By Malay Ojha | Published: 18 October 2026 at 05:35 PM
काशी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात करने पहुंचे कई संतों ने गौमाता की रक्षा के लिए उनके संघर्ष का समर्थन किया। संतों ने धर्म और गौ रक्षा के मुद्दे पर शंकराचार्य के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संत समाज उनके साथ खड़ा है। इस दौरान जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी योगेश्वराचार्य ने गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग उठाते हुए कहा कि ऐसा नहीं हुआ तो यह सरकार के पतन का कारण बन सकता है।
काशी में जुटे कई संत, शंकराचार्य से किया आध्यात्मिक विमर्श
काशी स्थित श्रीविद्यामठ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मिलने के लिए विभिन्न पीठों और आश्रमों से जुड़े संत पहुंचे। इनमें जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी योगेश्वराचार्य, स्वामी अवधेशानंद, स्वामी सारंगधराचार्य, स्वामी चंद्रप्रकाशाचार्य, धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे और अनिरुद्ध रामानुज दास सहित पंडित दिनेश शर्मा शामिल रहे। संतों ने शंकराचार्य से आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा की और उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया।
संतों ने कहा- धर्म और गौ रक्षा के संघर्ष में साथ खड़ा है समाज
मुलाकात के दौरान संतों ने शंकराचार्य के धर्म और गौ रक्षा से जुड़े प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि स्वामी करपात्री जी के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म और गौमाता की रक्षा के लिए आवाज उठाई है। संतों के मुताबिक, उन्होंने सत्ता और धर्मविरोधी नीतियों के खिलाफ परिणाम की चिंता किए बिना अपना संघर्ष जारी रखा है।
संतों ने भरोसा दिलाया कि धर्म और गौ रक्षा के इस अभियान में पूरा संत समाज उनके साथ है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे इस उद्देश्य के लिए किसी भी तरह का बलिदान देने को तैयार हैं।
शंकराचार्य बोले- पद की शोभा बढ़ाने नहीं, धर्म की रक्षा के लिए बने हैं
संतों और श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि उन्होंने शंकराचार्य का पद केवल उसकी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा के लिए स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि यदि गौमाता की हत्या होती रहे और धर्म को नुकसान पहुंचता रहे, तो ऐसे में चुप रहना उनके लिए उचित नहीं होगा।
शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता और धर्म की रक्षा के लिए वह हर संभव प्रयास करेंगे। इसके लिए यदि कोई बलिदान देना पड़े तो भी पीछे नहीं हटेंगे।
शंकराचार्य ने समझाया गौमाता का महत्व
अपने संबोधन में शंकराचार्य ने परिवार और सनातन परंपरा में गौमाता के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देवताओं और गुरुओं का जीवन में विशेष स्थान है, लेकिन हिंदू परिवारों में आज भी पहली रोटी गौमाता के लिए निकालने की परंपरा है। इससे गौमाता के प्रति आस्था और सम्मान का महत्व समझा जा सकता है।
गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग
जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी योगेश्वराचार्य ने गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इस दिशा में कदम नहीं उठाया तो यह उसके पतन का कारण बन सकता है। उनका यह बयान गौ रक्षा के मुद्दे पर सरकार से संत समाज की अपेक्षाओं को सामने रखता है।
संतों को भेंट किया महाप्रसाद और पुस्तक
इस अवसर पर संतों ने शंकराचार्य को अंगवस्त्र, भगवान श्री जगन्नाथ जी का महाप्रसाद और डॉ. अंकिता द्वारा रचित पुस्तक ‘सनातन शाश्वत’ भेंट की। इसके साथ ही श्रीविद्यामठ में मौजूद सैकड़ों बटुकों, विद्वानों और संतों को भी अंगवस्त्र और महाप्रसाद वितरित किया गया। इस कार्यक्रम की जानकारी शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पांडेय के माध्यम से दी गई।
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