By Malay Ojha | Published: 24 July 2026 at 02:58 PM
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पेपर लीक और परीक्षा में नकल कराने वाले गिरोहों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में पेपर लीक और नकल विरोधी कानून में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। नए प्रावधानों के तहत पेपर लीक जैसे मामलों में दोषी पाए जाने वालों को 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
सरकार के इस फैसले को परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। मौजूदा कानून में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े अपराधों के लिए सजा और जुर्माने के प्रावधान हैं, लेकिन अब सरकार इन्हें और सख्त करने जा रही है। इसका सीधा असर पेपर लीक कराने वाले गिरोहों और परीक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने वालों पर पड़ेगा।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में जल्द होगा फैसला
पेपर लीक मामलों की सुनवाई में देरी न हो, इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि ऐसे मामलों की सुनवाई तेजी से पूरी हो और दोषियों को जल्द सजा मिले। प्रधानमंत्री मोदी ने भी पेपर लीक मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए कार्रवाई तेज करने की बात कही थी। इसी क्रम में दिल्ली में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट भी गठित की गई है।
तीन महीने में सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई तेजी से पूरी करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का मकसद ऐसे मामलों को वर्षों तक अदालतों में लंबित रहने से रोकना है, ताकि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ समय पर कार्रवाई हो सके।
संसद में जल्द पेश होगा संशोधन विधेयक
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब संशोधन विधेयक को संसद में पेश किए जाने की तैयारी है। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों और युवाओं के बीच नाराजगी देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
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