By Malay Ojha | Published: 21 July 2026 at 01:30 PM
नीट पेपर लीक मामले को लेकर चल रहे विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एनडीए संसदीय दल की बैठक में सरकार का रुख साफ कर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का संदेश साफ है कि परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बैठक के बाद बताया कि प्रधानमंत्री ने नीट पेपर लीक के मुद्दे पर विशेष तौर पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों को लेकर संवेदनशील है और परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि पेपर लीक के दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।
पीएम मोदी ने कहा- पेपर लीक पर राजनीति नहीं होनी चाहिए
बैठक में प्रधानमंत्री ने नीट पेपर लीक को केवल किसी एक राज्य या क्षेत्र का मुद्दा मानने के बजाय पूरे देश से जुड़ा मामला बताया। उनका कहना था कि छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील विषय पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है। सरकार का जोर अब ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर है, जिसमें भविष्य में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने जैसी घटनाओं की गुंजाइश कम से कम हो।
13 लोगों की गिरफ्तारी का भी किया गया जिक्र
बैठक के दौरान नीट पेपर लीक मामले में अब तक हुई कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया। सरकार की ओर से बताया गया कि मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा दोबारा परीक्षा और परिणाम से जुड़े कदम भी उठाए गए। सरकार का दावा है कि पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अनावश्यक देरी नहीं होने दी गई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि आने वाले समय में परीक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत तथा भरोसेमंद बने।
विपक्ष और प्रदर्शनकारियों के निशाने पर सरकार
नीट विवाद को लेकर दूसरी तरफ सरकार पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। जंतर-मंतर पर लंबे समय से चल रहे प्रदर्शन में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके समेत बड़ी संख्या में युवा और छात्र सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों का सीधा असर उन छात्रों पर पड़ता है, जो वर्षों की मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं।
संसद की ओर मार्च के दौरान बढ़ा तनाव
सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की खबरें सामने आईं और कई लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई। इस घटनाक्रम के बाद नीट विवाद को लेकर चल रहा आंदोलन एक बार फिर चर्चा में आ गया।
सीजेपी ने सरकार के सामने रखीं तीन बड़ी मांगें
प्रदर्शन के बीच सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। संगठन की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, सोनम वांगचुक को अस्पताल से रिहा करने और नीट से जुड़े मामलों में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग शामिल है। इन मांगों पर सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
आंदोलन का दायरा लगातार बढ़ रहा
नीट पेपर लीक से शुरू हुआ यह विवाद अब केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। प्रदर्शनकारी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा को लेकर सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। सीजेपी के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में अभिजीत दिपके के साथ सोनम वांगचुक का मुद्दा भी जुड़ गया है। पिछले कुछ हफ्तों में यह आंदोलन लगातार सुर्खियों में रहा है और सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। ([The Indian Express][5])
सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती
एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए सांसदों के सामने छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट की है, तो दूसरी तरफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे छात्र और युवा इससे आगे की ठोस कार्रवाई चाहते हैं। सरकार के लिए चुनौती यह है कि पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ परीक्षा व्यवस्था में ऐसा बदलाव किया जाए, जिससे छात्रों का भरोसा फिर से मजबूत हो सके।
पेपर लीक पर सख्ती के संदेश से क्या बदलेगा?
प्रधानमंत्री के बयान के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार इस मामले में आगे कौन से ठोस कदम उठाती है। केवल दोषियों को सजा दिलाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में ऐसी खामियों को दूर करना भी जरूरी होगा, जिनका फायदा उठाकर प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं होती हैं। छात्रों और अभिभावकों की नजर अब सरकार की अगली कार्रवाई पर है।
नीट पेपर लीक को लेकर जारी विवाद के बीच प्रधानमंत्री का सख्त संदेश निश्चित तौर पर राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है। सरकार जहां इसे राष्ट्रीय स्तर का गंभीर मुद्दा मानकर कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं प्रदर्शनकारी जवाबदेही और मुआवजे समेत अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में संसद के भीतर होने वाली चर्चा और सड़क पर जारी आंदोलन, दोनों ही इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

