By Malay Ojha | Published: 15 July 2026 at 03:36 PM
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पिछले विधानसभा चुनाव में जनसुराज के टिकट पर चुनाव लड़ चुके दीघा के नेता बिट्टू सिंह और कुम्हरार से उम्मीदवार रहे गणित के प्रसिद्ध शिक्षक प्रोफेसर केसी सिन्हा ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। चुनावी माहौल के बीच दोनों नेताओं के इस फैसले ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। माना जा रहा है कि इस घटनाक्रम का असर बांकीपुर उपचुनाव के राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
बांकीपुर विधानसभा सीट इस समय पूरे बिहार की सबसे चर्चित सीटों में शामिल है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर स्वयं इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे समय में उनकी पार्टी के दो चर्चित नेताओं का भाजपा में शामिल होना विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के लिए राजनीतिक संदेश देने वाला माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव प्रचार के बीच इस घटनाक्रम से जनसुराज की रणनीति पर असर पड़ सकता है।
बिट्टू सिंह पहले ही छोड़ चुके थे जनसुराज
दीघा से पिछले विधानसभा चुनाव में जनसुराज के उम्मीदवार रहे बिट्टू सिंह ने कुछ दिन पहले ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आठ जुलाई को अपने पद और सदस्यता से अलग होने की घोषणा की थी। इसके बाद अब उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया है। बताया जा रहा है कि भाजपा में उनकी वापसी को ‘घर वापसी’ के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि वह पहले भी इसी दल से जुड़े रहे हैं।
टिकट कटने के बाद बदली थी राजनीतिक राह
बिट्टू सिंह पहले भाजपा के सक्रिय नेताओं में गिने जाते थे। विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने पार्टी से अलग होकर जनसुराज का साथ दिया था और दीघा सीट से चुनाव लड़ा था। अब दोबारा भाजपा में लौटने के बाद माना जा रहा है कि उनके समर्थकों का एक बड़ा वर्ग भी फिर से भाजपा के साथ जुड़ सकता है। खासकर व्यापारिक समाज में उनकी अच्छी पकड़ बताई जाती है।
गणित के शिक्षक केसी सिन्हा की अलग पहचान
कुम्हरार सीट से जनसुराज के उम्मीदवार रहे प्रोफेसर केसी सिन्हा का नाम बिहार में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। गणित की पढ़ाई करने वाले लाखों छात्र उनकी पुस्तकों और अध्ययन सामग्री से परिचित रहे हैं। लंबे समय तक शिक्षा जगत में सक्रिय रहने के साथ-साथ उन्होंने कई विश्वविद्यालयों में कुलपति की जिम्मेदारी भी निभाई है। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी पहचान होने के कारण युवाओं के बीच भी उनका अच्छा प्रभाव माना जाता है।
जनसुराज ने विधानसभा चुनाव में दिया था मौका
पिछले विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने प्रोफेसर केसी सिन्हा पर भरोसा जताते हुए उन्हें कुम्हरार विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था। हालांकि चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन पार्टी के प्रमुख चेहरों में उनकी गिनती होती रही। ऐसे में उनका भाजपा में शामिल होना जनसुराज के लिए एक अहम राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है बांकीपुर का उपचुनाव
बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी थी, जिसके चलते यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। इस सीट पर भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा कुमारी गुप्ता को मैदान में उतारा है। दूसरी ओर जनसुराज की ओर से खुद प्रशांत किशोर चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।
चुनावी मुकाबले पर टिकी पूरे बिहार की नजर
बांकीपुर उपचुनाव को केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं माना जा रहा है। इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की ताकत और जनाधार की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। ऐसे में जनसुराज के दो प्रमुख नेताओं का भाजपा में जाना चुनावी माहौल को और अधिक रोचक बना सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस घटनाक्रम का मतदान और चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ता है।
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