National

spot_img

बिहार में गन्ने का भाव 750 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग, किसानों ने सरकार को भेजा लागत का पूरा हिसाब

By aryavartalive | Published: 22 August 2026 at 06:45 PM

बिहार में नए पेराई सीजन 2026-27 से पहले गन्ने के दाम को लेकर किसानों ने सरकार के सामने अपनी मांग रख दी है। बिहार राज्य गन्ना किसान मोर्चा ने मुख्यमंत्री, गन्ना उद्योग विकास मंत्री, विभाग के सचिव और गन्ना आयुक्त को ईमेल भेजकर गन्ने का भाव कम से कम 750 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग की है। किसान नेताओं ने इसके साथ एक एकड़ गन्ने की खेती में होने वाले खर्च का पूरा हिसाब भी सरकार को भेजा है।

बिहार राज्य गन्ना किसान मोर्चा के अध्यक्ष अशोक प्रसाद सिंह और महासचिव प्रो. आनंद किशोर ने कहा कि किसानों से चर्चा के बाद एक एकड़ गन्ने की खेती की लागत का हिसाब तैयार किया गया है। मोर्चा का दावा है कि मौजूदा लागत को देखते हुए किसानों को गन्ने का उचित भाव नहीं मिला तो खेती करना उनके लिए मुश्किल होता जाएगा।

एक एकड़ में खेती का खर्च 1.88 लाख रुपये तक पहुंचा
किसान मोर्चा के मुताबिक एक एकड़ खेत में गन्ने की खेती के लिए खेत तैयार करने से लेकर फसल तैयार करने तक कई तरह के खर्च होते हैं। इसमें ट्रैक्टर से खेत की तैयारी, गन्ने का बीज, खाद, रासायनिक उर्वरक और मजदूरी समेत दूसरे खर्च शामिल हैं। इन खर्चों पर चार प्रतिशत ब्याज जोड़ने के बाद करीब 1,28,055 रुपये का खर्च बताया गया है।

जमीन की कीमत भी लागत में जोड़ने की मांग
मोर्चा ने खेती की जमीन की कीमत को भी गन्ना उत्पादन की लागत में शामिल किया है। किसान नेताओं के मुताबिक एक एकड़ जमीन की न्यूनतम कीमत करीब 15 लाख रुपये मानते हुए उस पर चार प्रतिशत ब्याज जोड़ने के बाद कुल लागत करीब 1,88,055 रुपये बैठती है। किसानों का कहना है कि खेती की वास्तविक लागत का आकलन करते समय जमीन में लगी पूंजी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

250 क्विंटल उत्पादन का लगाया अनुमान
किसान मोर्चा ने बेहतर उत्पादन की स्थिति में एक एकड़ से करीब 250 क्विंटल गन्ना मिलने का अनुमान लगाया है। इस हिसाब से कुल लागत को उत्पादन से जोड़ने पर करीब 752 रुपये प्रति क्विंटल का खर्च निकलता है। इसी गणना को आधार बनाकर किसानों ने सरकार से कम से कम 750 रुपये प्रति क्विंटल का भाव तय करने की मांग की है।

किसानों का कहना- इससे कम भाव पर खेती मुश्किल
किसान नेताओं का कहना है कि अगर गन्ने का भाव उनकी लागत के आसपास भी नहीं रहा तो खेती से किसानों का भरोसा और कम होगा। उनका दावा है कि उचित दाम नहीं मिलने की वजह से बिहार में कई किसान धीरे-धीरे गन्ने की खेती से दूरी बना रहे हैं। ऐसे में सरकार को गन्ने का ऐसा भाव तय करना चाहिए जिससे किसान अगली फसल के लिए भी उत्साहित रहें।

नए चीनी मिलों को चलाने के लिए भी जरूरी बताया
गन्ना किसान मोर्चा ने गन्ने के दाम को बिहार में बंद या नई चीनी मिलों की स्थिति से भी जोड़ा है। किसान नेताओं का कहना है कि अगर सरकार बिहार में चीनी उद्योग को फिर से मजबूत करना चाहती है और नई चीनी मिलों को चालू कराने की दिशा में गंभीर है तो सबसे पहले गन्ना किसानों को लाभकारी कीमत देनी होगी।

मुख्यमंत्री से खुद पहल करने की मांग
मोर्चा के अध्यक्ष अशोक प्रसाद सिंह और महासचिव प्रो. आनंद किशोर ने मुख्यमंत्री से इस मामले में खुद पहल करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार को किसानों की बढ़ती लागत की समीक्षा करनी चाहिए और उसके बाद 2026-27 के पेराई सीजन के लिए गन्ने का नया भाव तय करना चाहिए।

स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश का भी दिया हवाला
किसान नेताओं ने अपनी मांग के समर्थन में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश का भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि किसानों को उनकी फसल की लागत से डेढ़ गुना कीमत देने का वादा किया गया था। ऐसे में गन्ने की खेती में लगातार बढ़ रहे खर्च को ध्यान में रखकर ही इसका भाव तय होना चाहिए।

एक गन्ने से सिर्फ चीनी ही नहीं बनती
गन्ना किसानों का कहना है कि गन्ने से सिर्फ चीनी तैयार नहीं होती। चीनी मिलों में गन्ने से चीनी के साथ एथेनॉल, खाद, बिजली, कागज और गत्ता जैसे कई उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों से चीनी उद्योग को होने वाली कमाई का फायदा गन्ना किसानों को भी मिलना चाहिए।

किसानों को उप-उत्पादों का फायदा देने की मांग
मोर्चा ने सरकार से मांग की है कि गन्ने से तैयार होने वाले दूसरे उत्पादों से होने वाले फायदे में किसानों के हित को भी ध्यान में रखा जाए। किसान नेताओं का कहना है कि गन्ना उद्योग से जुड़े हर हिस्से को फायदा मिल रहा है तो खेती करने वाले किसान को सिर्फ गन्ने के तय भाव तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

सरकार चीनी मिलों और किसानों के बीच संतुलन बनाए
किसान मोर्चा का सुझाव है कि सरकार चीनी मिलों से किसानों को उनकी क्षमता के अनुसार गन्ने का मूल्य दिलाए और अगर तय कीमत और किसानों की मांग के बीच अंतर रह जाता है तो उस अंतर की भरपाई सरकार सब्सिडी के जरिए करे। इससे किसानों को उचित दाम मिल सकेगा और चीनी मिलों पर भी पूरा बोझ नहीं पड़ेगा।

गन्ने की खेती बचाने की चुनौती
बिहार में गन्ने की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों का भरोसा बनाए रखना बड़ी चुनौती है। खेती की लागत में बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई, मशीन और खेत की तैयारी जैसे खर्च लगातार जुड़े रहते हैं। ऐसे में किसानों का कहना है कि अगर फसल का भाव लागत के मुताबिक नहीं बढ़ा तो आने वाले समय में गन्ने का रकबा और घट सकता है।

सरकार के फैसले पर किसानों की नजर
अब निगाह सरकार के अगले फैसले पर है। 2026-27 के नए पेराई सीजन से पहले गन्ने का भाव तय किया जाना है। किसान संगठन ने पहले ही अपनी मांग और लागत का हिसाब सरकार तक पहुंचा दिया है। ऐसे में किसानों को उम्मीद है कि सरकार लागत का अध्ययन कर ऐसा भाव तय करेगी जिससे गन्ने की खेती उनके लिए फायदे का सौदा बनी रहे।

750 रुपये की मांग पर क्या होगा फैसला?
गन्ना किसान मोर्चा ने साफ कर दिया है कि उसकी मांग कम से कम 750 रुपये प्रति क्विंटल की है। संगठन की ओर से दिए गए लागत के हिसाब में प्रति क्विंटल खर्च करीब 752 रुपये बताया गया है। अब देखना होगा कि सरकार किसानों की इस गणना को किस तरह देखती है और नए पेराई सीजन के लिए गन्ने का भाव कितना तय करती है।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

International

spot_img

बिहार में गन्ने का भाव 750 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग, किसानों ने सरकार को भेजा लागत का पूरा हिसाब

By aryavartalive | Published: 22 August 2026 at 06:45 PM

बिहार में नए पेराई सीजन 2026-27 से पहले गन्ने के दाम को लेकर किसानों ने सरकार के सामने अपनी मांग रख दी है। बिहार राज्य गन्ना किसान मोर्चा ने मुख्यमंत्री, गन्ना उद्योग विकास मंत्री, विभाग के सचिव और गन्ना आयुक्त को ईमेल भेजकर गन्ने का भाव कम से कम 750 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की मांग की है। किसान नेताओं ने इसके साथ एक एकड़ गन्ने की खेती में होने वाले खर्च का पूरा हिसाब भी सरकार को भेजा है।

बिहार राज्य गन्ना किसान मोर्चा के अध्यक्ष अशोक प्रसाद सिंह और महासचिव प्रो. आनंद किशोर ने कहा कि किसानों से चर्चा के बाद एक एकड़ गन्ने की खेती की लागत का हिसाब तैयार किया गया है। मोर्चा का दावा है कि मौजूदा लागत को देखते हुए किसानों को गन्ने का उचित भाव नहीं मिला तो खेती करना उनके लिए मुश्किल होता जाएगा।

एक एकड़ में खेती का खर्च 1.88 लाख रुपये तक पहुंचा
किसान मोर्चा के मुताबिक एक एकड़ खेत में गन्ने की खेती के लिए खेत तैयार करने से लेकर फसल तैयार करने तक कई तरह के खर्च होते हैं। इसमें ट्रैक्टर से खेत की तैयारी, गन्ने का बीज, खाद, रासायनिक उर्वरक और मजदूरी समेत दूसरे खर्च शामिल हैं। इन खर्चों पर चार प्रतिशत ब्याज जोड़ने के बाद करीब 1,28,055 रुपये का खर्च बताया गया है।

जमीन की कीमत भी लागत में जोड़ने की मांग
मोर्चा ने खेती की जमीन की कीमत को भी गन्ना उत्पादन की लागत में शामिल किया है। किसान नेताओं के मुताबिक एक एकड़ जमीन की न्यूनतम कीमत करीब 15 लाख रुपये मानते हुए उस पर चार प्रतिशत ब्याज जोड़ने के बाद कुल लागत करीब 1,88,055 रुपये बैठती है। किसानों का कहना है कि खेती की वास्तविक लागत का आकलन करते समय जमीन में लगी पूंजी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

250 क्विंटल उत्पादन का लगाया अनुमान
किसान मोर्चा ने बेहतर उत्पादन की स्थिति में एक एकड़ से करीब 250 क्विंटल गन्ना मिलने का अनुमान लगाया है। इस हिसाब से कुल लागत को उत्पादन से जोड़ने पर करीब 752 रुपये प्रति क्विंटल का खर्च निकलता है। इसी गणना को आधार बनाकर किसानों ने सरकार से कम से कम 750 रुपये प्रति क्विंटल का भाव तय करने की मांग की है।

किसानों का कहना- इससे कम भाव पर खेती मुश्किल
किसान नेताओं का कहना है कि अगर गन्ने का भाव उनकी लागत के आसपास भी नहीं रहा तो खेती से किसानों का भरोसा और कम होगा। उनका दावा है कि उचित दाम नहीं मिलने की वजह से बिहार में कई किसान धीरे-धीरे गन्ने की खेती से दूरी बना रहे हैं। ऐसे में सरकार को गन्ने का ऐसा भाव तय करना चाहिए जिससे किसान अगली फसल के लिए भी उत्साहित रहें।

नए चीनी मिलों को चलाने के लिए भी जरूरी बताया
गन्ना किसान मोर्चा ने गन्ने के दाम को बिहार में बंद या नई चीनी मिलों की स्थिति से भी जोड़ा है। किसान नेताओं का कहना है कि अगर सरकार बिहार में चीनी उद्योग को फिर से मजबूत करना चाहती है और नई चीनी मिलों को चालू कराने की दिशा में गंभीर है तो सबसे पहले गन्ना किसानों को लाभकारी कीमत देनी होगी।

मुख्यमंत्री से खुद पहल करने की मांग
मोर्चा के अध्यक्ष अशोक प्रसाद सिंह और महासचिव प्रो. आनंद किशोर ने मुख्यमंत्री से इस मामले में खुद पहल करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार को किसानों की बढ़ती लागत की समीक्षा करनी चाहिए और उसके बाद 2026-27 के पेराई सीजन के लिए गन्ने का नया भाव तय करना चाहिए।

स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश का भी दिया हवाला
किसान नेताओं ने अपनी मांग के समर्थन में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश का भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि किसानों को उनकी फसल की लागत से डेढ़ गुना कीमत देने का वादा किया गया था। ऐसे में गन्ने की खेती में लगातार बढ़ रहे खर्च को ध्यान में रखकर ही इसका भाव तय होना चाहिए।

एक गन्ने से सिर्फ चीनी ही नहीं बनती
गन्ना किसानों का कहना है कि गन्ने से सिर्फ चीनी तैयार नहीं होती। चीनी मिलों में गन्ने से चीनी के साथ एथेनॉल, खाद, बिजली, कागज और गत्ता जैसे कई उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों से चीनी उद्योग को होने वाली कमाई का फायदा गन्ना किसानों को भी मिलना चाहिए।

किसानों को उप-उत्पादों का फायदा देने की मांग
मोर्चा ने सरकार से मांग की है कि गन्ने से तैयार होने वाले दूसरे उत्पादों से होने वाले फायदे में किसानों के हित को भी ध्यान में रखा जाए। किसान नेताओं का कहना है कि गन्ना उद्योग से जुड़े हर हिस्से को फायदा मिल रहा है तो खेती करने वाले किसान को सिर्फ गन्ने के तय भाव तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

सरकार चीनी मिलों और किसानों के बीच संतुलन बनाए
किसान मोर्चा का सुझाव है कि सरकार चीनी मिलों से किसानों को उनकी क्षमता के अनुसार गन्ने का मूल्य दिलाए और अगर तय कीमत और किसानों की मांग के बीच अंतर रह जाता है तो उस अंतर की भरपाई सरकार सब्सिडी के जरिए करे। इससे किसानों को उचित दाम मिल सकेगा और चीनी मिलों पर भी पूरा बोझ नहीं पड़ेगा।

गन्ने की खेती बचाने की चुनौती
बिहार में गन्ने की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों का भरोसा बनाए रखना बड़ी चुनौती है। खेती की लागत में बीज, खाद, मजदूरी, सिंचाई, मशीन और खेत की तैयारी जैसे खर्च लगातार जुड़े रहते हैं। ऐसे में किसानों का कहना है कि अगर फसल का भाव लागत के मुताबिक नहीं बढ़ा तो आने वाले समय में गन्ने का रकबा और घट सकता है।

सरकार के फैसले पर किसानों की नजर
अब निगाह सरकार के अगले फैसले पर है। 2026-27 के नए पेराई सीजन से पहले गन्ने का भाव तय किया जाना है। किसान संगठन ने पहले ही अपनी मांग और लागत का हिसाब सरकार तक पहुंचा दिया है। ऐसे में किसानों को उम्मीद है कि सरकार लागत का अध्ययन कर ऐसा भाव तय करेगी जिससे गन्ने की खेती उनके लिए फायदे का सौदा बनी रहे।

750 रुपये की मांग पर क्या होगा फैसला?
गन्ना किसान मोर्चा ने साफ कर दिया है कि उसकी मांग कम से कम 750 रुपये प्रति क्विंटल की है। संगठन की ओर से दिए गए लागत के हिसाब में प्रति क्विंटल खर्च करीब 752 रुपये बताया गया है। अब देखना होगा कि सरकार किसानों की इस गणना को किस तरह देखती है और नए पेराई सीजन के लिए गन्ने का भाव कितना तय करती है।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES