By aryavartalive | Published: 24 July 2026 at 06:38 PM
पटना : सोशलिस्ट नेता धनंजय कुमार सिन्हा ने सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने के निर्णय पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सोनम वांगचुक ने जिन लिखित आश्वासनों के बाद अनशन तोड़ने का निर्णय लिया है, वह एक विवेकपूर्ण फैसला है। धनंजय सिन्हा ने अभिजीत दीपके समेत आंदोलन से जुड़े छात्र-युवाओं से भी वांगचुक के फैसले का सम्मान करते हुए उनका अनुशरण करना चाहिये।
लिखित आश्वासन के बाद वांगचुक ने तोड़ा अनशन
विदित हो कि आज जंतर-मंतर पर छात्र-युवाओं के प्रदर्शन का 38वां दिन है। वहीं, गुरुवार रात सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल के 26वें दिन सरकार से बातचीत और लिखित समझौते के बाद अनशन तोड़ने का निर्णय लिया। इस समझौते में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल नहीं है। दूसरी ओर, अभिजीत दीपके और उनकी टीम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ी हुई है।
अभिजीत दीपके टीम से भी वांगचुक के फैसले का सम्मान करने की अपील
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने दिल्ली समेत देश के अन्य शहरों में छात्र-युवाओं पर हुए लाठीचार्ज को सरकार की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई करार दिया। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि हिंसा और उग्रता आंदोलन की दिशा को भटका सकती थी। इसलिए मौजूदा समस्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समाजसेवी सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ने का जो निर्णय लिया है, वह बिल्कुल सही है। अभिजीत दीपके की टीम सहित सभी छात्र-युवाओं को उनके अनुभवपूर्ण निर्णय का सम्मान और अनुसरण करना चाहिए।
‘आंदोलन ने साबित किया, लोकतंत्र अभी खत्म नहीं हुआ’
धनंजय सिन्हा ने कहा कि छात्र-युवाओं के इस आंदोलन ने साबित कर दिया है कि लोकतंत्र अभी खत्म नहीं हुआ है। इस आंदोलन ने एक ओर जहां सरकार की मनमानी से निराश हो चुके करोड़ों नागरिकों में आशा की किरण जगाई है, वहीं दूसरी ओर पूंजीवादी ताकतों के सहारे लोकतंत्र को मुट्ठी में कर लेने का सपना देख रही वर्तमान केंद्र सरकार की तानाशाही मानसिकता में भी दरार पैदा की है।
छह माह तक गांव-शहरों में सरकार की तानाशाही को लेकर जन-जागरण अभियान चलाने की अपील
सोशलिस्ट नेता ने इस आंदोलन को तानाशाही के खिलाफ एक बड़े आंदोलन का पहला चरण बताते हुए कहा कि छात्र-युवा अगले छह महीने तक अपने-अपने गांवों और शहरों में जाकर वर्तमान केंद्र सरकार के तानाशाही रवैये के बारे में लोगों को बताएं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने अपना रवैया नहीं सुधारा तो फिर से एक बड़ा देशव्यापी आंदोलन किया जा सकता है।
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