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आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में बड़ा बदलाव, नए स्कूल और रोजगार से जुड़े कोर्स शुरू; रिसर्च और उद्योगों से भी बढ़ा जुड़ाव

By Malay Ojha | Published: 22 August 2026 at 06:27 PM

पटना स्थित आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय ने जनवरी 2024 से अब तक पढ़ाई, रिसर्च, नई तकनीक, कौशल विकास और उद्योगों के साथ जुड़ाव के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव किए हैं। कुलपति प्रो. (डॉ.) शरद कुमार यादव के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने नए स्कूल और केंद्र शुरू करने के साथ कई नए स्नातकोत्तर और रोजगार से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। विश्वविद्यालय की मौजूदा वेबसाइट पर भी खगोल विज्ञान, स्टेम सेल तकनीक, नैनो विज्ञान, भूगोल और नदी अध्ययन जैसे कई स्कूलों को प्रमुखता से दिखाया गया है।

विश्वविद्यालय में अब पारंपरिक विषयों के साथ ऐसे क्षेत्रों पर भी जोर दिया जा रहा है, जिनमें आने वाले समय में रोजगार और रिसर्च के नए अवसर बन रहे हैं। नैनो विज्ञान, नदी विज्ञान, जल संसाधन इंजीनियरिंग, जीआईएस और रिमोट सेंसिंग, अंतरिक्ष विज्ञान, प्रबंधन, अर्थशास्त्र, दर्शन, पत्रकारिता और भूगोल जैसे विषयों में स्नातकोत्तर पढ़ाई शुरू की गई है।

कई नए स्कूल और केंद्र बनाए गए
विश्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार, भूगोल, नदी अध्ययन, पाटलिपुत्र स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, स्टेम सेल तकनीक, खगोल विज्ञान और दर्शन जैसे क्षेत्रों को स्कूल के रूप में विकसित किया गया है। इसके अलावा कानून, प्रबंधन और शहरी नीति एवं सुशासन से जुड़े नए केंद्र भी बनाए गए हैं। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्तमान में खगोल विज्ञान, स्टेम सेल तकनीक, दर्शन, नैनो विज्ञान, भूगोल और नदी अध्ययन जैसे स्कूलों की जानकारी उपलब्ध है।

रोजगार से जुड़े नए कोर्स पर जोर
विश्वविद्यालय का जोर सिर्फ नए विषय शुरू करने तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के बेहतर अवसर मिलें, इसके लिए फिल्म निर्माण, फोटोग्राफी, डिजिटल पत्रकारिता, ऑनलाइन पत्रकारिता, मीडिया लेखन, स्टेम सेल जीवविज्ञान और पुनर्योजी चिकित्सा जैसे विषयों से जुड़े पाठ्यक्रम भी शुरू किए गए हैं।

नैनो तकनीक में रिसर्च भी आगे बढ़ी
नैनो विज्ञान और नैनो तकनीक विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण रिसर्च क्षेत्रों में शामिल है। विश्वविद्यालय के नैनो विज्ञान केंद्र के मुताबिक यहां विज्ञान, इंजीनियरिंग, कृषि, चिकित्सा, खाद्य और आयुर्वेद समेत कई क्षेत्रों में शोध हुआ है। केंद्र की वेबसाइट पर 200 से अधिक शोध पत्रों और दो पेटेंट के बारे में भी जानकारी दी गई है।

पढ़ाई के साथ रिसर्च का माहौल बनाने की कोशिश
रिसर्च को मजबूत बनाने के लिए विश्वविद्यालय में रिसर्च कंसोर्टियम बनाया गया है। इसके साथ इनक्यूबेशन सेंटर और प्लेसमेंट सेल की स्थापना की गई है। आधुनिक केंद्रीय पुस्तकालय और सूचना तकनीक से जुड़ी सुविधाओं को भी विकसित किया गया है। विश्वविद्यालय का मकसद विद्यार्थियों को सिर्फ किताबी पढ़ाई तक सीमित रखने के बजाय उन्हें रिसर्च और नई तकनीक से जोड़ना है।

नई शिक्षा नीति के हिसाब से बदला पाठ्यक्रम
विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुसार अपने पाठ्यक्रमों में बदलाव किया है। नए विषयों और बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रमों को अपडेट किया गया है। विश्वविद्यालय की ओर से अकादमिक और परीक्षा कैलेंडर तैयार करने के साथ गुणवत्ता सुधार पर भी काम किया गया है।

डिजिटल तरीके से कामकाज पर भी जोर
विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामकाज में डिजिटल व्यवस्था बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया है। समर्थ प्रणाली के माध्यम से ई-गवर्नेंस को आगे बढ़ाया गया है। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और शैक्षणिक कामकाज को ज्यादा व्यवस्थित और आसान बनाना है।

बड़े संस्थानों के साथ बढ़ा सहयोग
रिसर्च और पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने देश के कई बड़े शैक्षणिक और शोध संस्थानों के साथ समझौते किए हैं। इनमें आईआईटी पटना, आईजीआईएमएस, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, एनआईईएलआईटी, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, चंद्रगुप्त प्रबंध संस्थान, अमिटी विश्वविद्यालय, डीवाई पाटिल इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय और जय प्रकाश विश्वविद्यालय जैसे संस्थान शामिल हैं।

नई तकनीक पर भी विद्यार्थियों का ध्यान
विश्वविद्यालय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, ड्रोन तकनीक, रोबोटिक्स, नैनो तकनीक, स्टेम सेल विज्ञान और अंतरिक्ष शिक्षा जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है। वर्ष 2026 में पायथन प्रोग्रामिंग और व्यावसायिक काम में जनरेटिव कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल को लेकर भी सहयोग की पहल की गई है।

अंतरिक्ष शिक्षा को लेकर भी बड़ी पहल
आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय ने बिहार में अंतरिक्ष शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। वर्ष 2026 में आर्यभट्ट स्पेस क्लब ऑफ बिहार की शुरुआत की गई। विश्वविद्यालय के मुताबिक इसका मकसद बिहार के विद्यार्थियों में अंतरिक्ष विज्ञान, उपग्रह तकनीक, खगोल विज्ञान और रिसर्च को लेकर रुचि बढ़ाना है।

खगोल विज्ञान की पढ़ाई को दिया जा रहा बढ़ावा
विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एस्ट्रोनॉमी के कामकाज को आगे बढ़ाने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इसके साथ सर्वे ऑफ इंडिया और सैटकॉम इंडस्ट्रीज एसोसिएशन जैसे संस्थानों के साथ भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश की गई है। विश्वविद्यालय की नई पहलों में अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान को खास जगह मिलती दिखाई दे रही है।

करीब 900 विद्यार्थियों को मिला विशेष प्रशिक्षण
कौशल विकास के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय ने काम किया है। भूगोल विभाग और बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड के सहयोग से करीब 900 विद्यार्थियों को भू-सर्वेक्षण से जुड़ा उन्नत प्रशिक्षण दिया गया। इस तरह के प्रशिक्षण का मकसद विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक कौशल देना है।

खेल और दूसरी गतिविधियों पर भी ध्यान
विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेल और दूसरी गतिविधियों में आगे बढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए विद्यार्थियों को अवसर और प्रोत्साहन देने की कोशिश की गई है।

राष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ी पहचान
आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय की अकादमिक गतिविधियों का दायरा बिहार से बाहर भी बढ़ा है। विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व जापान जाने वाले भारतीय कुलपतियों के प्रतिनिधिमंडल और ब्रिटेन जाने वाले अंतर-विश्वविद्यालय सहयोग प्रतिनिधिमंडल में हुआ। इससे विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंचों पर अपनी गतिविधियां सामने रखने का मौका मिला।

करीब 100 विश्वविद्यालयों के कुलपति पटना पहुंचे
विश्वविद्यालय में एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के पूर्वी क्षेत्र के कुलपतियों की बैठक का आयोजन भी किया गया। इसमें करीब 100 विश्वविद्यालयों के कुलपति शामिल हुए। यह आयोजन विश्वविद्यालय के लिए देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ संवाद बढ़ाने का महत्वपूर्ण मौका रहा।

एआईयू ने भी बनाया विकास केंद्र
विश्वविद्यालय में एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज से जुड़ा अकादमिक एवं प्रशासनिक विकास केंद्र भी स्थापित किया गया है। वर्ष 2024 में विश्वविद्यालय को इस केंद्र के लिए मान्यता मिली थी। इसका मकसद शिक्षकों, प्रशासनिक कर्मचारियों और उच्च शिक्षा से जुड़े लोगों के कौशल और कामकाज को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना है।

अब शिक्षा को रोजगार और रिसर्च से जोड़ने की कोशिश
विश्वविद्यालय की हालिया गतिविधियों को देखें तो उसका फोकस अब सिर्फ डिग्री देने तक सीमित नहीं रह गया है। नई तकनीक, रिसर्च, कौशल विकास, उद्योगों से संपर्क और विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय की आधिकारिक जानकारी में भी बेहतर रोजगार, रिसर्च और नई शिक्षा के क्षेत्रों में आगे बढ़ने को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा गया है।

आगे और नए क्षेत्रों पर नजर
कुलपति प्रो. (डॉ.) शरद कुमार यादव के नेतृत्व में विश्वविद्यालय अब साइबर सुरक्षा, शहरी नीति, अंतरिक्ष विज्ञान, स्टेम सेल, नैनो तकनीक, डिजिटल मीडिया और सामाजिक व्यवहार जैसे नए क्षेत्रों में काम बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले समय में विश्वविद्यालय में नए पाठ्यक्रम, शोध परियोजनाएं और संस्थानों के साथ नए समझौते देखने को मिल सकते हैं।

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आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में बड़ा बदलाव, नए स्कूल और रोजगार से जुड़े कोर्स शुरू; रिसर्च और उद्योगों से भी बढ़ा जुड़ाव

By Malay Ojha | Published: 22 August 2026 at 06:27 PM

पटना स्थित आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय ने जनवरी 2024 से अब तक पढ़ाई, रिसर्च, नई तकनीक, कौशल विकास और उद्योगों के साथ जुड़ाव के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव किए हैं। कुलपति प्रो. (डॉ.) शरद कुमार यादव के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने नए स्कूल और केंद्र शुरू करने के साथ कई नए स्नातकोत्तर और रोजगार से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। विश्वविद्यालय की मौजूदा वेबसाइट पर भी खगोल विज्ञान, स्टेम सेल तकनीक, नैनो विज्ञान, भूगोल और नदी अध्ययन जैसे कई स्कूलों को प्रमुखता से दिखाया गया है।

विश्वविद्यालय में अब पारंपरिक विषयों के साथ ऐसे क्षेत्रों पर भी जोर दिया जा रहा है, जिनमें आने वाले समय में रोजगार और रिसर्च के नए अवसर बन रहे हैं। नैनो विज्ञान, नदी विज्ञान, जल संसाधन इंजीनियरिंग, जीआईएस और रिमोट सेंसिंग, अंतरिक्ष विज्ञान, प्रबंधन, अर्थशास्त्र, दर्शन, पत्रकारिता और भूगोल जैसे विषयों में स्नातकोत्तर पढ़ाई शुरू की गई है।

कई नए स्कूल और केंद्र बनाए गए
विश्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार, भूगोल, नदी अध्ययन, पाटलिपुत्र स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, स्टेम सेल तकनीक, खगोल विज्ञान और दर्शन जैसे क्षेत्रों को स्कूल के रूप में विकसित किया गया है। इसके अलावा कानून, प्रबंधन और शहरी नीति एवं सुशासन से जुड़े नए केंद्र भी बनाए गए हैं। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्तमान में खगोल विज्ञान, स्टेम सेल तकनीक, दर्शन, नैनो विज्ञान, भूगोल और नदी अध्ययन जैसे स्कूलों की जानकारी उपलब्ध है।

रोजगार से जुड़े नए कोर्स पर जोर
विश्वविद्यालय का जोर सिर्फ नए विषय शुरू करने तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के बेहतर अवसर मिलें, इसके लिए फिल्म निर्माण, फोटोग्राफी, डिजिटल पत्रकारिता, ऑनलाइन पत्रकारिता, मीडिया लेखन, स्टेम सेल जीवविज्ञान और पुनर्योजी चिकित्सा जैसे विषयों से जुड़े पाठ्यक्रम भी शुरू किए गए हैं।

नैनो तकनीक में रिसर्च भी आगे बढ़ी
नैनो विज्ञान और नैनो तकनीक विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण रिसर्च क्षेत्रों में शामिल है। विश्वविद्यालय के नैनो विज्ञान केंद्र के मुताबिक यहां विज्ञान, इंजीनियरिंग, कृषि, चिकित्सा, खाद्य और आयुर्वेद समेत कई क्षेत्रों में शोध हुआ है। केंद्र की वेबसाइट पर 200 से अधिक शोध पत्रों और दो पेटेंट के बारे में भी जानकारी दी गई है।

पढ़ाई के साथ रिसर्च का माहौल बनाने की कोशिश
रिसर्च को मजबूत बनाने के लिए विश्वविद्यालय में रिसर्च कंसोर्टियम बनाया गया है। इसके साथ इनक्यूबेशन सेंटर और प्लेसमेंट सेल की स्थापना की गई है। आधुनिक केंद्रीय पुस्तकालय और सूचना तकनीक से जुड़ी सुविधाओं को भी विकसित किया गया है। विश्वविद्यालय का मकसद विद्यार्थियों को सिर्फ किताबी पढ़ाई तक सीमित रखने के बजाय उन्हें रिसर्च और नई तकनीक से जोड़ना है।

नई शिक्षा नीति के हिसाब से बदला पाठ्यक्रम
विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुसार अपने पाठ्यक्रमों में बदलाव किया है। नए विषयों और बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रमों को अपडेट किया गया है। विश्वविद्यालय की ओर से अकादमिक और परीक्षा कैलेंडर तैयार करने के साथ गुणवत्ता सुधार पर भी काम किया गया है।

डिजिटल तरीके से कामकाज पर भी जोर
विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कामकाज में डिजिटल व्यवस्था बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया है। समर्थ प्रणाली के माध्यम से ई-गवर्नेंस को आगे बढ़ाया गया है। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और शैक्षणिक कामकाज को ज्यादा व्यवस्थित और आसान बनाना है।

बड़े संस्थानों के साथ बढ़ा सहयोग
रिसर्च और पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने देश के कई बड़े शैक्षणिक और शोध संस्थानों के साथ समझौते किए हैं। इनमें आईआईटी पटना, आईजीआईएमएस, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, एनआईईएलआईटी, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, चंद्रगुप्त प्रबंध संस्थान, अमिटी विश्वविद्यालय, डीवाई पाटिल इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय और जय प्रकाश विश्वविद्यालय जैसे संस्थान शामिल हैं।

नई तकनीक पर भी विद्यार्थियों का ध्यान
विश्वविद्यालय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, ड्रोन तकनीक, रोबोटिक्स, नैनो तकनीक, स्टेम सेल विज्ञान और अंतरिक्ष शिक्षा जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है। वर्ष 2026 में पायथन प्रोग्रामिंग और व्यावसायिक काम में जनरेटिव कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल को लेकर भी सहयोग की पहल की गई है।

अंतरिक्ष शिक्षा को लेकर भी बड़ी पहल
आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय ने बिहार में अंतरिक्ष शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। वर्ष 2026 में आर्यभट्ट स्पेस क्लब ऑफ बिहार की शुरुआत की गई। विश्वविद्यालय के मुताबिक इसका मकसद बिहार के विद्यार्थियों में अंतरिक्ष विज्ञान, उपग्रह तकनीक, खगोल विज्ञान और रिसर्च को लेकर रुचि बढ़ाना है।

खगोल विज्ञान की पढ़ाई को दिया जा रहा बढ़ावा
विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एस्ट्रोनॉमी के कामकाज को आगे बढ़ाने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इसके साथ सर्वे ऑफ इंडिया और सैटकॉम इंडस्ट्रीज एसोसिएशन जैसे संस्थानों के साथ भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश की गई है। विश्वविद्यालय की नई पहलों में अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान को खास जगह मिलती दिखाई दे रही है।

करीब 900 विद्यार्थियों को मिला विशेष प्रशिक्षण
कौशल विकास के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय ने काम किया है। भूगोल विभाग और बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड के सहयोग से करीब 900 विद्यार्थियों को भू-सर्वेक्षण से जुड़ा उन्नत प्रशिक्षण दिया गया। इस तरह के प्रशिक्षण का मकसद विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक कौशल देना है।

खेल और दूसरी गतिविधियों पर भी ध्यान
विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेल और दूसरी गतिविधियों में आगे बढ़ने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए विद्यार्थियों को अवसर और प्रोत्साहन देने की कोशिश की गई है।

राष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ी पहचान
आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय की अकादमिक गतिविधियों का दायरा बिहार से बाहर भी बढ़ा है। विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व जापान जाने वाले भारतीय कुलपतियों के प्रतिनिधिमंडल और ब्रिटेन जाने वाले अंतर-विश्वविद्यालय सहयोग प्रतिनिधिमंडल में हुआ। इससे विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंचों पर अपनी गतिविधियां सामने रखने का मौका मिला।

करीब 100 विश्वविद्यालयों के कुलपति पटना पहुंचे
विश्वविद्यालय में एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज के पूर्वी क्षेत्र के कुलपतियों की बैठक का आयोजन भी किया गया। इसमें करीब 100 विश्वविद्यालयों के कुलपति शामिल हुए। यह आयोजन विश्वविद्यालय के लिए देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ संवाद बढ़ाने का महत्वपूर्ण मौका रहा।

एआईयू ने भी बनाया विकास केंद्र
विश्वविद्यालय में एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज से जुड़ा अकादमिक एवं प्रशासनिक विकास केंद्र भी स्थापित किया गया है। वर्ष 2024 में विश्वविद्यालय को इस केंद्र के लिए मान्यता मिली थी। इसका मकसद शिक्षकों, प्रशासनिक कर्मचारियों और उच्च शिक्षा से जुड़े लोगों के कौशल और कामकाज को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना है।

अब शिक्षा को रोजगार और रिसर्च से जोड़ने की कोशिश
विश्वविद्यालय की हालिया गतिविधियों को देखें तो उसका फोकस अब सिर्फ डिग्री देने तक सीमित नहीं रह गया है। नई तकनीक, रिसर्च, कौशल विकास, उद्योगों से संपर्क और विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय की आधिकारिक जानकारी में भी बेहतर रोजगार, रिसर्च और नई शिक्षा के क्षेत्रों में आगे बढ़ने को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा गया है।

आगे और नए क्षेत्रों पर नजर
कुलपति प्रो. (डॉ.) शरद कुमार यादव के नेतृत्व में विश्वविद्यालय अब साइबर सुरक्षा, शहरी नीति, अंतरिक्ष विज्ञान, स्टेम सेल, नैनो तकनीक, डिजिटल मीडिया और सामाजिक व्यवहार जैसे नए क्षेत्रों में काम बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले समय में विश्वविद्यालय में नए पाठ्यक्रम, शोध परियोजनाएं और संस्थानों के साथ नए समझौते देखने को मिल सकते हैं।

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