By Malay Ojha | Published: 23 June 2026 at 01:56 PM
अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के बाद बड़ा समझौता सामने आया है। अमेरिका ने ईरान को 60 दिनों तक कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बेचने की छूट दे दी है। इस फैसले से वैश्विक तेल बाजार में राहत की उम्मीद बढ़ गई है। भारत के लिए भी यह खबर अहम मानी जा रही है, क्योंकि ईरान से तेल सप्लाई सामान्य होने पर कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम पड़ सकता है।
स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसके बाद यह अस्थायी समझौता सामने आया। समझौते के तहत ईरान को 21 अगस्त तक तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी गई है। बदले में ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावित नहीं करने का भरोसा दिया है।
21 अगस्त तक तेल बेच सकेगा ईरान
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इसके लिए एक विशेष लाइसेंस जारी किया है। इस लाइसेंस के तहत ईरान से निकलने वाले कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और दूसरे पेट्रोलियम सामान के उत्पादन, बिक्री और डिलीवरी से जुड़े कई लेन-देन को अस्थायी मंजूरी दी गई है।
इसका मतलब है कि जिन गतिविधियों पर पहले अमेरिकी प्रतिबंध लागू थे, उनमें से कई को अगले 60 दिनों तक राहत मिल गई है। इससे वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में होने वाला हर बदलाव सीधे भारत की अर्थव्यवस्था पर असर डालता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान से तेल की सप्लाई दोबारा बढ़ती है तो वैश्विक बाजार में आपूर्ति का दबाव कम होगा और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। इसका असर भारत के आयात बिल और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
कभी भारत का बड़ा तेल साझेदार था ईरान
अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले भारत, ईरान से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता था। दोनों देशों के बीच ऊर्जा कारोबार कई वर्षों तक मजबूत रहा। लेकिन वर्ष 2019 में अमेरिका ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए, जिसके बाद भारत समेत कई देशों को तेहरान से तेल खरीद कम करनी पड़ी।
इसके बाद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरे विकल्पों की तलाश शुरू की और बाद में रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीदने लगा।
वैश्विक बाजार की नजर अगले 60 दिनों पर
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह छूट भले ही केवल 60 दिनों के लिए दी गई हो, लेकिन इससे आगे की बातचीत का रास्ता खुल सकता है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में और सुधार होता है तो तेल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि अगले दो महीनों में दोनों देशों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या ईरान को लंबी अवधि की राहत मिल पाती है या नहीं।
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