By Malay Ojha | Published: 25 July 2026 at 09:12 AM
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद अब इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। वीडियो में उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों को लेकर बेहद आपत्तिजनक और धमकी भरी टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था। लेकिन पीयूष गोयल ने खुद इस वीडियो को फर्जी और एआई की मदद से तैयार किया गया डीपफेक बताया है। मंत्री के मुताबिक, इस मामले में पुलिस शिकायत के बाद एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है और वीडियो बनाने तथा फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पीयूष गोयल ने कहा है कि संसद के बाहर मीडिया से उनकी कही गई बातों को एआई की मदद से जानबूझकर बदला गया और उसके आधार पर एक फर्जी वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर फैलाया गया। उन्होंने इसे गलत जानकारी फैलाने की कोशिश बताया है। मंत्री का कहना है कि असली बयान को तोड़-मरोड़कर ऐसा रूप दिया गया, जिससे यह लगे कि उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ हिंसा या कठोर कार्रवाई की धमकी दी है।
चाणक्यपुरी थाने में दर्ज हुई एफआईआर
मंत्री के अनुसार, उन्होंने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उनके मुताबिक, 25 जुलाई की सुबह 4 बजकर 35 मिनट पर चाणक्यपुरी पुलिस थाने में एफआईआर संख्या 123/26 दर्ज की गई। उन्होंने साफ कहा कि फर्जी वीडियो तैयार करने, उसे सोशल मीडिया पर फैलाने या उसे आगे बढ़ाने में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्या था वायरल वीडियो में दावा
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में पीयूष गोयल को कथित तौर पर यह कहते हुए दिखाया गया कि प्रदर्शन कर रहे लोगों में से दो-तीन को सरेआम फांसी पर लटका देना चाहिए, ताकि कॉकरोच जनता पार्टी को सरकार की ताकत का अंदाजा हो सके। वीडियो में कथित बयान के मुताबिक, ऐसा करने से प्रदर्शनकारियों का विरोध और हंगामा खत्म हो जाएगा।
हालांकि, अब यह साफ हो गया है कि वायरल वीडियो में दिखाया गया यह बयान पीयूष गोयल का असली बयान नहीं है। पीआईबी फैक्ट चेक ने भी वीडियो को फर्जी और एआई से तैयार किया हुआ बताया है। इसलिए वायरल वीडियो में कही गई बातों को मंत्री का वास्तविक बयान मानना सही नहीं होगा।
पीआईबी फैक्ट चेक ने भी बताया फर्जी
इस पूरे मामले में पीआईबी फैक्ट चेक की ओर से भी लोगों को सावधान किया गया है। आधिकारिक तथ्य जांच में कहा गया कि सोशल मीडिया पर पीयूष गोयल के नाम से प्रसारित किया जा रहा वीडियो फर्जी है और एआई की मदद से तैयार किया गया है। पीआईबी ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों को लेकर वायरल वीडियो में दिखाई जा रही ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की थी।
असली वीडियो से खुली फर्जी वीडियो की पोल
वायरल वीडियो की जांच में सामने आया कि इसके दृश्य एक पुराने और असली वीडियो से लिए गए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, मूल वीडियो में पीयूष गोयल संसद के बाहर मीडिया से बातचीत करते दिखाई दे रहे थे, लेकिन उस बातचीत के वास्तविक संदर्भ को बदलकर उसमें अलग आवाज और बयान जोड़ दिया गया। इसके बाद तैयार किए गए वीडियो को इस तरह फैलाया गया, जिससे लोगों को यह विश्वास हो कि मंत्री ने प्रदर्शनकारियों को लेकर धमकी भरी टिप्पणी की है।
गलत जानकारी फैलाने पर जताई चिंता
पीयूष गोयल ने कहा कि एआई जैसी तकनीक का गलत इस्तेमाल करके लोगों को गुमराह करना बेहद गंभीर मामला है। उनका कहना है कि इस तरह की सामग्री केवल किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि समाज में भ्रम पैदा करती है और लोकतांत्रिक बातचीत के माहौल को भी प्रभावित करती है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर आने वाली किसी भी सनसनीखेज सामग्री को तुरंत सच न मानें। किसी वीडियो या बयान को आगे बढ़ाने से पहले उसके स्रोत और विश्वसनीयता की जांच जरूर करें। खासकर राजनीतिक और संवेदनशील मुद्दों से जुड़े वीडियो को साझा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से उसकी पुष्टि करना जरूरी है।
युवाओं से भी की सतर्क रहने की अपील
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि देश के जागरूक नागरिक और खासकर युवा इस तरह की गलत सूचना को पहचानने में सक्षम होंगे। उन्होंने लोगों से केवल भरोसेमंद और सत्यापित स्रोतों से मिली जानकारी पर विश्वास करने की अपील की।
डीपफेक के बढ़ते खतरे ने बढ़ाई चिंता
पीयूष गोयल से जुड़ा यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब एआई की मदद से तैयार किए गए फर्जी वीडियो और बदली हुई आवाज के मामले लगातार चर्चा में हैं। किसी नेता या सार्वजनिक व्यक्ति के पुराने वीडियो में नई आवाज या बदला हुआ बयान जोड़कर उसे असली बताने की कोशिश की जा सकती है। ऐसे वीडियो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर तेजी से फैल जाते हैं और तब तक बड़ी संख्या में लोग उन्हें सच मान चुके होते हैं।
इस मामले में भी वायरल वीडियो को लेकर लोगों के बीच नाराजगी देखने को मिली थी। लेकिन मंत्री की सफाई और पीआईबी फैक्ट चेक के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि वीडियो में दिखाई और सुनाई गई विवादित बातें वास्तविक नहीं हैं। अब पुलिस की जांच का मुख्य बिंदु यह होगा कि फर्जी वीडियो किसने तैयार किया, इसे सबसे पहले कहां से फैलाया गया और इसे आगे बढ़ाने में किन लोगों की भूमिका रही।
अब जांच के नतीजे पर नजर
फिलहाल इस पूरे मामले में पीयूष गोयल की शिकायत और दर्ज एफआईआर के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई का इंतजार है। जांच में यदि वीडियो बनाने और उसे जानबूझकर फैलाने वालों की पहचान होती है, तो उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि एआई से तैयार फर्जी सामग्री के दौर में सोशल मीडिया पर किसी भी वायरल वीडियो को बिना जांचे सच मानना कितना खतरनाक हो सकता है।
ऐसे में इस मामले का सबसे अहम संदेश यही है कि किसी नेता या सार्वजनिक व्यक्ति से जुड़ा कोई भी विवादित वीडियो सामने आने पर उसे तुरंत सच मानने के बजाय पहले उसके मूल स्रोत और आधिकारिक तथ्य जांच की पुष्टि करनी चाहिए। पीयूष गोयल के मामले में भी वायरल वीडियो को लेकर यही सावधानी जरूरी है, क्योंकि उपलब्ध तथ्य जांच के अनुसार विवादित वीडियो फर्जी और एआई से तैयार किया गया है।
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