Friday, June 5, 2026

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Bihar MLC चुनाव: JDU ने निशांत को मैदान में उतारा, BJP ने पवन सिंह पर खेला दांव

By Malay Ojha | Published: 05 June 2026 at 09:32 PM

बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार और भोजपुरी सिनेमा के चर्चित चेहरे पवन सिंह की उम्मीदवारी को लेकर हो रही है। जदयू ने जहां निशांत कुमार को पहली बार बड़े राजनीतिक मंच पर उतारा है, वहीं भाजपा ने पवन सिंह पर भरोसा जताकर नया संदेश देने की कोशिश की है।

बिहार में होने वाले विधान परिषद चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से उम्मीदवारों की सूची जारी होते ही दो नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में आ गए हैं। पहला नाम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार का है और दूसरा भोजपुरी फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता एवं गायक पवन सिंह का।

18 जून को होने वाले मतदान में गठबंधन के उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। ऐसे में निशांत कुमार के विधान परिषद पहुंचने की संभावना बेहद मजबूत मानी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे जदयू की भावी रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

जदयू ने चार उम्मीदवारों पर लगाया दांव
जनता दल यूनाइटेड ने निशांत कुमार के अलावा भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि ये सभी चेहरे अलग-अलग सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं और संगठन को मजबूती देंगे।

ललन प्रसाद को उस सीट से उम्मीदवार बनाया गया है जो नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता छोड़ दी थी, जिसके कारण यह सीट रिक्त हुई थी।

पहली बार बड़े राजनीतिक मंच पर निशांत कुमार
निशांत कुमार लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए हुए थे। हालांकि पिछले कुछ महीनों में उनकी सार्वजनिक गतिविधियां बढ़ी हैं। कई राजनीतिक कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि उन्हें जल्द ही औपचारिक रूप से राजनीति में उतारा जा सकता है।

अब विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाए जाने के बाद माना जा रहा है कि जदयू ने भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए बड़ा कदम उठाया है। राजनीतिक विश्लेषक भी इसे महत्वपूर्ण फैसला मान रहे हैं।

भाजपा ने पवन सिंह को दिया बड़ा मौका
भारतीय जनता पार्टी की सूची में सबसे चर्चित नाम पवन सिंह का है। भोजपुरी सिनेमा के बड़े सितारे रहे पवन सिंह का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है, लेकिन पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है।

पार्टी सूत्रों का मानना है कि पवन सिंह की लोकप्रियता का फायदा भाजपा को आगामी विधानसभा चुनावों में भी मिल सकता है। खासकर युवा और भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में उनका प्रभाव अब भी मजबूत माना जाता है।

लोकसभा चुनाव में चर्चा में रहे थे पवन सिंह
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान पवन सिंह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। भाजपा ने उन्हें पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन उन्होंने वहां से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था।

इसके बाद उन्होंने बिहार की काराकाट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने का फैसला किया। उनके चुनाव लड़ने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था और राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए थे।

काराकाट में बदले थे राजनीतिक समीकरण
काराकाट संसदीय क्षेत्र में पवन सिंह की मौजूदगी ने चुनावी तस्वीर बदल दी थी। बड़ी संख्या में मतदाताओं का समर्थन मिलने के बावजूद वह जीत हासिल नहीं कर सके। हालांकि उनके मैदान में उतरने से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के अधिकृत उम्मीदवार को भी नुकसान उठाना पड़ा था।

उस चुनाव के बाद पवन सिंह ने फिर से भाजपा के साथ अपने रिश्ते मजबूत किए और अब उन्हें विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि वह उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका देना चाहती है।

विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
विधान परिषद चुनाव को आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है। एक तरफ जदयू ने निशांत कुमार को आगे बढ़ाकर राजनीतिक संदेश दिया है, वहीं भाजपा ने पवन सिंह जैसे लोकप्रिय चेहरे को मौका देकर चुनावी समीकरण मजबूत करने की कोशिश की है।

18 जून को होने वाला मतदान भले ही औपचारिक प्रक्रिया माना जा रहा हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने दूरगामी बताए जा रहे हैं। खासकर निशांत कुमार और पवन सिंह की एंट्री आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।

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Bihar MLC चुनाव: JDU ने निशांत को मैदान में उतारा, BJP ने पवन सिंह पर खेला दांव

By Malay Ojha | Published: 05 June 2026 at 09:32 PM

बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार और भोजपुरी सिनेमा के चर्चित चेहरे पवन सिंह की उम्मीदवारी को लेकर हो रही है। जदयू ने जहां निशांत कुमार को पहली बार बड़े राजनीतिक मंच पर उतारा है, वहीं भाजपा ने पवन सिंह पर भरोसा जताकर नया संदेश देने की कोशिश की है।

बिहार में होने वाले विधान परिषद चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से उम्मीदवारों की सूची जारी होते ही दो नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में आ गए हैं। पहला नाम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार का है और दूसरा भोजपुरी फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता एवं गायक पवन सिंह का।

18 जून को होने वाले मतदान में गठबंधन के उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। ऐसे में निशांत कुमार के विधान परिषद पहुंचने की संभावना बेहद मजबूत मानी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे जदयू की भावी रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

जदयू ने चार उम्मीदवारों पर लगाया दांव
जनता दल यूनाइटेड ने निशांत कुमार के अलावा भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि ये सभी चेहरे अलग-अलग सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं और संगठन को मजबूती देंगे।

ललन प्रसाद को उस सीट से उम्मीदवार बनाया गया है जो नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता छोड़ दी थी, जिसके कारण यह सीट रिक्त हुई थी।

पहली बार बड़े राजनीतिक मंच पर निशांत कुमार
निशांत कुमार लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए हुए थे। हालांकि पिछले कुछ महीनों में उनकी सार्वजनिक गतिविधियां बढ़ी हैं। कई राजनीतिक कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि उन्हें जल्द ही औपचारिक रूप से राजनीति में उतारा जा सकता है।

अब विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाए जाने के बाद माना जा रहा है कि जदयू ने भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए बड़ा कदम उठाया है। राजनीतिक विश्लेषक भी इसे महत्वपूर्ण फैसला मान रहे हैं।

भाजपा ने पवन सिंह को दिया बड़ा मौका
भारतीय जनता पार्टी की सूची में सबसे चर्चित नाम पवन सिंह का है। भोजपुरी सिनेमा के बड़े सितारे रहे पवन सिंह का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है, लेकिन पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है।

पार्टी सूत्रों का मानना है कि पवन सिंह की लोकप्रियता का फायदा भाजपा को आगामी विधानसभा चुनावों में भी मिल सकता है। खासकर युवा और भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में उनका प्रभाव अब भी मजबूत माना जाता है।

लोकसभा चुनाव में चर्चा में रहे थे पवन सिंह
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान पवन सिंह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। भाजपा ने उन्हें पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन उन्होंने वहां से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था।

इसके बाद उन्होंने बिहार की काराकाट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने का फैसला किया। उनके चुनाव लड़ने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था और राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए थे।

काराकाट में बदले थे राजनीतिक समीकरण
काराकाट संसदीय क्षेत्र में पवन सिंह की मौजूदगी ने चुनावी तस्वीर बदल दी थी। बड़ी संख्या में मतदाताओं का समर्थन मिलने के बावजूद वह जीत हासिल नहीं कर सके। हालांकि उनके मैदान में उतरने से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के अधिकृत उम्मीदवार को भी नुकसान उठाना पड़ा था।

उस चुनाव के बाद पवन सिंह ने फिर से भाजपा के साथ अपने रिश्ते मजबूत किए और अब उन्हें विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि वह उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका देना चाहती है।

विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
विधान परिषद चुनाव को आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है। एक तरफ जदयू ने निशांत कुमार को आगे बढ़ाकर राजनीतिक संदेश दिया है, वहीं भाजपा ने पवन सिंह जैसे लोकप्रिय चेहरे को मौका देकर चुनावी समीकरण मजबूत करने की कोशिश की है।

18 जून को होने वाला मतदान भले ही औपचारिक प्रक्रिया माना जा रहा हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने दूरगामी बताए जा रहे हैं। खासकर निशांत कुमार और पवन सिंह की एंट्री आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।

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