By Malay Ojha | Published: 25 October 2026 at 12:27 PM
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने पश्चिमी मोर्चे पर 1,200 किलोमीटर चौड़े और 200 किलोमीटर गहरे इलाके तक सटीक हमले किए। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने रविवार को कहा कि इन हमलों ने साबित कर दिया कि भारतीय वायुसेना की पहुंच से कोई भी लक्ष्य बाहर नहीं है। उन्होंने इस अभियान को वायुसेना की युद्धक क्षमता और रणनीति की बड़ी परीक्षा बताया।
1,200 किलोमीटर के मोर्चे पर सटीक हमले
समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में एपी सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य रणनीति को मजबूती दी है। उनके मुताबिक, वायु शक्ति देश की पहली जवाबी कार्रवाई करने वाली ताकत होने के साथ दुश्मन को किसी भी दुस्साहस से रोकने में भी अहम भूमिका निभाती है।
स्वदेशी हथियारों ने दिखाया दम
चार दिन तक चले इस अभियान की निगरानी करने वाले वायुसेना प्रमुख ने कहा कि स्वदेशी हथियार प्रणालियों ने ऑपरेशन के दौरान शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि भारतीय हथियारों ने दुश्मन के इलाके में गहराई तक प्रभावी हमले किए। उनके मुताबिक, अभियान के दौरान आम नागरिकों और संपत्ति को नुकसान से बचाने के लक्ष्य का भी पालन किया गया।
एक हथियार नहीं, कई क्षमताओं का तालमेल
एपी सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में किसी एक विमान या हथियार पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग सैन्य क्षमताओं को एक साथ इस्तेमाल करना जरूरी है। ऑपरेशन सिंदूर में विमानों, सेंसर, हथियारों और नेटवर्क के बीच तालमेल ने वायुसेना की कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाया। इसी लचीलेपन से जरूरत के मुताबिक जवाब देने और संघर्ष को बढ़ने से रोकने में मदद मिली।
पाकिस्तान के ड्रोन हमलों को रोकने में एयर डिफेंस की भूमिका
वायुसेना प्रमुख के मुताबिक, भारत की स्वदेशी नेटवर्क आधारित एयर डिफेंस प्रणाली ने पाकिस्तानी सेना की ओर से भेजे गए बड़ी संख्या में ड्रोन और दूर से हमला करने वाले हथियारों का मुकाबला किया। उन्होंने कहा कि हमले और बचाव की क्षमताओं ने एक-दूसरे को मजबूत किया। इससे भारतीय सेना को भरोसे के साथ अभियान चलाने में मदद मिली।
पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू हुआ था ऑपरेशन
ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। इस दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। यह अभियान 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के बाद भारत की सबसे बड़ी सीमा पार सैन्य कार्रवाइयों में शामिल रहा।
आगे इन सैन्य क्षमताओं को मजबूत करेगी वायुसेना
एपी सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने वायुसेना की क्षमता आधारित रणनीति को सही साबित किया है, लेकिन इस उपलब्धि के बाद रुकना नहीं चाहिए। वायुसेना को अपनी युद्धक क्षमता, खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और ड्रोन रोधी प्रणालियों को और मजबूत करना होगा।
उन्होंने नेटवर्क सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निर्णय लेने वाली प्रणालियों को भी अहम बताया। इसके अलावा, लंबे समय तक गहन सैन्य अभियान जारी रखने के लिए बेहतर लॉजिस्टिक्स, रखरखाव, बुनियादी ढांचे और स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर जोर देने की जरूरत बताई।
थल, जल, आकाश और साइबर क्षेत्र में तालमेल जरूरी
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि भविष्य के सैन्य अभियानों में वायु, थल, समुद्र, अंतरिक्ष, साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी होगा। इससे तेजी से फैसले लेने और अभियान के असर को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों के आधार पर भारतीय वायुसेना अपनी क्षमताओं को और विकसित करेगी, ताकि जरूरत पड़ने पर देश की ओर से अधिक तेजी, सटीकता और मजबूती के साथ जवाब दिया जा सके।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

