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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा CJP, सरकार ने मांगा कल तक का समय; क्या होगा बड़ा फैसला?

By Malay Ojha | Published: 24 July 2026 at 03:18 PM

पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच शुक्रवार को केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच दूसरे दौर की अहम बातचीत हुई। बैठक के बाद CJP ने साफ कर दिया कि सरकार से बातचीत जरूर हुई है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कोई समझौता नहीं होगा। संगठन के मुताबिक, सरकार ने इस मांग पर अपना जवाब देने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है।

बैठक के बाद CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत में तीन प्रमुख मांगें रखी गई थीं। इनमें शिक्षा मंत्री का इस्तीफा सबसे अहम है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने नीट परीक्षा से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया है। हालांकि, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के सवाल पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

सरकार ने मांगा शनिवार दोपहर तक का वक्त
CJP के मुताबिक, सरकार की ओर से कहा गया है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर विचार के लिए कुछ समय चाहिए। सरकार ने शनिवार दोपहर तक अपना रुख बताने की बात कही है। यही वजह है कि अब शनिवार की बातचीत और सरकार के जवाब पर सभी की नजरें टिकी हैं। CJP ने संकेत दिया है कि अगर उसकी मुख्य मांग नहीं मानी गई, तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा।

दो मांगों पर सरकार के रुख से CJP को उम्मीद
बैठक के बाद CJP नेताओं ने कहा कि सरकार का मुआवजे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर रुख सकारात्मक रहा है। संगठन का दावा है कि इन दोनों मांगों पर सरकार ने सैद्धांतिक रूप से सहमति के संकेत दिए हैं। हालांकि, आंदोलन की सबसे बड़ी मांग अब भी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा है। CJP का कहना है कि जब तक इस मुद्दे पर फैसला नहीं होता, तब तक जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन खत्म नहीं किया जाएगा।

नड्डा बोले- शनिवार को फिर होगी बातचीत
सरकार की ओर से बातचीत का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने किया। बैठक के बाद नड्डा ने कहा कि बातचीत करीब दो घंटे तक चली। उनके मुताबिक, CJP की ओर से तीन प्रमुख मांगें रखी गईं और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए पांच सुझाव भी दिए गए। नड्डा ने कहा कि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा करेगी और शनिवार दोपहर फिर CJP प्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपना पक्ष रखेगी।

CJP बोला- सरकार को हमारी बात समझनी होगी
CJP के नेताओं ने बैठक के बाद कहा कि सरकार से बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आंदोलन खत्म हो गया। संगठन का कहना है कि पेपर लीक जैसे मामलों ने देश के लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भरोसे को चोट पहुंचाई है। इसलिए केवल सख्त कानून बनाने या जांच की घोषणा करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जवाबदेही भी तय करनी होगी।

अभिजीत दिपके ने पहले ही साफ कर दिया था रुख
बैठक से पहले CJP के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने भी साफ शब्दों में कहा था कि आंदोलन सिर्फ किसी एक व्यक्ति या संगठन का नहीं है। उनके मुताबिक, यह देश के युवाओं से जुड़ा मुद्दा है और इसे किसी राजनीतिक दल के आंदोलन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि अगर सरकार इस विरोध को खत्म करना चाहती है, तो उसके सामने सबसे बड़ा रास्ता शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का है।

आंदोलन खत्म नहीं होगा, सरकार के जवाब का इंतजार
CJP की ओर से यह भी कहा गया कि कार्यकर्ताओं और छात्रों का प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मुख्य मांग पर कोई ठोस फैसला नहीं आता। संगठन को उम्मीद है कि शनिवार को सरकार की ओर से कोई बड़ा निर्णय सामने आ सकता है। हालांकि, सरकार की तरफ से अब तक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर सहमति का कोई सार्वजनिक ऐलान नहीं किया गया है।

इससे पहले सरकार ने बातचीत के लिए भेजा था न्योता
इस बैठक से पहले केंद्र सरकार की ओर से CJP नेताओं को बातचीत के लिए कई बार न्योता दिए जाने की बात सामने आई थी। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं से बातचीत के लिए आगे आने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि बातचीत के जरिए ही किसी समाधान तक पहुंचा जा सकता है और सरकार के दरवाजे प्रदर्शनकारियों के लिए खुले हैं।

सरकार के लिए आसान नहीं है आंदोलन को संभालना
पेपर लीक का मुद्दा अब सिर्फ परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। आंदोलनकारी छात्र जवाबदेही, परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार से ठोस कदम की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार ने भी पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के संकेत दिए हैं। लेकिन CJP की सबसे बड़ी मांग पर फैसला नहीं होने के कारण आंदोलन थमता नजर नहीं आ रहा है।

अब शनिवार पर टिकी सबकी नजर
शुक्रवार की बैठक के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कोई बड़ा फैसला लेगी? CJP ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सबसे अहम मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं है। ऐसे में शनिवार दोपहर होने वाली अगली बातचीत आंदोलन की दिशा तय करने में अहम मानी जा रही है। अगर सरकार और CJP के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनती है, तो प्रदर्शन के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा CJP, सरकार ने मांगा कल तक का समय; क्या होगा बड़ा फैसला?

By Malay Ojha | Published: 24 July 2026 at 03:18 PM

पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच शुक्रवार को केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच दूसरे दौर की अहम बातचीत हुई। बैठक के बाद CJP ने साफ कर दिया कि सरकार से बातचीत जरूर हुई है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कोई समझौता नहीं होगा। संगठन के मुताबिक, सरकार ने इस मांग पर अपना जवाब देने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है।

बैठक के बाद CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत में तीन प्रमुख मांगें रखी गई थीं। इनमें शिक्षा मंत्री का इस्तीफा सबसे अहम है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने नीट परीक्षा से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग पर सकारात्मक रुख दिखाया है। हालांकि, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के सवाल पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

सरकार ने मांगा शनिवार दोपहर तक का वक्त
CJP के मुताबिक, सरकार की ओर से कहा गया है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर विचार के लिए कुछ समय चाहिए। सरकार ने शनिवार दोपहर तक अपना रुख बताने की बात कही है। यही वजह है कि अब शनिवार की बातचीत और सरकार के जवाब पर सभी की नजरें टिकी हैं। CJP ने संकेत दिया है कि अगर उसकी मुख्य मांग नहीं मानी गई, तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा।

दो मांगों पर सरकार के रुख से CJP को उम्मीद
बैठक के बाद CJP नेताओं ने कहा कि सरकार का मुआवजे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर रुख सकारात्मक रहा है। संगठन का दावा है कि इन दोनों मांगों पर सरकार ने सैद्धांतिक रूप से सहमति के संकेत दिए हैं। हालांकि, आंदोलन की सबसे बड़ी मांग अब भी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा है। CJP का कहना है कि जब तक इस मुद्दे पर फैसला नहीं होता, तब तक जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन खत्म नहीं किया जाएगा।

नड्डा बोले- शनिवार को फिर होगी बातचीत
सरकार की ओर से बातचीत का नेतृत्व केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने किया। बैठक के बाद नड्डा ने कहा कि बातचीत करीब दो घंटे तक चली। उनके मुताबिक, CJP की ओर से तीन प्रमुख मांगें रखी गईं और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए पांच सुझाव भी दिए गए। नड्डा ने कहा कि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा करेगी और शनिवार दोपहर फिर CJP प्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपना पक्ष रखेगी।

CJP बोला- सरकार को हमारी बात समझनी होगी
CJP के नेताओं ने बैठक के बाद कहा कि सरकार से बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आंदोलन खत्म हो गया। संगठन का कहना है कि पेपर लीक जैसे मामलों ने देश के लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भरोसे को चोट पहुंचाई है। इसलिए केवल सख्त कानून बनाने या जांच की घोषणा करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जवाबदेही भी तय करनी होगी।

अभिजीत दिपके ने पहले ही साफ कर दिया था रुख
बैठक से पहले CJP के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने भी साफ शब्दों में कहा था कि आंदोलन सिर्फ किसी एक व्यक्ति या संगठन का नहीं है। उनके मुताबिक, यह देश के युवाओं से जुड़ा मुद्दा है और इसे किसी राजनीतिक दल के आंदोलन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि अगर सरकार इस विरोध को खत्म करना चाहती है, तो उसके सामने सबसे बड़ा रास्ता शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का है।

आंदोलन खत्म नहीं होगा, सरकार के जवाब का इंतजार
CJP की ओर से यह भी कहा गया कि कार्यकर्ताओं और छात्रों का प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक उनकी मुख्य मांग पर कोई ठोस फैसला नहीं आता। संगठन को उम्मीद है कि शनिवार को सरकार की ओर से कोई बड़ा निर्णय सामने आ सकता है। हालांकि, सरकार की तरफ से अब तक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर सहमति का कोई सार्वजनिक ऐलान नहीं किया गया है।

इससे पहले सरकार ने बातचीत के लिए भेजा था न्योता
इस बैठक से पहले केंद्र सरकार की ओर से CJP नेताओं को बातचीत के लिए कई बार न्योता दिए जाने की बात सामने आई थी। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं से बातचीत के लिए आगे आने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि बातचीत के जरिए ही किसी समाधान तक पहुंचा जा सकता है और सरकार के दरवाजे प्रदर्शनकारियों के लिए खुले हैं।

सरकार के लिए आसान नहीं है आंदोलन को संभालना
पेपर लीक का मुद्दा अब सिर्फ परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। आंदोलनकारी छात्र जवाबदेही, परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार से ठोस कदम की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार ने भी पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के संकेत दिए हैं। लेकिन CJP की सबसे बड़ी मांग पर फैसला नहीं होने के कारण आंदोलन थमता नजर नहीं आ रहा है।

अब शनिवार पर टिकी सबकी नजर
शुक्रवार की बैठक के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कोई बड़ा फैसला लेगी? CJP ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सबसे अहम मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं है। ऐसे में शनिवार दोपहर होने वाली अगली बातचीत आंदोलन की दिशा तय करने में अहम मानी जा रही है। अगर सरकार और CJP के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनती है, तो प्रदर्शन के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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