By Malay Ojha | Published: 23 August 2026 at 09:39 AM
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’ बताने वाली तस्वीर दोबारा साझा किए जाने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। ट्रंप ने रविवार को अपने सोशल मीडिया मंच पर यह तस्वीर साझा की। इसके जवाब में ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपना रुख नहीं बदलता और अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का सवाल नहीं है।
ट्रंप की ओर से साझा की गई तस्वीर में रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’ बताया गया है। यह तस्वीर पहली बार 18 अगस्त को भी साझा की गई थी। रविवार को इसे फिर से साझा किए जाने के बाद इस संवेदनशील समुद्री रास्ते को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी एक बार फिर चर्चा में आ गई।
अमेरिका का रुख बदलने तक रास्ता नहीं खुलेगा
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य तब तक नहीं खोला जाएगा, जब तक अमेरिका अपना व्यवहार नहीं बदलता और किए गए वादों को पूरा नहीं करता। ईरानी पक्ष की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के भविष्य को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है।
14 अगस्त को ट्रंप ने क्या कहा था?
होर्मुज को लेकर ट्रंप का रुख अचानक सामने नहीं आया है। 14 अगस्त को लॉन्ग आइलैंड में एक पुलिस अकादमी में संबोधन के दौरान उन्होंने कहा था कि वह बहुत जल्द होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका का क्षेत्र घोषित करेंगे। इसके कुछ दिन बाद उन्होंने इसी दावे वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की थी। हालांकि, तस्वीर साझा करना और किसी समुद्री क्षेत्र को औपचारिक रूप से अमेरिकी क्षेत्र घोषित करना अलग-अलग बातें हैं।
ईरान ने भी तेवर किए और सख्त
ईरान की ओर से होर्मुज को लेकर पहले भी कई बार कड़ा रुख सामने आया है। तेहरान का कहना है कि इस जलमार्ग को दोबारा सामान्य रूप से खोलने के लिए अमेरिका को अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी दबाव, सैन्य गतिविधियों और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर भी आपत्ति जताई है।
होर्मुज पर क्यों है पूरी दुनिया की नजर?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में गिना जाता है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से के लिए यह रास्ता बेहद अहम है। ऐसे में यहां लंबे समय तक आवाजाही प्रभावित रहने का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनिया के ऊर्जा बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
जहाजों की आवाजाही पहले ही प्रभावित
मौजूदा तनाव के बीच इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भी भारी कमी आई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक युद्ध से पहले जहां रोजाना बड़ी संख्या में व्यावसायिक जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, वहीं हाल के दिनों में उनकी आवाजाही बेहद कम हुई है। जहाज कंपनियां सुरक्षा को लेकर सतर्क हैं और कई पोत इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं।
तेल बाजार पर भी पड़ रहा असर
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी गतिरोध का असर कच्चे तेल के बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। इस समुद्री मार्ग से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण बाजार में चिंता बनी हुई है। अगर तनाव लंबा खिंचता है और जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं होती, तो ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को लेकर दबाव और बढ़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत भी अटकी
होर्मुज को लेकर विवाद ऐसे समय बढ़ रहा है, जब अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर बातचीत पहले ही मुश्किल दौर से गुजर रही है। ईरान का कहना है कि अमेरिका को पहले अपने वादों और समझौतों का पालन करना होगा। दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।
ईरान ने अमेरिका को दी आगे बढ़ने की चेतावनी
ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर अमेरिका मौजूदा रुख पर कायम रहता है तो तेहरान भी पीछे हटने वाला नहीं है। इससे दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा होने की आशंका बनी हुई है। ईरान पहले ही कह चुका है कि होर्मुज को खोलने का फैसला उसकी अपनी शर्तों और सुरक्षा हितों से जुड़ा है।
दुनिया के लिए क्यों बढ़ रही चिंता?
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान की तनातनी केवल दो देशों का विवाद नहीं है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की महत्वपूर्ण कड़ी है। अगर यहां लंबे समय तक तनाव बना रहता है, तो इसका असर तेल की कीमतों, समुद्री परिवहन, ईंधन लागत और महंगाई पर पड़ सकता है। यही वजह है कि दुनिया के कई देश इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
ट्रंप के दावे और ईरान के जवाब ने बढ़ाया तनाव
एक तरफ ट्रंप होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बताए जाने वाली तस्वीर साझा कर अपने रुख का संकेत दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान इसे लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा। तेहरान का साफ कहना है कि अमेरिका अपना व्यवहार बदले और समझौतों को पूरा करे, तभी जलडमरूमध्य को खोलने पर विचार किया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और टकराव, दोनों पर दुनिया की नजर रहेगी।
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