By Malay Ojha | Published: 24 July 2026 at 11:00 AM
पेपर लीक के खिलाफ केंद्र सरकार अब कानून को और सख्त करने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात साफ किया कि परीक्षा में पेपर लीक और दूसरे अनुचित तरीकों पर लगाम लगाने के लिए और कड़े कदम उठाए जाएंगे। प्रस्तावित कानून में फास्ट ट्रैक कोर्ट और सख्त सजा जैसे प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। इस प्रस्ताव पर शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में चर्चा होनी है और सरकार की कोशिश है कि संसद के मौजूदा मानसून सत्र में ही इससे जुड़ा विधेयक पेश कर जल्द पारित कराया जाए।
पेपर लीक के मामलों में तेजी से सुनवाई और दोषियों को जल्द सजा दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम पहले ही उठाया जा चुका है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 जुलाई को राउज एवेन्यू अदालत परिसर में एक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किया है। यह अदालत सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम से जुड़े कानून और उससे जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी। लंबित मामलों को भी इस विशेष अदालत में भेजने का निर्देश दिया गया है, ताकि उनकी सुनवाई में अनावश्यक देरी न हो।
अब कानून में बदलाव की तैयारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार रात करीब तीन मिनट के वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक कोई छोटी समस्या नहीं है। इसका सीधा असर लाखों छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए। प्रधानमंत्री के मुताबिक, संबंधित विभागों ने फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़े प्रावधानों से जुड़ा मसौदा तैयार किया है, जिस पर मंत्रिमंडल में चर्चा के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
संसद में जल्द लाया जा सकता है विधेयक
प्रधानमंत्री ने कहा है कि संसद के मानसून सत्र का दूसरा सप्ताह शुरू होते ही सरकार पेपर लीक के खिलाफ कड़े प्रावधानों वाला विधेयक लाने की कोशिश करेगी। सरकार की योजना इसे जल्द से जल्द पारित कराने की है। इसका मतलब साफ है कि केंद्र अब मौजूदा कानून को और प्रभावी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ताकि परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच और सुनवाई में तेजी लाई जा सके। हालांकि, प्रस्तावित बदलावों का अंतिम स्वरूप मंत्रिमंडल की चर्चा और मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
मौजूदा कानून में पहले से सजा का प्रावधान
पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 पहले से लागू है। यह कानून 21 जून 2024 से प्रभावी है। इसके तहत पेपर लीक, प्रश्नपत्र या उत्तर से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करने, उसे साझा करने और परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसी गतिविधियों को अपराध माना गया है। अब सरकार इसी कानूनी ढांचे को और मजबूत करने पर विचार कर रही है, ताकि ऐसे मामलों में कार्रवाई अधिक तेज और प्रभावी हो सके।
फास्ट ट्रैक कोर्ट को लेकर सरकार का जोर
केंद्र सरकार का मानना है कि केवल जांच और गिरफ्तारी से पेपर लीक की समस्या का समाधान नहीं होगा। मामलों का समय पर अदालत तक पहुंचना और दोष साबित होने पर जल्द सजा मिलना भी जरूरी है। इसी वजह से फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि पेपर लीक के मामलों में त्वरित और कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए सरकार जरूरी कदम उठा रही है। दिल्ली में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन इसी दिशा में शुरुआती कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
नीट विवाद के बाद बढ़ा दबाव
परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक का मुद्दा पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में है। खास तौर पर नीट परीक्षा से जुड़े विवाद के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच नाराजगी बढ़ी। इस पूरे मामले ने परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। सरकार की ओर से कहा गया है कि बीते ढाई महीनों में ऐसे मामलों को लेकर कई कदम उठाए गए हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। अब कानून को और कठोर बनाने की तैयारी को इसी व्यापक चिंता से जोड़कर देखा जा रहा है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बीच आया बड़ा ऐलान
पेपर लीक के मुद्दे को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहने के बीच प्रधानमंत्री की ओर से लगातार दो दिनों में की गई घोषणाओं ने इस मामले को फिर से केंद्र में ला दिया है। प्रधानमंत्री ने पहले पेपर लीक मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही और इसके बाद गुरुवार रात प्रस्तावित कड़े कदमों को लेकर मंत्रिमंडल की बैठक का जिक्र किया। सरकार की इन घोषणाओं को छात्रों और प्रदर्शनकारियों की मांगों के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
सोनम वांगचुक ने खत्म की भूख हड़ताल
इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी 26 दिनों से जारी अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी। उनके आंदोलन और जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच सरकार की ओर से पेपर लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई का आश्वासन और प्रधानमंत्री की ओर से नए कदमों की घोषणा सामने आई। हालांकि, प्रदर्शन से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान किस तरह होगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून और तेज न्याय की दिशा में सरकार के अगले कदम पर सबकी नजर है।
आज की कैबिनेट बैठक पर टिकी नजर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शुक्रवार को होने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्तावित बदलावों को कितनी मंजूरी मिलती है और कानून को किस रूप में आगे बढ़ाया जाता है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो संसद में विधेयक लाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। ऐसे में छात्रों, अभिभावकों और परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। पेपर लीक पर सख्ती का ऐलान हो चुका है, अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि नए प्रावधान जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू होते हैं।
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