By Malay Ojha | Published: 07 June 2026 at 06:27 PM
विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने कर्नाटक में अपने राजनीतिक विस्तार की औपचारिक शुरुआत कर दी है। पार्टी प्रमुख और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने राज्य में संगठन निर्माण अभियान का शुभारंभ करते हुए सामाजिक न्याय, समान भागीदारी और वंचित समुदायों के अधिकारों को लेकर बड़ा संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में पार्टी कर्नाटक में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करेगी।
भव्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों और संत समाज के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुकेश सहनी ने कहा कि वीआईपी केवल चुनावी राजनीति करने वाली पार्टी नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति को सम्मान और अधिकार दिलाने के उद्देश्य से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के निषाद, कोली, मछुआरा और मेहनतकश समाज को लंबे समय से उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है।
संघर्ष से राजनीति तक का अपना सफर बताया
अपने संबोधन में सहनी ने अपने जीवन संघर्षों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह एक साधारण मछुआरा परिवार से आते हैं और गरीबी को बहुत करीब से देखा है। मजदूरी से लेकर कारोबार में सफलता हासिल करने तक का सफर आसान नहीं था, लेकिन समाज और संतों के आशीर्वाद ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
समाज की स्थिति देखकर लिया राजनीति में आने का फैसला
मुकेश सहनी ने कहा कि व्यक्तिगत जीवन में सफलता हासिल करने के बाद भी जब उन्होंने अपने समाज की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति देखी तो उन्होंने आरामदायक जीवन छोड़कर संघर्ष का रास्ता चुना। उनका कहना था कि राजनीति उनके लिए सत्ता हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का जरिया है।
सामाजिक वर्गीकरण की विसंगतियों पर उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि निषाद समाज देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग श्रेणियों में शामिल है। कहीं उन्हें अनुसूचित जाति, कहीं अनुसूचित जनजाति और कहीं अन्य पिछड़ा वर्ग में रखा गया है। सहनी ने इसे सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए कहा कि वीआईपी इस असमानता को दूर करने के लिए लगातार आवाज उठा रही है।
सत्ता नहीं, समाज परिवर्तन है प्राथमिकता
कार्यक्रम के दौरान सहनी ने कहा कि यदि वह समझौते की राजनीति करते तो आज बहुत बड़े पद पर पहुंच सकते थे, लेकिन उन्होंने हमेशा समाज के हितों को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि सम्मान और स्वाभिमान के साथ संघर्ष करना किसी भी बड़े पद से अधिक महत्वपूर्ण है।
प्रदेश नेतृत्व को दी बड़ी जिम्मेदारी
कर्नाटक इकाई के प्रदेश अध्यक्ष बी.के. मोहन कुमार को शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उन्हें कई राजनीतिक चुनौतियों और प्रलोभनों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि यदि वे समाज के हितों के लिए समर्पित रहेंगे तो जनता उन्हें और बड़ी जिम्मेदारियां सौंपेगी।
बाबा साहब के विचारों का किया उल्लेख
मुकेश सहनी ने अपने संबोधन में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर को याद करते हुए कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। इसी अधिकार ने गरीब और अमीर को बराबरी का दर्जा दिया है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर रहकर ही मजबूत की जा सकती है।
‘जिसकी जितनी संख्या भारी’ का दोहराया नारा
उन्होंने कहा कि समाज में वास्तविक भागीदारी तभी संभव है जब आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। इसी सोच के साथ वीआईपी सामाजिक न्याय और समान हिस्सेदारी के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ा रही है।
कर्नाटक दौरे और संकल्प यात्रा का ऐलान
सहनी ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद वह कर्नाटक का व्यापक दौरा करेंगे। इसके तहत विभिन्न जिलों में संकल्प यात्रा निकाली जाएगी और समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा।
संत समाज के आशीर्वाद को बताया बड़ी ताकत
कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने कहा कि कर्नाटक में पहली बार इतने बड़े स्तर पर संत समाज का आशीर्वाद मिला है। यही समर्थन और सहयोग राज्य में नई राजनीतिक चेतना पैदा करने में मदद करेगा। उन्होंने उपस्थित लोगों का आभार जताते हुए सामाजिक न्याय और समान भागीदारी की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
कई प्रमुख नेता और संत रहे मौजूद
कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष बी.के. मोहन कुमार सहित अनेक संत, समाजसेवी और वीआईपी के राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर के नेता मौजूद रहे। समारोह में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भी भागीदारी देखने को मिली।

