक्षा समिति से सात साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया। पुलिस ने भी विश्वविद्यालय की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

परीक्षा से पहले व्हाट्सऐप समूह में पेपर साझा करने का आरोप
आरोप है कि देहरादून के शिवालिक कॉलेज में तैनात सहायक प्रोफेसर ने परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र को एक व्हाट्सऐप समूह में साझा किया था। इतना ही नहीं, छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवालों के बारे में भी जानकारी दिए जाने का आरोप है। शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचने के बाद इस पूरे मामले की जांच शुरू हुई।

8 जुलाई की परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि
विश्वविद्यालय की कुलपति तृप्ता ठाकुर के मुताबिक, 8 जुलाई को आयोजित परीक्षा से जुड़ी शिकायत मिलने के बाद जांच कराई गई थी। जांच में प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय ने परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया। परीक्षा रद्द होने से बड़ी संख्या में छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी होगी।

24 जून की परीक्षा भी एहतियातन रद्द
विश्वविद्यालय प्रशासन ने 24 जून को आयोजित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विषय की परीक्षा को भी रद्द कर दिया है। विश्वविद्यालय के मुताबिक, इस परीक्षा का प्रश्नपत्र भी उसी शिक्षक ने तैयार किया था, जिस पर पेपर लीक करने का आरोप लगा है। हालांकि इस परीक्षा के प्रश्नपत्र के लीक होने की अलग से पुष्टि नहीं हुई, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय ने इसे एहतियातन रद्द कर दिया।

अगस्त में दोबारा होगी परीक्षा
रद्द की गई परीक्षा को अब अगस्त में दोबारा आयोजित किए जाने की तैयारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा की नई तारीख जल्द तय की जाएगी। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के कारण उन छात्रों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने पहले ही परीक्षा की तैयारी पूरी कर ली थी और अब उन्हें दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी होगी।

छात्रों के बीच बढ़ी नाराजगी, एनएसयूआई ने किया प्रदर्शन
पेपर लीक की जानकारी सामने आने के बाद छात्र संगठनों का विरोध भी शुरू हो गया। एनएसयूआई के कार्यकर्ता उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे और मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पेपर लीक का मामला केवल एक शिक्षक तक सीमित नहीं हो सकता और इसकी गहराई से जांच की जानी चाहिए।

विश्वविद्यालय परिसर में रोके जाने पर भड़के कार्यकर्ता
प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश को लेकर कार्यकर्ताओं और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। कार्यकर्ताओं को रोके जाने के बाद उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए।

कुलपति ने कहा- परीक्षा व्यवस्था सुरक्षित
कुलपति तृप्ता ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है और शिकायत मिलने के बाद जांच समिति बनाकर पूरे घटनाक्रम की जांच कराई गई। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था सुरक्षित है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

आरोपी शिक्षक पर 7 साल का प्रतिबंध
जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद विश्वविद्यालय ने आरोपी सहायक प्रोफेसर आशीष गुप्ता के खिलाफ विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की है। उन्हें विश्वविद्यालय की परीक्षा समिति से सात साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। विश्वविद्यालय की ओर से की गई यह कार्रवाई फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई मानी जा रही है।

पुलिस ने दर्ज किया मामला, आरोपी गिरफ्तार
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब प्रेमनगर थाना पुलिस ने विश्वविद्यालय की शिकायत के आधार पर आरोपी सहायक प्रोफेसर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले किस तरह बाहर पहुंचा और उसे किन लोगों के साथ साझा किया गया।

पेपर लीक के पीछे किसी और की भूमिका है या नहीं, जांच जारी
एसपी सिटी प्रमोद कुमार के अनुसार, पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना भी है कि क्या प्रश्नपत्र लीक करने में आरोपी शिक्षक के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र कितने लोगों तक पहुंचा और क्या इससे किसी अन्य परीक्षा या छात्रों को भी फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई थी।

छात्रों के भविष्य को लेकर उठे सवाल
एक तरफ पेपर लीक की जांच आगे बढ़ रही है, तो दूसरी ओर परीक्षा रद्द होने से प्रभावित छात्रों की चिंता भी बढ़ गई है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी में काफी समय और मेहनत लगाई थी। अब दोबारा परीक्षा होने से उनकी पढ़ाई का कार्यक्रम प्रभावित होगा। ऐसे में छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय जल्द से जल्द नई परीक्षा की तारीख घोषित करे और यह सुनिश्चित करे कि दोबारा ऐसी घटना न हो।

पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय का यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में परीक्षाओं और पेपर लीक से जुड़े मामलों को लेकर छात्रों में पहले से नाराजगी है। ऐसे में विश्वविद्यालय के इस मामले ने एक बार फिर परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और गोपनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल आरोपी शिक्षक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जांच कर रही है और आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस मामले में किसी और की भूमिका सामने आती है या नहीं।

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परीक्षा से पहले WhatsApp पर पहुंच गया पेपर! उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में हड़कंप, आरोपी शिक्षक गिरफ्तार

By Malay Ojha | Published: 23 July 2026 at 06:02 PM

उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में प्रश्नपत्र लीक होने के मामले ने छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच हड़कंप मचा दिया है। जांच में पेपर लीक की पुष्टि होने के बाद विश्वविद्यालय ने 8 जुलाई को हुई परीक्षा को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही 24 जून को हुई इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विषय की परीक्षा भी दोबारा कराने का फैसला लिया गया है। मामले में शिवालिक कॉलेज के सहायक प्रोफेसर आशीष गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है।

मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक जांच समिति का गठन किया था। समिति ने शिकायत से जुड़े तथ्यों की जांच की और प्रथम दृष्टया आरोपों को सही पाया। इसके बाद विश्वविद्यालय ने आरोपी शिक्षक को अपनी परीक्षा समिति से सात साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया। पुलिस ने भी विश्वविद्यालय की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

परीक्षा से पहले व्हाट्सऐप समूह में पेपर साझा करने का आरोप
आरोप है कि देहरादून के शिवालिक कॉलेज में तैनात सहायक प्रोफेसर ने परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र को एक व्हाट्सऐप समूह में साझा किया था। इतना ही नहीं, छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवालों के बारे में भी जानकारी दिए जाने का आरोप है। शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचने के बाद इस पूरे मामले की जांच शुरू हुई।

8 जुलाई की परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि
विश्वविद्यालय की कुलपति तृप्ता ठाकुर के मुताबिक, 8 जुलाई को आयोजित परीक्षा से जुड़ी शिकायत मिलने के बाद जांच कराई गई थी। जांच में प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय ने परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया। परीक्षा रद्द होने से बड़ी संख्या में छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी होगी।

24 जून की परीक्षा भी एहतियातन रद्द
विश्वविद्यालय प्रशासन ने 24 जून को आयोजित इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विषय की परीक्षा को भी रद्द कर दिया है। विश्वविद्यालय के मुताबिक, इस परीक्षा का प्रश्नपत्र भी उसी शिक्षक ने तैयार किया था, जिस पर पेपर लीक करने का आरोप लगा है। हालांकि इस परीक्षा के प्रश्नपत्र के लीक होने की अलग से पुष्टि नहीं हुई, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय ने इसे एहतियातन रद्द कर दिया।

अगस्त में दोबारा होगी परीक्षा
रद्द की गई परीक्षा को अब अगस्त में दोबारा आयोजित किए जाने की तैयारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा की नई तारीख जल्द तय की जाएगी। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के कारण उन छात्रों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने पहले ही परीक्षा की तैयारी पूरी कर ली थी और अब उन्हें दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी होगी।

छात्रों के बीच बढ़ी नाराजगी, एनएसयूआई ने किया प्रदर्शन
पेपर लीक की जानकारी सामने आने के बाद छात्र संगठनों का विरोध भी शुरू हो गया। एनएसयूआई के कार्यकर्ता उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे और मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पेपर लीक का मामला केवल एक शिक्षक तक सीमित नहीं हो सकता और इसकी गहराई से जांच की जानी चाहिए।

विश्वविद्यालय परिसर में रोके जाने पर भड़के कार्यकर्ता
प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश को लेकर कार्यकर्ताओं और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। कार्यकर्ताओं को रोके जाने के बाद उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए।

कुलपति ने कहा- परीक्षा व्यवस्था सुरक्षित
कुलपति तृप्ता ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है और शिकायत मिलने के बाद जांच समिति बनाकर पूरे घटनाक्रम की जांच कराई गई। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था सुरक्षित है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

आरोपी शिक्षक पर 7 साल का प्रतिबंध
जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद विश्वविद्यालय ने आरोपी सहायक प्रोफेसर आशीष गुप्ता के खिलाफ विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की है। उन्हें विश्वविद्यालय की परीक्षा समिति से सात साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। विश्वविद्यालय की ओर से की गई यह कार्रवाई फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई मानी जा रही है।

पुलिस ने दर्ज किया मामला, आरोपी गिरफ्तार
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब प्रेमनगर थाना पुलिस ने विश्वविद्यालय की शिकायत के आधार पर आरोपी सहायक प्रोफेसर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले किस तरह बाहर पहुंचा और उसे किन लोगों के साथ साझा किया गया।

पेपर लीक के पीछे किसी और की भूमिका है या नहीं, जांच जारी
एसपी सिटी प्रमोद कुमार के अनुसार, पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना भी है कि क्या प्रश्नपत्र लीक करने में आरोपी शिक्षक के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र कितने लोगों तक पहुंचा और क्या इससे किसी अन्य परीक्षा या छात्रों को भी फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई थी।

छात्रों के भविष्य को लेकर उठे सवाल
एक तरफ पेपर लीक की जांच आगे बढ़ रही है, तो दूसरी ओर परीक्षा रद्द होने से प्रभावित छात्रों की चिंता भी बढ़ गई है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी में काफी समय और मेहनत लगाई थी। अब दोबारा परीक्षा होने से उनकी पढ़ाई का कार्यक्रम प्रभावित होगा। ऐसे में छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय जल्द से जल्द नई परीक्षा की तारीख घोषित करे और यह सुनिश्चित करे कि दोबारा ऐसी घटना न हो।

पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग
उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय का यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में परीक्षाओं और पेपर लीक से जुड़े मामलों को लेकर छात्रों में पहले से नाराजगी है। ऐसे में विश्वविद्यालय के इस मामले ने एक बार फिर परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और गोपनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल आरोपी शिक्षक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जांच कर रही है और आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस मामले में किसी और की भूमिका सामने आती है या नहीं।

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