By Malay Ojha | Published: 21 August 2026 at 04:31 PM
संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर राहुल गांधी के धरने को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को राहुल गांधी के प्रदर्शन को राजनीतिक हताशा और मीडिया का ध्यान खींचने की कोशिश बताया। नड्डा ने सवाल उठाया कि जब 20 जुलाई की घटना की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बना चुका है, तो राहुल गांधी पुलिस थाने के बाहर धरना देकर क्या हासिल करना चाहते हैं।
नड्डा ने कहा कि 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से जुड़े आरोपों पर सर्वोच्च अदालत पहले ही संज्ञान ले चुकी है। अदालत ने पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति बनाई है। समिति को पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल किए जाने के साथ प्रदर्शनकारियों की ओर से हुई हिंसा के आरोपों की भी जांच करनी है।
‘जब अदालत देख रही है तो प्रदर्शन क्यों?’
भाजपा नेता ने राहुल गांधी के प्रदर्शन पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि जब देश की सर्वोच्च अदालत इस पूरे मामले की जांच करा रही है, तब पुलिस थाने के बाहर कैमरों के सामने बैठकर धरना देने का औचित्य क्या है। नड्डा ने यह भी सवाल किया कि क्या लोकसभा में विपक्ष के नेता को देश की न्यायपालिका पर भरोसा नहीं है। उनके मुताबिक, इस तरह का प्रदर्शन न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय राजनीतिक संदेश देने की कोशिश ज्यादा नजर आता है।
राहुल गांधी क्यों बैठे हैं धरने पर?
दरअसल, राहुल गांधी शुक्रवार को एक घायल छात्र के साथ संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचे थे। कांग्रेस का आरोप है कि 20 जुलाई को छात्रों के संसद मार्च के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में छात्र घायल हुए थे और एक छात्र ने पैलेट गन से चोट लगने की शिकायत की है। राहुल गांधी इसी मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को लेकर पुलिस अधिकारियों से मिले। जब उनकी मांग पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो वह थाने के बाहर धरने पर बैठ गए।
घायल छात्र को साथ लेकर थाने पहुंचे राहुल
राहुल गांधी के साथ घायल छात्र साहिल लोचाब भी मौजूद थे। रिपोर्टों के मुताबिक, लोचाब ने 20 जुलाई की घटना को लेकर पुलिस में लिखित शिकायत दी थी और मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। कांग्रेस का कहना है कि शिकायत के बावजूद पुलिस की ओर से मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसी मुद्दे को लेकर राहुल गांधी ने पुलिस पर दबाव बनाने के लिए धरना शुरू किया।
20 जुलाई की घटना बनी विवाद की वजह
20 जुलाई को छात्रों का प्रदर्शन और संसद की ओर मार्च काफी विवादित रहा था। पुलिस कार्रवाई के दौरान बल प्रयोग को लेकर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा था। बाद में पुलिस से जुड़े दस्तावेजों में रैपिड एक्शन फोर्स की ओर से आंसू गैस और अन्य गैर-घातक साधनों के इस्तेमाल के साथ दो राउंड प्लास्टिक पैलेट चलाए जाने का उल्लेख सामने आया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम और बल प्रयोग की परिस्थितियों की जांच अब सुप्रीम कोर्ट की बनाई समिति कर रही है।
नड्डा ने प्रदर्शन को ‘कैमरा केंद्रित’ बताया
जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के धरने को लेकर बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रदर्शन छात्रों को न्याय दिलाने से ज्यादा कैमरों और सुर्खियों पर केंद्रित है। नड्डा के मुताबिक, कांग्रेस राजनीतिक दबाव बनाने के लिए ऐसे तरीके अपना रही है, जबकि संबंधित मामले की जांच पहले से न्यायिक निगरानी में आगे बढ़ रही है। उन्होंने राहुल गांधी पर राजनीतिक हताशा में प्रदर्शन करने का आरोप भी लगाया।
‘वंदे मातरम’ विवाद का भी नड्डा ने जिक्र किया
नड्डा ने राहुल गांधी के धरने को हाल में चल रहे ‘वंदे मातरम’ विवाद से भी जोड़ दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दबाव में है और जनता उससे जवाब मांग रही है। इसी बीच राहुल गांधी का नया प्रदर्शन सामने आया है। नड्डा का दावा है कि इससे कांग्रेस से जुड़े विवाद से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, यह नड्डा का राजनीतिक आरोप है और कांग्रेस की ओर से इस दावे को लेकर अलग प्रतिक्रिया हो सकती है।
‘वंदे मातरम’ को लेकर पहले से जारी है सियासी विवाद
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के कार्यक्रम को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच पहले से राजनीतिक टकराव चल रहा है। भाजपा ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं पर राष्ट्रीय गीत के प्रति उचित सम्मान नहीं दिखाने का आरोप लगाया था। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ को रोकने या उसका अपमान करने का कोई सवाल ही नहीं था।
भाजपा-कांग्रेस के बीच टकराव और बढ़ा
राहुल गांधी के धरने के बाद यह मामला एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी राजनीतिक लड़ाई का मुद्दा बन गया है। कांग्रेस इसे छात्रों के साथ कथित ज्यादती और प्राथमिकी दर्ज कराने की लड़ाई बता रही है, जबकि भाजपा इसे राजनीतिक प्रदर्शन और मीडिया का ध्यान खींचने की कोशिश बता रही है। इस पूरे विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय समिति की जांच अहम हो गई है, क्योंकि समिति को पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं के अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल करनी है।
जांच के नतीजे पर टिकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट की समिति को पुलिस और सुरक्षा बलों के बल प्रयोग की जरूरत और अनुपातिकता के साथ प्रदर्शनकारियों की ओर से हुई कथित हिंसा की भी जांच करनी है। ऐसे में राहुल गांधी की प्राथमिकी की मांग और नड्डा का न्यायिक जांच का हवाला, दोनों इस विवाद के अलग-अलग राजनीतिक पक्ष सामने रखते हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 20 जुलाई की घटना में वास्तव में क्या हुआ और जिम्मेदारी किसकी तय होती है। समिति की जांच आगे बढ़ने के साथ इस पर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
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